भूकंप के झटकों ने फिर हिलाई कश्मीर की धरती, श्रीनगर से भारी दहशत की तस्वीरें सामने

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संवाद 24 नई दिल्ली । सोमवार की सुबह जम्मू और कश्मीर के हिस्सों में फिर एक भूकंप के झटके महसूस किए गए, जिससे लोगों में भारी घबराहट फैल गई और वे अपने-अपने घरों से बाहर बेहोशी जैसी स्थिति में दौड़ते हुए निकले। सरकारी और वैज्ञानिक एजेंसियों के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार भूकंप की तीव्रता लगभग 4.6 दर्ज़ की गई, जिसका एपीसेंटर बारामूला जिले के पत्तन इलाके के पास बताया गया है। सुबह लगभग 5:35 बजे के आसपास आई इस हल्की लेकिन महसूस होने योग्य भूंकप की वजह से स्थानीय लोगों के अलावा कई देर रात जागे हुए पर्यटक भी दहशत में बाहर निकल आए। इस दौरान किसी मोटे नुकसान की अभी तक आधिकारिक रिपोर्ट नहीं आई है, लेकिन कुछ इलाकों में घरों और इमारतों पर हल्की झटके महसूस किए गए। भूंकप के झटके इतने शक्तिशाली थे कि कई क्षेत्रों में लोग घरों से निकलकर खुले मैदानों की ओर भागे और अपने परिवार के सदस्यों और पड़ोसियों को संदेश भेजकर सुनिश्चित करने की कोशिश की कि सब सुरक्षित हैं। इस तरह के भूकंपीय झटकों से लगभग हर दशक में कश्मीर घाटी में हलचल देखने को मिलती है, क्योंकि यह क्षेत्र भूकंप-संवेदनशील ज़ोन में स्थित है।

भूंकंपीय इतिहास और खतरे की पुष्टि
भौगोलिक विशेषज्ञ मानते हैं कि जम्मू-एवं-कश्मीर का क्षेत्र मुख्य रूप से टेक्टोनिक प्लेटों के टकराव की वजह से सेज़मिक रूप से अत्यंत सक्रिय है। आधुनिक रिकॉर्ड में यह पहली बार नहीं है जब क्षेत्र में झटके महसूस किए गए हैं। उदाहरण के लिए, वर्ष 2005 में आए भूकंप ने इस हिस्से को बुरी तरह प्रभावित किया था जिसमें हजारों की जानें गईं, गंभीर घायल हुए और लाखों लोग बेघर हुए थे। ऐसे हल्की और मध्यम तीव्रता के भूंकंप यहां किसी बड़े विनाश का संकेत नहीं होते, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि बार-बार झटके महसूस होना भूगर्भीय तनाव की ओर संकेत करता है, और इस संवेदनशील इलाके में बड़े भूकंप की संभावना कभी नज़रअंदाज़ नहीं की जा सकती।

स्थिति और सरकारी प्रतिक्रिया
प्रारंभिक ब्योरे के अनुसार सोमवार की सुबह आए भूकंप के बाद तत्काल नेशनल सेंटर ऑफ सीस्मोलॉजी (NCS) और स्थानीय प्रशासन द्वारा सर्वेक्षण कार्य शुरू कर दिया गया है। भूकंप की गहराई और असर पर विस्तृत डेटा एकत्र किया जा रहा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कहीं ढांचागत नुकसान या किसी व्यक्ति को चोट नहीं लगी है। राज्य प्रशासन ने भी लोगों से संयम बनाए रखने और अफवाहों पर विश्वास न करने की सलाह दी है। भूकंप के दौरान सुरक्षा उपायों के तौर पर खुले स्थानों पर खड़े रहने और इमारतों के पास न रुकने की सलाह दी जाती है ताकि किसी भी अप्रत्याशित घटना से बचा जा सके।

लोगों में भय और सोशल मीडिया की हलचल
सोशल मीडिया पर कई वीडियो और तस्वीरें वायरल हो रही हैं जिसमें लोग घरों से बाहर जाते हुए, अपने मोबाइल फोन पर अपने प्रियजनों से संपर्क करते हुए दिखाई दे रहे हैं। कुछ वीडियो में रात के समय झटकों के कारण झूमती दीवारें और उनके नीचे से गुजरती कारों के दृश्य भी साझा किए गए हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि भूकंप आये तो हर कोई अपने घर से बाहर सड़कों पर निकल आया और कईयों ने तो अपने पालतू जानवरों को भी पकड़ कर सुरक्षित स्थान तक ले जाने की कोशिश की।

कश्मीर के लिए सतर्क रहने की आवश्यकता
भूगर्भीय विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इस तरह के झटकों को हल्के में नहीं लेना चाहिए। कश्मीर घाटी और उसके आसपास के इलाके भूकंप-संवेदनशील क्षेत्रों की श्रेणी में आते हैं, जहां पर समय-समय पर झटके महसूस होते रहते हैं। ऐसे इलाकों में सीज़मिक गतिविधियों का अध्ययन निरंतर किया जाना चाहिए ताकि किसी बड़े हादसे से पहले तैयारी की जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि स्थानीय नागरिकों को भी भूकंप सुरक्षा मानकों के बारे में जागरूक किया जाना चाहिए, ताकि आवश्यकता पड़ने पर लोग तत्काल स्वयं सुरक्षा उपाय अपना सकें।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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