
संवाद 24 नई दिल्ली। वैश्विक अर्थव्यवस्था के मंच पर भारत एक ऐसी धुरी बनता जा रहा है, जिसे नजरअंदाज करना अब दुनिया की महाशक्तियों के लिए नामुमकिन है। यूरोपीय संघ (EU) के साथ ऐतिहासिक ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ यानी फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को अंतिम रूप देने के ठीक बाद, अब भारत और अमेरिका के बीच एक बहुत बड़ी व्यापारिक डील (India-US Trade Deal) अपने आखिरी पड़ाव पर पहुंच गई है। सूत्रों की मानें तो इस समझौते की इबारत लिखी जा चुकी है और अब बस आधिकारिक मुहर लगना बाकी है।
आखिरी दौर में बातचीत, ‘किसी भी दिन’ हो सकता है ऐलान
सरकारी गलियारों और विदेश मंत्रालय से छनकर आ रही खबरों के मुताबिक, भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक वार्ता अब ‘डॉटिंग द आईज एंड क्रॉसिंग द टीज’ (बारीकियों को सुलझाने) के चरण में है। इसका सीधा मतलब यह है कि तकनीकी स्तर पर सारा काम पूरा हो चुका है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर के बीच हुई हालिया मुलाकातों ने उन तमाम पेचीदगियों को सुलझा लिया है जो पिछले कई महीनों से बाधा बनी हुई थीं।
ट्रंप का ‘दोस्ताना’ और मोदी का ‘विजन’
हाल ही में दावोस में हुए वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ की थी। ट्रंप ने मोदी को अपना ‘खास दोस्त’ बताते हुए स्पष्ट संकेत दिए थे कि दोनों देश एक बेहद शानदार समझौते की ओर बढ़ रहे हैं। ट्रंप के इस सकारात्मक रुख ने उन आशंकाओं पर विराम लगा दिया है जिसमें कहा जा रहा था कि अमेरिका की नई टैरिफ नीतियां भारत के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती हैं।
500 अरब डॉलर का है लक्ष्य
यह समझौता सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक विशाल आर्थिक विजन है। वर्तमान में भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 191 अरब डॉलर है। इस नई ट्रेड डील के जरिए लक्ष्य रखा गया है कि साल 2030 तक इसे बढ़ाकर 500 अरब डॉलर तक पहुंचाया जाए। अगर ऐसा होता है, तो भारत के आईटी सेक्टर, कपड़ा उद्योग, कृषि उत्पादों और फार्मास्यूटिकल्स के लिए अमेरिका के दरवाजे पहले से कहीं ज्यादा चौड़े खुल जाएंगे।
चीन के लिए क्यों है यह खतरे की घंटी?
विशेषज्ञों का मानना है कि जिस तरह से भारत एक के बाद एक बड़ी अर्थव्यवस्थाओं (पहले ऑस्ट्रेलिया, फिर UAE, हाल ही में EU और अब अमेरिका) के साथ व्यापारिक समझौते कर रहा है, उससे वैश्विक सप्लाई चेन में चीन का दबदबा खत्म हो सकता है। ‘चाइना प्लस वन’ की रणनीति के तहत अब दुनिया भारत को एक विश्वसनीय विकल्प के रूप में देख रही है। अमेरिका और भारत का करीब आना एशिया में शक्ति के संतुलन को पूरी तरह बदल सकता है।
आगे क्या होगा?
अगले हफ्ते विदेश मंत्री एस. जयशंकर का वॉशिंगटन दौरा प्रस्तावित है। माना जा रहा है कि इस दौरे के दौरान व्यापारिक समझौते की अंतिम रूपरेखा पर चर्चा होगी। हालांकि, कुछ संवेदनशील मुद्दों जैसे डेयरी उत्पाद और कुछ विशेष टैरिफ पर अभी भी ‘पॉलिटिकल क्लीयरेंस’ का इंतजार है, लेकिन माहौल पूरी तरह सकारात्मक है। भारतीय बाजार में भी इस खबर के बाद से भारी उत्साह देखा जा रहा है, क्योंकि एक सफल ट्रेड डील का सीधा असर भारतीय कंपनियों के शेयरों और रोजगार के नए अवसरों पर पड़ेगा।






