
संवाद 24 लखनऊ। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) परिसर में स्थित मजारों को हटाने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा जारी 15 दिन के नोटिस के बाद विवाद गहराता जा रहा है। प्रशासन ने इन मजारों को अवैध निर्माण बताते हुए हटाने की प्रक्रिया शुरू की है, जिसके बाद राजनीतिक दलों और विभिन्न धार्मिक-सामाजिक संगठनों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
नोटिस जारी होने के बाद समाजवादी पार्टी, मुस्लिम धार्मिक संगठनों और कई सामाजिक संगठनों ने इसे धार्मिक आस्था पर चोट बताया है। लखनऊ के शाहमीना शाह क्षेत्र में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में वक्ताओं ने दावा किया कि ये मजारें लगभग 600 साल पुरानी हैं और ऐतिहासिक व धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
प्रेस वार्ता के दौरान संगठनों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के निर्णय को एकतरफा बताते हुए नोटिस तत्काल वापस लेने की मांग की। वक्ताओं का कहना था कि बिना व्यापक संवाद और ऐतिहासिक तथ्यों की जांच के इस तरह की कार्रवाई समाज में तनाव पैदा कर सकती है।
मामले को लेकर संगठनों ने राज्य सरकार से हस्तक्षेप करने की भी मांग की है। उनका कहना है कि सरकार को इस विषय में संतुलित निर्णय लेते हुए धार्मिक भावनाओं और कानून दोनों का सम्मान सुनिश्चित करना चाहिए।
हालांकि, KGMU प्रशासन का कहना है कि परिसर में किए गए अतिक्रमण को हटाने की प्रक्रिया नियमों के तहत की जा रही है और नोटिस उसी क्रम में जारी किया गया है। प्रशासन की ओर से अभी इस विवाद पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
फिलहाल मामले को लेकर लखनऊ में राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज है। आगामी दिनों में प्रशासन और सरकार के रुख पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं, जिससे यह तय होगा कि यह विवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है।






