ट्रम्प का ‘टैरिफ वार’: क्या कनाडा की चीन से नजदीकी बढ़ाएगी दुनिया में आर्थिक भूचाल

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संवाद 24 नई दिल्ली । अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के साथ ही वैश्विक व्यापार जगत में हलचल मचा दी है। राष्ट्रपति ट्रम्प ने अपने पड़ोसी और सबसे करीबी व्यापारिक साझेदारों में से एक, कनाडा को चेतावनी दी है कि यदि उसने चीन के साथ अपने नए व्यापारिक समझौते की दिशा में कदम बढ़ाए, तो अमेरिका कनाडा से आने वाले हर सामान पर 100 प्रतिशत टैरिफ (आयात शुल्क) लगा देगा। ट्रम्प की इस घोषणा ने न केवल उत्तरी अमेरिका बल्कि पूरी दुनिया के शेयर बाजारों और आर्थिक विशेषज्ञों को चिंता में डाल दिया है।

चीन से दोस्ती पड़ी भारी?
दरअसल, यह पूरा विवाद कनाडा और चीन के बीच हाल ही में हुए एक गोपनीय ट्रेड एग्रीमेंट के बाद शुरू हुआ है। ट्रम्प प्रशासन का मानना है कि कनाडा इस समझौते के जरिए चीनी उत्पादों को ‘बैकडोर’ एंट्री दे रहा है, जिससे अमेरिकी उद्योगों को भारी नुकसान पहुंच सकता है। ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर अपने कड़े तेवर दिखाते हुए साफ़ किया कि “अमेरिका फर्स्ट” की नीति के तहत वह किसी भी ऐसे देश को बर्दाश्त नहीं करेंगे जो उनके आर्थिक हितों के साथ खिलवाड़ करेगा। उन्होंने कहा कि 100% टैरिफ लगाने का मकसद अमेरिकी नौकरियों को बचाना और चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकना है।

कनाडा की अर्थव्यवस्था पर मंडराता संकट
कनाडा के लिए यह स्थिति किसी दुस्वप्न से कम नहीं है। कनाडा का लगभग 75 प्रतिशत निर्यात सीधे अमेरिका को जाता है। अगर ट्रम्प अपनी धमकी को अमली जामा पहनाते हैं, तो कनाडा की ऑटोमोबाइल, ऊर्जा और कृषि क्षेत्र पूरी तरह चरमरा सकते हैं। ओटावा में कनाडाई प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस पर संक्षिप्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि वे अमेरिका के साथ बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन अपने संप्रभु व्यापारिक फैसलों पर पीछे नहीं हटेंगे। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यदि टैरिफ लागू हुए, तो कनाडा में बेरोजगारी और महंगाई चरम पर पहुंच जाएगी।

वैश्विक बाजार में मचेगी खलबली
ट्रम्प की इस ‘टैरिफ धमकी’ का असर सिर्फ कनाडा तक सीमित नहीं रहेगा। मेक्सिको और यूरोपीय देशों को भी डर है कि ट्रम्प प्रशासन का अगला निशाना वे हो सकते हैं। अर्थशास्त्रियों के अनुसार, अगर दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था इस तरह के कड़े प्रतिबंध लगाती है, तो वैश्विक सप्लाई चेन पूरी तरह बाधित हो जाएगी। इससे निर्माण लागत बढ़ेगी और अंततः आम जनता को हर छोटी-बड़ी चीज के लिए ज्यादा कीमत चुकानी होगी।

क्या यह सिर्फ एक सौदेबाजी की रणनीति है?
राजनीतिक विश्लेषकों का एक वर्ग यह भी मानता है कि ट्रम्प की यह धमकी वास्तव में ‘प्रेशर टैक्टिक्स’ (दबाव की राजनीति) का हिस्सा है। वे कनाडा को चीन से दूर करने और व्यापार समझौतों को फिर से अमेरिका के पक्ष में मोड़ने के लिए इस तरह के भारी टैरिफ का डर दिखा रहे हैं। इससे पहले भी अपने पहले कार्यकाल में ट्रम्प ने ‘नाफ्टा’ (NAFTA) को खत्म करने की धमकी देकर नया ‘USMCA’ समझौता करवाया था। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें वाशिंगटन और ओटावा के बीच होने वाली अगली उच्च स्तरीय बैठक पर टिकी हैं। क्या कनाडा झुककर चीन के साथ अपनी डील रद्द करेगा, या फिर अमेरिका 100% टैरिफ लगाकर एक नए वैश्विक आर्थिक युद्ध की शुरुआत करेगा।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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