ईरान में दहकती क्रांति की ज्वाला: क्या दमन के साए में बदलने वाला है इतिहास?

संवाद 24 नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों की हालिया रिपोर्टों ने ईरान के वर्तमान हालातों को लेकर एक ऐसी तस्वीर पेश की है, जिसने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया है। ईरान में महीनों से जारी विरोध प्रदर्शनों ने अब एक बेहद गंभीर और रक्तरंजित मोड़ ले लिया है। मानवाधिकार कार्यकर्ता समाचार एजेंसी (HRANA) द्वारा जारी किए गए नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, इन प्रदर्शनों के दौरान अब तक 500 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें बड़ी संख्या में मासूम बच्चे और किशोर भी शामिल हैं।

हिंसा की चरम सीमा
यह संघर्ष केवल गलियों और चौराहों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने एक राष्ट्रव्यापी विद्रोह का रूप ले लिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़पों में मारे गए लोगों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। एचआरएएनए की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मृतकों में कम से कम 69 नाबालिग शामिल हैं, जो इस हिंसा की भयावहता को दर्शाते हैं। इसके अलावा, हजारों लोगों को हिरासत में लिया गया है, जिनमें छात्र, पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं।

महसा अमीनी से नागरिक अधिकारों तक का सफर
ईरान में इस विद्रोह की शुरुआत ‘हिजाब’ से जुड़े एक कानून के विरोध में हुई थी, जब महसा अमीनी नाम की एक युवती की पुलिस हिरासत में मौत हो गई। लेकिन अब यह आंदोलन केवल एक ड्रेस कोड तक सीमित नहीं है। यह आंदोलन अब नागरिक अधिकारों, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और व्यवस्था परिवर्तन की एक बड़ी लड़ाई बन चुका है। ईरान के लगभग 160 शहरों और 140 से अधिक विश्वविद्यालयों में लोग सड़कों पर उतरकर अपने हक की आवाज बुलंद कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद यह वर्तमान सत्ता के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरा है।

वैश्विक समुदाय का बढ़ता हस्तक्षेप
ईरान की इस स्थिति पर वैश्विक समुदाय की चुप्पी अब टूटने लगी है। संयुक्त राष्ट्र से लेकर पश्चिमी देशों तक, सभी ने बल प्रयोग और मानवाधिकारों के उल्लंघन की कड़ाई से निंदा की है। कई देशों ने ईरान पर नए आर्थिक और राजनीतिक प्रतिबंध लगाए हैं, ताकि वहां की सरकार को हिंसा रोकने के लिए मजबूर किया जा सके। हालांकि, ईरानी प्रशासन इन प्रदर्शनों को विदेशी ताकतों की साजिश करार दे रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।

गिरफ्तारी और मौत की सजा
रिपोर्ट्स के अनुसार, अब तक लगभग 18,000 से अधिक प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जेलों के भीतर से आ रही खबरें और भी विचलित करने वाली हैं, जहां कैदियों के साथ अमानवीय व्यवहार और कठोर सजाओं की बात सामने आ रही है। हाल ही में कुछ प्रदर्शनकारियों को दी गई मौत की सजा ने आग में घी डालने का काम किया है, जिससे प्रदर्शनकारियों का आक्रोश कम होने के बजाय और बढ़ गया है।

सत्ता और संघर्ष के बीच का दोराहा
ईरान की सड़कों पर बहता खून और गूंजते नारे इस बात का प्रमाण हैं कि वहां की जनता अब बदलाव के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है। दुनिया भर की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या अंतरराष्ट्रीय दबाव ईरान को अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर कर पाएगा या यह संघर्ष और भी भीषण रूप लेगा।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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