चिली में आग का कहर: भीषण गर्मी ने ली 18 जानें, हजारों बेघर
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संवाद 24 नई दिल्ली। दक्षिण अमेरिकी देश चिली इन दिनों भीषण प्राकृतिक आपदा से जूझ रहा है। देश के दक्षिणी हिस्सों में लगी जंगल की आग ने भयावह रूप ले लिया है। अत्यधिक गर्मी, तेज हवाओं और लंबे समय से जारी सूखे के कारण आग तेजी से फैलती चली गई, जिसमें अब तक कम से कम 18 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।
दक्षिणी चिली में आग ने मचाई तबाही
बीओबियो और न्युब्ले क्षेत्रों में जंगलों में लगी आग ने देखते ही देखते रिहायशी इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। कई कस्बों और गांवों में धुएं का गुबार छा गया, जिससे दिन में भी अंधेरे जैसी स्थिति बन गई। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि लोगों को घर छोड़कर भागना पड़ा।
मौत का आंकड़ा बढ़कर 18 पहुंचा
स्थानीय प्रशासन के अनुसार, आग से झुलसने और दम घुटने के कारण अब तक 18 लोगों की जान जा चुकी है। मृतकों में स्थानीय नागरिकों के साथ-साथ राहत और बचाव कार्य में जुटे कुछ कर्मियों के भी शामिल होने की आशंका जताई जा रही है। आशंका है कि आंकड़ा और बढ़ सकता है।
हजारों लोग घर छोड़ने को मजबूर
आग के तेजी से फैलने के कारण 20 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित इलाकों में पहुंचाया गया है। कई परिवारों को रातों-रात अपना घर छोड़ना पड़ा। लोग जरूरी सामान तक नहीं निकाल पाए और केवल जान बचाकर सुरक्षित स्थानों की ओर भागे।
सैकड़ों घर और ढांचे जलकर राख
प्रशासनिक रिपोर्ट के अनुसार, अब तक 250 से अधिक घर, दुकानें और अन्य ढांचे पूरी तरह नष्ट हो चुके हैं। आग ने खेतों, पशुशालाओं और जंगलों को भी भारी नुकसान पहुंचाया है, जिससे स्थानीय लोगों की आजीविका पर भी संकट खड़ा हो गया है।
अत्यधिक गर्मी और तेज हवाएं बनीं वजह
मौसम विभाग ने बताया कि इन इलाकों में तापमान 38 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो सामान्य से कहीं अधिक है। तेज हवाओं ने आग को और भड़काने का काम किया। सूखी घास और जंगलों में मौजूद सूखा ईंधन आग के लिए अनुकूल स्थिति बन गया।
फायर ब्रिगेड के लिए हालात बेहद चुनौतीपूर्ण
दमकल कर्मी दिन-रात आग बुझाने में जुटे हैं, लेकिन पहाड़ी इलाका, तेज हवाएं और गर्मी उनके काम को बेहद कठिन बना रही हैं। कई जगहों पर आग के एक साथ कई मोर्चे सक्रिय हैं, जिससे संसाधनों पर भारी दबाव बना हुआ है।
राष्ट्रपति ने घोषित की आपदा की स्थिति
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए चिली के राष्ट्रपति गेब्रियल बोरिक ने प्रभावित क्षेत्रों में ‘स्टेट ऑफ कैटास्ट्रॉफी’ (आपदा की स्थिति) घोषित कर दी है। इसके तहत सेना और अतिरिक्त सुरक्षा बलों को राहत-बचाव कार्य में लगाया गया है।
राहत और बचाव अभियान तेज
सरकार की ओर से अस्थायी राहत शिविर बनाए गए हैं, जहां प्रभावित लोगों को भोजन, पानी और चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। स्वयंसेवी संगठन भी प्रशासन के साथ मिलकर पीड़ितों की मदद में जुटे हुए हैं।
लोगों में दहशत का माहौल
स्थानीय निवासियों का कहना है कि आग इतनी तेजी से फैली कि संभलने का मौका तक नहीं मिला। धुएं और गर्मी के कारण सांस लेना मुश्किल हो गया था। कई परिवार अब भी अपने घर और संपत्ति को लेकर अनिश्चितता में हैं।
जलवायु परिवर्तन पर उठे सवाल
विशेषज्ञों का मानना है कि चिली में इस तरह की आग की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, जिसका बड़ा कारण जलवायु परिवर्तन है। बढ़ता तापमान और घटती नमी जंगल की आग को और विनाशकारी बना रही है। अधिकारियों ने कहा है कि खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। मौसम में सुधार होने तक लोगों को सतर्क रहने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है।






