ईरान में ‘नया अध्याय’ – ट्रंप ने 37 साल के शासन का अंत और नए नेतृत्व की मांग की
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संवाद 24 नई दिल्ली । अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के 37 साल के शासन के अंत की मांग करते हुए कहा है कि अब ईरान में नया नेतृत्व समय की आवश्यकता है। ट्रंप ने यह बयान एक बड़े साक्षात्कार में दिया, जिसमें उन्होंने खामेनेई की सरकार पर देश को तहस-नहस कर देने और जनता के खिलाफ कठोर कार्रवाई का आरोप लगाया। ट्रंप ने Politico से बातचीत में स्पष्ट किया कि “अब समय आ गया है कि ईरान के लिए नए नेतृत्व की तलाश की जाए,” और उन्होंने खामेनेई के शासन को पुराना व दबंग बताया, जो देश के नागरिकों की आवाज़ को दबाता है। उनका यह हमला राजनीतिक रूप से गर्म कुर्सियों पर बैठे दो देशों के बीच तनाव को और बढ़ा सकता है।
तेहरान में विरोध और वैश्विक दबाव
इस बयान के ठीक पहले या उसी समय ईरान में जन-आंदोलन का दायरा बढ़ा हुआ है। कुछ महीनों से आर्थिक कठिनाइयों के खिलाफ शुरू हुआ प्रदर्शन अब व्यापक राजनीतिक नारों में बदल गया है, जिसमें खामेनेई के शासन के खिलाफ जनता ने सड़कों पर उतरना शुरू कर दिया। ईरान की सरकार ने इन प्रदर्शनों को “विदेशी साजिश” करार देते हुए ख़र्चीले उपायों से रोकने की कोशिश की है। खामेनेई ने खुद ट्रंप पर आरोप लगाया कि अमेरिकी नीतियों और बयानबाज़ी ने इस आंदोलन को भड़काया। उन्होंने ट्रंप को “क्रिमिनल” तक कहा है और अमेरिका तथा इज़राइल को ईरानी आंतरिक मामलों में दखल देने का जिम्मेदार ठहराया।
दो तरफ़ा बयानबाज़ी और बढ़ता तनाव
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, ट्रंप का बयान सिर्फ़ एक कूटनीतिक टिप्पणी नहीं है, बल्कि अमेरिका-ईरान तनाव की एक नई कड़ी है। उन्होंने खामेनेई के शासन को “आदरणीय नेतृत्व की कमी” वाला बताया और कहा कि एक अच्छे शासक को जनता की चिंता करनी चाहिए, न कि उसे डराने-धमकाने। ईरानी पक्ष ने भी पलटवार किया है। खामेनेई के समर्थकों ने कहा है कि देश “आंतरिक मुक़ाबले और बाहरी दबाव से” उबर सकते हैं और उन्होंने खुद को अमेरिका तथा उसके सहयोगियों के प्रभाव से अलग रखने का दावा किया है।
क्या आगे शांति या संघर्ष है?
विश्लेषकों का कहना है कि इस बयान के बाद दोनों देशों के बीच राजनीतिक तनाव और बढ़ सकता है। ईरान की जनता के भीतर विरोध की आवाज़ें शासन के खिलाफ हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय दबाव भी कुछ परिवर्तन की मांग कर रहा है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि ट्रंप के बयान का कोई सीधा असर ईरान के भीतर शासन-व्यवस्था पर पड़ेगा या नहीं, लेकिन दोनों देशों के बीच कूटनीतिक रिश्ते और सार्वजनिक नाराज़गी स्पष्ट रूप से बढ़ रही है।






