मतदाता सूची कितनी भरोसेमंद? फर्रुखाबाद में मिले 1.5 लाख डुप्लीकेट नाम

संवाद 24 संवाददाता। SIR के दौरान जिले के कमालगंज व मोहम्मदाबाद ब्लॉकों में करीब 1,50,000 डुप्लीकेट (प्रतिलिपि) मतदाता की पहचान हुई है, जो कि पंचायत चुनावों की तैयारियों को केंद्र में रखते हुए एक गंभीर प्रशासनिक चिंता का विषय बन गया है।

निर्वाचन अधिकारियों द्वारा चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision — SIR) प्रक्रिया में मतदाता सूचियों की इलेक्ट्रॉनिक और फील्ड स्तर पर जाँच की गई। इस दौरान यह पाया गया कि कमालगंज व मोहम्मदाबाद ब्लॉकों में कुल लगभग 1.5 लाख से अधिक मतदाता नाम ऐसे हैं जो डुप्लीकेट हैं — यानी एक से अधिक स्थान पर एक ही मतदाता के नाम दर्ज हैं या पहचान विवरण (जैसे EPIC नंबर, पता आदि) समान है।

पूरे फर्रुख़ाबाद जिले में इससे भी अधिक संख्या में संदिग्ध रिकॉर्ड मिले हैं, जिनका सत्यापन अभी भी जारी है। यह प्रक्रिया मतदाता सूची को अधिक सटीक, पारदर्शी और झूठे/गलत प्रविष्टियों से मुक्त करने के लिए आवश्यक है, खासकर आने वाले पंचायत चुनाव 2026 को ध्यान में रखते हुए।

विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) मतदान सूचियों के व्यापक ऑडिट का एक स्तरीय अभियान है, जिसमें निर्वाचन आयोग नवीन तकनीकों तथा बूथ-स्तर के अधिकारियों के समन्वय से:
मृत, अनुपस्थित या स्थानांतरित मतदाताओं की पहचान,
डुप्लीकेट/गलत प्रविष्टियों की पहचान,
तथा वास्तविक निवासियों के नामों की पुष्टि
जैसे कार्य करता है। इससे संभावित धोखाधड़ी को रोका जाता है और चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता को मजबूती मिलती है।

उत्तर प्रदेश की ही तरह अन्य पूर्वोत्तर राज्यों और बिहार में भी मतदाता सूची के SIR के दौरान बड़ी संख्या में डुप्लीकेट या संदिग्ध मतदाता रिकॉर्ड मिले हैं। उदाहरण के लिए, बिहार में SIR समीक्षा ने 1 करोड़ से अधिक संदिग्ध मतदाताओं की पहचान की, जिनमें कई नामों की पहचान समान विवरण के कारण डुप्लीकेट बताई गई। यह संकेत देता है कि पूरे देश स्तर पर मतदाता सूची की समीक्षा तथा शुद्धिकरण आज़ के लोकतांत्रिक चुनावों में एक प्रमुख चुनौती बन चुका है।

डुप्लीकेट या गलत मतदाता नामों का होना चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर प्रश्न खड़ा कर सकता है। इससे मतदाताओं के अधिकारों का संरक्षण करना कठिन होता है और मतदाता सूचियों की गुणवत्ता पर संदेह बनता है। SIR के अंतर्गत ऐसे नामों की पहचान व हटाना यह सुनिश्चित करता है कि:
केवल वास्तविक, पात्र मतदाता ही मतदान का अधिकार प्रयोग कर सकें,
चुनाव परिणामों की वैधता सुरक्षित रहे,
तथा मतदाता सूची भविष्य के चुनावों के लिए मजबूत आधार बने।

स्थानीय अधिकारियों तथा बूथ-स्तर के कर्मचारियों को व्यापक स्तर पर सूची सत्यापन की जिम्मेदारी दी जाती है। हालांकि, बड़ी संख्या में डुप्लीकेट प्रविष्टियाँ मिलने से यह स्पष्ट होता है कि प्रशासन को:
बेहतर तकनीकी उपकरणों का उपयोग करना होगा,
और गावं से लेकर ब्लॉक तक दस्तावेज़ सत्यापन की गुणवत्ता बढ़ानी होगी।

कमालगंज और मोहम्मदाबाद ब्लॉक में मिले 1.5 लाख से अधिक डुप्लीकेट मतदाताओं की पहचान एक अलार्मिंग संकेत है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण कार्य में अभी भी व्यापक समायोजन एवं समर्पित प्रयासों की आवश्यकता है। आगामी पंचायत चुनावों को सफलतापूर्वक, निष्पक्ष और पारदर्शी रूप से आयोजित करने के लिए SIR प्रक्रिया की पूरी निष्पादन क्षमता को सुनिश्चित करना होगा, ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर जनता का विश्वास और मजबूत बने।

Anuj Singh
Anuj Singh

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