ट्रंप प्रशासन का सख्त संदेश: पाकिस्तान-बांग्लादेश पर आप्रवासी वीजा ब्रेक, भारत को राहत
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संवाद 24 नई दिल्ली। अमेरिका की नई आप्रवासन नीति में दक्षिण एशिया की राजनीति साफ झलकने लगी है। राष्ट्रपति Donald Trump के नेतृत्व में अमेरिकी प्रशासन ने पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल समेत 75 देशों के नागरिकों के लिए आप्रवासी वीजा (Immigrant Visa) जारी करने पर रोक लगाने का फैसला किया है। इस सूची से भारत को बाहर रखा गया है, जिसे कूटनीतिक और आर्थिक हलकों में भारत-अमेरिका संबंधों के लिए एक अहम संकेत माना जा रहा है।
अमेरिकी विदेश विभाग की ओर से जारी नीति अपडेट के मुताबिक यह फैसला सार्वजनिक कल्याणकारी योजनाओं के संभावित दुरुपयोग और आर्थिक आत्मनिर्भरता से जुड़ी चिंताओं के आधार पर लिया गया है। यह नीति 21 जनवरी 2026 से प्रभावी होगी।
पाकिस्तान-बांग्लादेश पर गिरी गाज
सूत्रों के अनुसार, जिन देशों पर यह रोक लगाई गई है, उनमें Pakistan और Bangladesh प्रमुख हैं। दोनों देशों को अमेरिका लंबे समय से उच्च जोखिम वाली राष्ट्रीयताओं की श्रेणी में रखता रहा है। हाल के वर्षों में पाकिस्तान की अमेरिकी नीतियों के प्रति नजदीकी और बांग्लादेश की क्षेत्रीय गतिविधियों के बावजूद, वीजा नीति में उन्हें कोई राहत नहीं मिली।
भारत को क्यों मिली छूट
इसके उलट India को 75 देशों की इस सूची से बाहर रखा गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, इसके पीछे कई ठोस कारण हैं—
भारत और United States के बीच मजबूत रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी
2024-25 में 131.84 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार
H-1B जैसे उच्च-कुशल वीजा में भारतीय पेशेवरों की निर्णायक भूमिका
अमेरिकी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, H-1B वीजा पाने वालों में भारतीय नागरिक सबसे बड़ी संख्या में हैं और अमेरिकी टेक व रिसर्च सेक्टर में उनकी भागीदारी अहम मानी जाती है।
किन वीजा पर लागू होगी रोक
यह प्रतिबंध केवल आप्रवासी वीजा यानी ग्रीन कार्ड और स्थायी निवास श्रेणियों पर लागू होगा।
बी-1/बी-2 (पर्यटक), H-1B (वर्क वीजा) और F-1 (छात्र वीजा) जैसी गैर-आप्रवासी श्रेणियां इससे बाहर रहेंगी। हालांकि, वीजा प्रक्रिया में देरी और साक्षात्कार लंबित रहने की आशंका से इन आवेदकों पर अप्रत्यक्ष असर पड़ सकता है।
भारतीयों के लिए ग्रीन कार्ड अब भी चुनौती
हालांकि भारत को इस सूची से बाहर रखा गया है, लेकिन भारतीय नागरिकों के लिए ग्रीन कार्ड पाना अब भी आसान नहीं है। कई श्रेणियों में प्रतीक्षा अवधि दशकों तक पहुंच चुकी है। आवेदन शुल्क में बढ़ोतरी और लंबित मामलों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है।
दोहरी नागरिकता वालों को राहत
अमेरिकी दूतावास के अनुसार, जिन आवेदकों के पास दोहरी नागरिकता है और वे प्रतिबंधित देशों के अलावा किसी अन्य देश का वैध पासपोर्ट रखते हैं, वे इस रोक से मुक्त रहेंगे। साथ ही, पहले से जारी वैध वीजा को रद्द नहीं किया गया है।
कुल मिलाकर, ट्रंप प्रशासन का यह फैसला न केवल आप्रवासन नीति का संकेत देता है, बल्कि दक्षिण एशिया में अमेरिका की बदलती प्राथमिकताओं को भी उजागर करता है—जहां भारत को रणनीतिक साझेदार और पाकिस्तान-बांग्लादेश को सख्त संदेश दिया गया है।






