मण्डुकासन (Frog Pose): मधुमेह नियंत्रण और पाचन सुधार के लिए प्रभावी योगासन

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संवाद 24 डेस्क। योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करने की एक प्राचीन भारतीय विद्या है। आधुनिक जीवनशैली में अनियमित खान-पान, तनाव, शारीरिक निष्क्रियता और मानसिक दबाव के कारण अनेक रोग उत्पन्न हो रहे हैं। ऐसे में योगासन एक प्राकृतिक और सुरक्षित उपाय के रूप में उभरकर सामने आया है। मण्डुकासन, एक विशेष योगासन है जो मुख्य रूप से पाचन तंत्र, अग्न्याशय (Pancreas), पेट की चर्बी और मधुमेह से संबंधित समस्याओं में अत्यंत लाभकारी माना जाता है।

मण्डुकासन का अर्थ
संस्कृत शब्द “मण्डुक” का अर्थ है मेंढक। इस आसन में शरीर की स्थिति मेंढक जैसी प्रतीत होती है, इसलिए इसे मण्डुकासन कहा गया है। यह आसन पेट और नाभि क्षेत्र पर गहरा दबाव बनाता है, जिससे आंतरिक अंग सक्रिय होते हैं।

मण्डुकासन का शास्त्रीय संदर्भ
योग ग्रंथों में मण्डुकासन को एक शक्तिशाली उदर-क्रियात्मक आसन माना गया है। यह विशेष रूप से Manipura Chakra (मणिपूर चक्र) को जाग्रत करता है, जो पाचन शक्ति और ऊर्जा संतुलन से संबंधित है। आयुर्वेद के अनुसार, जब पाचन अग्नि संतुलित रहती है, तब शरीर रोगों से मुक्त रहता है।

मण्डुकासन करने का सही समय
मण्डुकासन को करने का सर्वोत्तम समय प्रातःकाल खाली पेट होता है।
यदि सुबह संभव न हो, तो इसे भोजन के कम से कम 4–5 घंटे बाद किया जाना चाहिए। अभ्यास के समय वातावरण शांत और स्वच्छ होना चाहिए।

मण्डुकासन करने की पूर्व तैयारी
मण्डुकासन से पहले शरीर को तैयार करना आवश्यक है। इसके लिए कुछ हल्के आसन और प्राणायाम किए जा सकते हैं, जैसे –
• वज्रासन
• पवनमुक्तासन
• कपालभाति
• अनुलोम-विलोम
यह तैयारी शरीर को लचीला बनाती है और चोट की संभावना को कम करती है।

मण्डुकासन करने की विधि:-

चरण 1: वज्रासन में बैठें
सबसे पहले समतल स्थान पर योग मैट बिछाकर वज्रासन में बैठ जाएँ। रीढ़ सीधी रखें और शरीर को पूरी तरह रिलैक्स करें।

चरण 2: मुट्ठी बनाकर नाभि के पास रखें
अब दोनों हाथों की मुट्ठी बनाएँ और अंगूठे को मुट्ठी के अंदर बंद रखें। दोनों मुट्ठियों को नाभि के दोनों ओर पेट पर रखें।

चरण 3: श्वास भरें
धीरे-धीरे गहरी सांस लें और शरीर को स्थिर रखें।

चरण 4: आगे की ओर झुकें
सांस छोड़ते हुए कमर से आगे की ओर झुकें, ताकि पेट पर मुट्ठियों का दबाव पड़े। सिर या ठोड़ी ज़मीन को छू सकती है, लेकिन ज़ोर न लगाएँ।

चरण 5: मुद्रा में रुकें
इस अवस्था में 20–30 सेकंड तक सामान्य श्वास-प्रश्वास करते रहें। पेट पर दबाव महसूस करें।

चरण 6: वापस प्रारंभिक स्थिति में आएँ
धीरे-धीरे सांस लेते हुए ऊपर उठें और वज्रासन में वापस आ जाएँ।

चरण 7: पुनरावृत्ति
इस आसन को 3–5 बार दोहराया जा सकता है।

मण्डुकासन के प्रमुख लाभ:-

  1. मधुमेह (Diabetes) में लाभकारी
    मण्डुकासन अग्न्याशय को सक्रिय करता है, जिससे इंसुलिन का स्राव बेहतर होता है। नियमित अभ्यास से टाइप-2 डायबिटीज़ के नियंत्रण में सहायता मिलती है।
  2. पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है
    यह आसन पेट, आंतों और यकृत पर प्रभाव डालता है, जिससे अपच, गैस, कब्ज और एसिडिटी जैसी समस्याएँ दूर होती हैं।
  3. पेट की चर्बी कम करता है
    नाभि क्षेत्र पर दबाव पड़ने से बेली फैट घटाने में मदद मिलती है और पेट अंदर की ओर जाता है।
  4. मेटाबॉलिज़्म को सुधारता है
    मण्डुकासन शरीर की पाचन अग्नि को तेज करता है, जिससे भोजन सही तरीके से पचता है और ऊर्जा स्तर बढ़ता है।
  5. कब्ज से राहत
    नियमित अभ्यास से आंतों की गति सुधरती है, जिससे पुरानी कब्ज में भी लाभ मिलता है।
  6. लीवर और किडनी के लिए लाभकारी
    यह आसन यकृत और गुर्दों की कार्यक्षमता को बेहतर बनाता है और शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करता है।
  7. तनाव और चिंता में कमी
    मण्डुकासन करते समय श्वसन पर ध्यान केंद्रित होता है, जिससे मानसिक तनाव कम होता है और मन शांत रहता है।

मण्डुकासन और वजन घटाने का संबंध
मण्डुकासन सीधे पेट और मेटाबॉलिज़्म पर कार्य करता है। नियमित अभ्यास के साथ संतुलित आहार अपनाने से वजन घटाने की प्रक्रिया तेज होती है। यह विशेष रूप से उन लोगों के लिए उपयोगी है जिनका वजन पेट के आसपास अधिक होता है।

मण्डुकासन में श्वास-प्रश्वास का महत्व
इस आसन में श्वास और गति का तालमेल बहुत आवश्यक है। आगे झुकते समय सांस छोड़ना और वापस आते समय सांस लेना चाहिए। गलत श्वसन से लाभ कम हो सकता है।

मण्डुकासन करते समय सावधानियाँ:-

  1. गंभीर पीठ दर्द में न करें
    यदि किसी को कमर या रीढ़ की गंभीर समस्या है, तो यह आसन चिकित्सक या योग विशेषज्ञ की सलाह से ही करें।
  2. गर्भावस्था में निषेध
    गर्भवती महिलाओं को मण्डुकासन नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे पेट पर दबाव पड़ता है।
  3. हर्निया या अल्सर में सावधानी
    पेट से संबंधित गंभीर रोगों में इस आसन से बचना चाहिए।
  4. हाल ही में सर्जरी हुई हो
    यदि पेट या रीढ़ की हाल ही में सर्जरी हुई हो, तो मण्डुकासन न करें।
  5. ज़बरदस्ती न करें
    आसन करते समय शरीर पर अत्यधिक ज़ोर न डालें। दर्द महसूस हो तो तुरंत अभ्यास रोक दें।

मण्डुकासन से अधिक लाभ पाने के सुझाव
• इसे नियमित रूप से करें
• संयमित और सात्विक आहार अपनाएँ
• आसन के बाद कुछ समय शवासन करें
• धैर्य रखें, परिणाम धीरे-धीरे मिलते हैं

मण्डुकासन एक सरल लेकिन अत्यंत प्रभावी योगासन है, जो विशेष रूप से मधुमेह, पाचन विकार और पेट की चर्बी से परेशान लोगों के लिए वरदान साबित हो सकता है। सही विधि, नियमित अभ्यास और सावधानियों के साथ किया गया मण्डुकासन न केवल शरीर को स्वस्थ बनाता है, बल्कि मानसिक संतुलन भी प्रदान करता है।
यदि आप प्राकृतिक तरीके से अपने स्वास्थ्य में सुधार चाहते हैं, तो मण्डुकासन को अपनी दैनिक योग दिनचर्या में अवश्य शामिल करें।

Radha Singh
Radha Singh

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