ईरान में विरोध की आवाज़ पर मौत की तलवार: प्रदर्शनकारी इरफ़ान सोलतानी की फांसी की तैयारी से बढ़ा वैश्विक आक्रोश

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संवाद 24 दिल्ली। ईरान में देशव्यापी सरकार-विरोधी प्रदर्शनों के बीच जनजीवन एक नए, हिंसक मोड़ पर पहुँच गया है। ऐसा प्रतीत होता है कि शासन ने अपने सख़्त कदमों में और तीव्रता ला दी है, जब 26-साल के इरफ़ान सोलतानी को संभावित रूप से फांसी की सजा सुनाए जाने की तैयारी की जा रही है — जिसे वर्तमान आंदोलन के सबसे कड़े नतीजों में से एक माना जा रहा है। इरफ़ान सोलतानी को, जो कराज के फर्दीस क्षेत्र का निवासी बताया जाता है, 8 जनवरी को राजधानी तेहरान के पास विरोध प्रदर्शन में भाग लेने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उसके खिलाफ आरोप लगाया गया है कि उसने के “ईश्वर के विरुद्ध युद्ध करना “(मोहरेबेह) जैसे गंभीर इल्ज़ामों के तहत कार्य किया — यह अपराध ईरान की दंड प्रक्रिया में मौत के दंड के योग्य है।

सरकारी सूत्रों और स्थानीय मानवाधिकार समूहों के अनुसार, सोलतानी की फाँसी मंगलवार या बुधवार को कार्यांवित होने की संभावना है। अगर यह सच हुआ, तो यह ईरान में अक्टूबर-दिसंबर 2025 से चल रहे विरोध आंदोलन में शामिल किसी प्रदर्शनकारी की पहली औपचारिक न्यायिक फाँसी होगी। ईरान के सख़्त न्यायिक प्रक्रियाएँ अक्सर मानवाधिकार संगठनों की आलोचना का विषय रही हैं, और इस मामले में भी पारदर्शिता की गंभीर कमी बताई जा रही है। रिपोर्ट्स का कहना है कि सोलतानी को वकील से मिलने या अपनी रक्षा का मौका मिले बिना ही मुक़दमा चलाया गया, और परिवार को भी मुक़दमे की कानूनी फ़ाइल या सही जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। केवल दस मिनट के लिए वह अपने परिवार से मिले — और उसका परिवार भी सुनने में आया कि सजा “अंतिम और अचूक” कहा गया है।

प्रदर्शन और प्रतिक्रिया की भयावह तस्वीर
यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब ईरान में विरोध प्रदर्शन क्रूर रूप से बढ़ रहे हैं। आंदोलन शुरू हुआ था देश की बिगड़ती आर्थिक स्थिति, महँगाई और रोज़मर्रा की जीवन लागत की भारी गिरावट के कारण — लेकिन जल्द ही यह राजनीतिक विद्रोह में बदल गया जिसमें लोग सत्तारूढ़ सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ खुलकर आवाज़ उठा रहे हैं। आंदोलन तहरीर, कराज, माशहद और कई अन्य प्रमुख शहरों में फैल चुका है, और प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्हें अपने मौलिक अधिकारों और बेहतर शासन की मांग है। प्रेस स्वतंत्रता पर रोक, इंटरेक्ट नेटवर्क पर बंदिशें, और सामाजिक संचार माध्यमों का ब्लैकआउट इस संघर्ष को और अधिक कड़ा बना रहे हैं। मानवाधिकार समूहों के अनुमान के अनुसार, अब तक 500 से अधिक लोग मारे गए हैं और 10,000 से अधिक गिरफ्तारियाँ हुई हैं — हालांकि एक अनामी सरकारी स्रोत ने विरोध और जवाबी कार्रवाई के बीच हुए संघर्ष में कुल 2,000 मौतों का भी स्वयं उल्लेख किया है।

अंतरराष्ट्रीय उद्‌गार और भविष्य की दिशा
विश्वभर में ईरानी विरोध के प्रति सहानुभूति बढ़ी है। प्रवासी समुदायों और मानवाधिकार संगठनों ने अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ाने की अपील की है, जबकि कुछ देशों के राजनीतिक नेतृत्व ने ईरान के सख़्त कदमों की भर्त्सना की है। ईरान की सरकार ने प्रदर्शनकारियों को “विदेशी शक्तियों के संदेहास्पद एजेंट” बताते हुए, देश के खिलाफ एक बड़े षड्यंत्र का दावा किया है। देश के वरिष्ठ राजनेताओं ने चेतावनी दी है कि बाहरी हस्तक्षेप के खिलाफ देश “पूर्णतः युद्ध के लिए तैयार” है, जिससे तनाव क्षेत्र में और उभर रहा है।विश्लेषकों का मानना है कि सोलतानी की संभावित फाँसी न केवल देश के भीतर भय पैदा करेगी, बल्कि यह ईरान में मौजूदा राजनीतिक अस्थिरता को और भड़काने वाली घटना बन सकती है, और वैश्विक स्तर पर मानवाधिकार और न्याय की बहस को और तीव्र करेगी।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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