तालिबान के नए राजनयिक नूर अहमद नूर ने संभाला अफगान दूतावास का चार्ज, भारत‑अफगान रिश्तों में नया अध्याय
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संवाद 24 नई दिल्ली। अफगानिस्तान में तालिबान शासन के आने के करीब ढाई साल बाद भारत में अफगानिस्तान का राजनयिक प्रतिनिधित्व बदल गया है। तालिबान ने नूर अहमद नूर को भारत स्थित अफगान दूतावास का चार्ज डी’अफेयर्स नियुक्त किया है। नूर अहमद नूर बुधवार को नई दिल्ली पहुंचे और उन्होंने अपने पद का जिम्मा संभाल लिया। यह कदम दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संपर्क को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
नूर अहमद नूर कौन हैं?
नूर अहमद नूर अफगानिस्तान के विदेश मंत्रालय में लंबे समय से सक्रिय हैं। उन्होंने विभिन्न वरिष्ठ पदों पर काम किया है और राजनीतिक एवं कूटनीतिक मामलों में अनुभव हासिल किया है। पिछले सालों में उन्होंने अफगान विदेश मंत्रालय के फर्स्ट पॉलिटिकल डिपार्टमेंट का नेतृत्व किया। उनकी नियुक्ति तालिबान प्रशासन के लिए विशेष महत्व रखती है क्योंकि इससे वे भारत में अफगान हितों को मजबूत रूप से आगे बढ़ा सकते हैं।
यह नियुक्ति क्यों महत्वपूर्ण है?
अगस्त 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद भारत ने उन्हें आधिकारिक मान्यता नहीं दी। इसके बावजूद, दोनों देशों के बीच धीरे-धीरे कूटनीतिक संपर्क बढ़े।
नूर अहमद नूर की नियुक्ति संकेत देती है कि:
तालिबान भारत के साथ संवाद और सहयोग बढ़ाने के इच्छुक हैं।
भारत और अफगानिस्तान के बीच रणनीतिक और मानवीय सहयोग की संभावना मजबूत हो सकती है।
यह नियुक्ति दोनों देशों के कूटनीतिक संबंधों में नया अध्याय खोलने की दिशा में एक कदम है।
भारत की नीति और प्रतिक्रिया
भारत अभी भी तालिबान को मान्यता नहीं देता, लेकिन मानवतावादी सहायता और स्वास्थ्य सामग्री प्रदान करता रहा है। अफगानिस्तान में स्थिरता और विकास के लिए भारत की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, नूर अहमद नूर की नियुक्ति भारत और अफगानिस्तान के बीच संबंधों को भविष्य में और व्यापक स्तर पर मजबूत करने का संकेत है।
क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य
तालिबान शासन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता न होने के बावजूद कई देश सामान्य संवाद बनाए हुए हैं। नूर अहमद नूर की भारत में नियुक्ति एक ऐसा कदम है जो क्षेत्रीय स्थिरता, आर्थिक सहयोग, स्वास्थ्य और सुरक्षा में साझेदारी को बढ़ावा दे सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह नियुक्ति दोनों देशों के बीच नई कूटनीतिक राह खोल सकती है और आने वाले समय में क्षेत्रीय सहयोग और विकास में मददगार साबित होगी।
नूर अहमद नूर अब भारत में अफगान हितों का प्रतिनिधित्व करेंगे। उनका मुख्य कार्य होगा:
कूटनीतिक संवाद को मजबूती देना।
मानवतावादी और विकास संबंधी सहयोग को बढ़ाना।
अफगानिस्तान और भारत के बीच रणनीतिक सहयोग को सशक्त करना।
उनकी नियुक्ति यह दिखाती है कि तालिबान भारत को क्षेत्रीय और रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानता है।






