पुतिन से नाराज़ ट्रंप, जेलेंस्की के बयान पर दी तीखी प्रतिक्रिया, क्या यूक्रेन युद्ध में बदल रही है वैश्विक राजनीति।

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संवाद 24 दिल्ली। यूक्रेन युद्ध को लेकर वैश्विक राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को लेकर अपनी नाराज़गी खुलकर जाहिर की है। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने रूस और पश्चिमी देशों को लेकर संकेतात्मक टिप्पणी की थी, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस को जन्म दे दिया है।

पुतिन को लेकर ट्रंप की बदली हुई भाषा
डोनाल्ड ट्रंप, जो पहले कई मौकों पर व्लादिमीर पुतिन के प्रति नरम रुख के लिए जाने जाते थे, इस बार उनके रवैये से असंतुष्ट नजर आए। ट्रंप ने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर पुतिन से उन्हें अलग तरह की उम्मीद थी। उन्होंने इशारों में यह भी कहा कि मौजूदा हालात में रूस का रुख हालात को और जटिल बना रहा है।

जेलेंस्की के बयान ने बढ़ाई हलचल
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने हाल ही में संकेत दिया था कि कुछ वैश्विक शक्तियां युद्ध को जल्दी खत्म करने के बजाय अपने रणनीतिक हितों को प्राथमिकता दे रही हैं। इस बयान को कई देशों ने अपने-अपने तरीके से लिया। ट्रंप ने इसी संदर्भ में प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि युद्ध को लेकर स्पष्ट और ईमानदार पहल की जरूरत है, न कि केवल बयानबाज़ी की।

युद्ध समाधान पर ट्रंप का दावा
डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर यह दोहराया कि अगर वे सत्ता में होते, तो रूस-यूक्रेन युद्ध इतनी लंबी अवधि तक नहीं चलता। उन्होंने दावा किया कि वे बातचीत और दबाव की नीति से इस संघर्ष को जल्दी समाप्त कर सकते थे। ट्रंप के इस बयान को उनके आगामी राजनीतिक एजेंडे से जोड़कर भी देखा जा रहा है।

अमेरिकी राजनीति और अंतरराष्ट्रीय संकेत
ट्रंप की यह टिप्पणी केवल रूस और यूक्रेन तक सीमित नहीं मानी जा रही। विशेषज्ञों का मानना है कि इसके जरिए ट्रंप अमेरिकी जनता और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह संदेश देना चाहते हैं कि वे एक बार फिर वैश्विक मंच पर निर्णायक भूमिका निभाने को तैयार हैं। इससे अमेरिकी राजनीति में विदेश नीति एक बार फिर बड़ा मुद्दा बन सकती है।

रूस-यूक्रेन युद्ध का वैश्विक असर
यूक्रेन युद्ध ने केवल यूरोप ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावित किया है। ऊर्जा संकट, हथियारों की आपूर्ति और कूटनीतिक तनाव लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में ट्रंप जैसे प्रभावशाली नेता का पुतिन से असंतोष जताना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय दबाव आने वाले समय में और तेज हो सकता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप के इस बयान से रूस-अमेरिका संबंधों पर नई चर्चा शुरू होगी। साथ ही, यूक्रेन को लेकर पश्चिमी देशों की रणनीति में भी बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या ये बयान केवल चुनावी रणनीति हैं या वाकई वैश्विक राजनीति की दिशा बदलने वाले संकेत।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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