बद्ध पद्मासन: साधना, स्थिरता और आत्म-संतुलन का दिव्य योगासन

संवाद 24 डेस्क।योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि शरीर, मन और आत्मा के समन्वय की एक प्राचीन भारतीय जीवन-पद्धति है। योगासन मानव शरीर को स्वस्थ रखने के साथ-साथ मानसिक शांति और आत्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करते हैं। इन्हीं योगासनों में से एक महत्वपूर्ण और ध्यान-साधना में अत्यंत उपयोगी आसन है बद्ध पद्मासन। यह आसन पद्मासन का ही एक उन्नत रूप है, जिसमें शरीर की स्थिरता के साथ-साथ ऊर्जा के प्रवाह को नियंत्रित किया जाता है। बद्ध पद्मासन का नियमित अभ्यास व्यक्ति को आंतरिक शांति, एकाग्रता और आत्म-संयम प्रदान करता है।

बद्ध पद्मासन क्या है
‘बद्ध’ का अर्थ है बाँधा हुआ और ‘पद्म’ का अर्थ है कमल। इस प्रकार बद्ध पद्मासन का शाब्दिक अर्थ हुआ— बंधा हुआ पद्मासन। इसमें साधक पद्मासन में बैठकर हाथों को पीछे की ओर ले जाकर पैरों के पंजों को पकड़ता है, जिससे शरीर एक स्थिर और संतुलित अवस्था में आ जाता है। यह आसन विशेष रूप से ध्यान, प्राणायाम और आध्यात्मिक साधना के लिए उपयुक्त माना गया है।

योगशास्त्र में बद्ध पद्मासन का महत्व
योगशास्त्र के अनुसार बद्ध पद्मासन नाड़ियों को शुद्ध करने वाला, कुंडलिनी जागरण में सहायक और मन को स्थिर करने वाला आसन है। हठयोग प्रदीपिका और घेरंड संहिता जैसे ग्रंथों में इस आसन को ध्यान के लिए श्रेष्ठ बताया गया है। यह आसन मूलाधार से सहस्रार तक ऊर्जा के प्रवाह को संतुलित करता है और साधक को आत्म-अनुशासन की ओर प्रेरित करता है।

बद्ध पद्मासन करने की पूर्व तैयारी
बद्ध पद्मासन करने से पहले शरीर को कुछ सरल आसनों से तैयार करना आवश्यक है, जैसे—
• सुखासन
• अर्ध पद्मासन
• पवनमुक्तासन
• तितली आसन
इन आसनों से घुटनों, टखनों और कूल्हों में लचीलापन आता है, जिससे बद्ध पद्मासन सहजता से किया जा सकता है।

बद्ध पद्मासन करने की स्टेप-बाय-स्टेप विधि
चरण 1

स्वच्छ और शांत स्थान पर योग मैट बिछाकर भूमि पर सीधे बैठ जाएँ। पैरों को सामने की ओर फैला लें और रीढ़ को सीधा रखें।
चरण 2
अब दाहिने पैर को मोड़कर बाईं जांघ पर रखें, फिर बाएँ पैर को मोड़कर दाहिनी जांघ पर रखें। इस प्रकार आप पद्मासन की स्थिति में आ जाएँ।
चरण 3
रीढ़ की हड्डी को सीधा रखते हुए कंधों को ढीला छोड़ें और गर्दन को संतुलित रखें।
चरण 4
अब दाहिना हाथ पीछे ले जाकर दाहिने पैर के पंजे को पकड़ें और बायाँ हाथ पीछे ले जाकर बाएँ पैर के पंजे को पकड़ें।
चरण 5
छाती को हल्का आगे की ओर उभारें, सिर को सीधा रखें और आँखें बंद कर लें।
चरण 6
सामान्य श्वास-प्रश्वास करते हुए इस स्थिति में 20 से 60 सेकंड तक बने रहें। अभ्यास बढ़ने पर समय बढ़ाया जा सकता है।
चरण 7
आसन से बाहर आने के लिए पहले हाथों को छोड़ें, फिर धीरे-धीरे पैरों को खोलते हुए सामान्य स्थिति में आ जाएँ।

बद्ध पद्मासन के शारीरिक लाभ

  1. रीढ़ की हड्डी को मजबूत करता है
    यह आसन मेरुदंड को सीधा और लचीला बनाए रखता है, जिससे पीठ दर्द की समस्या में लाभ मिलता है।
  2. जोड़ों में लचीलापन बढ़ाता है
    घुटनों, टखनों और कूल्हों के जोड़ों को मजबूत कर उनमें लचीलापन लाता है।
  3. पाचन तंत्र को सुधारता है
    बद्ध पद्मासन पेट के अंगों पर हल्का दबाव डालता है, जिससे पाचन क्रिया बेहतर होती है।
  4. रक्त संचार को संतुलित करता है
    इस आसन से शरीर में रक्त का प्रवाह सुचारु होता है, जिससे थकान और सुस्ती दूर होती है।
  5. मांसपेशियों को सुदृढ़ बनाता है
    पैरों, पीठ और कंधों की मांसपेशियाँ मजबूत होती हैं।

बद्ध पद्मासन के मानसिक लाभ

  1. एकाग्रता में वृद्धि
    यह आसन ध्यान के लिए अत्यंत उपयोगी है और मानसिक चंचलता को कम करता है।
  2. तनाव और चिंता में कमी
    नियमित अभ्यास से मन शांत रहता है और तनाव से राहत मिलती है।
  3. आत्म-संयम और धैर्य का विकास
    लंबे समय तक स्थिर बैठने से मानसिक दृढ़ता बढ़ती है।

आध्यात्मिक लाभ

  1. ध्यान साधना में सहायक
    यह आसन ध्यान की गहराई बढ़ाने में मदद करता है।
  2. ऊर्जा संतुलन
    शरीर की प्राण ऊर्जा को नियंत्रित कर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
  3. आत्मचिंतन को प्रोत्साहित करता है
    नियमित अभ्यास से व्यक्ति अपने भीतर झाँकने की क्षमता विकसित करता है।

बद्ध पद्मासन में श्वास-प्रश्वास
इस आसन में श्वास सामान्य, गहरी और नियंत्रित होनी चाहिए। प्राणायाम के साथ इसका अभ्यास करने से लाभ कई गुना बढ़ जाता है।

बद्ध पद्मासन के दौरान सामान्य त्रुटियाँ
• रीढ़ को झुका लेना
• जबरदस्ती पैरों को मोड़ना
• सांस रोककर रखना
• अत्यधिक बल लगाना
इन गलतियों से बचना आवश्यक है।

बद्ध पद्मासन की सावधानियाँ

  1. घुटनों में दर्द होने पर न करें
    यदि घुटनों या टखनों में गंभीर समस्या हो तो इस आसन से बचें।
  2. कमर दर्द या स्लिप डिस्क में सावधानी
    ऐसी स्थिति में विशेषज्ञ की सलाह से ही अभ्यास करें।
  3. शुरुआती लोग धीरे-धीरे अभ्यास करें
    पहले पद्मासन में सहजता प्राप्त करें, फिर बद्ध पद्मासन करें।
  4. गर्भावस्था में न करें
    गर्भवती महिलाओं को यह आसन नहीं करना चाहिए।
  5. किसी भी प्रकार का दर्द होने पर तुरंत छोड़ दें
    आसन करते समय असहजता महसूस हो तो तुरंत रुक जाएँ।

बद्ध पद्मासन का अभ्यास कब करें
इस आसन का अभ्यास प्रातःकाल खाली पेट करना सर्वोत्तम माना जाता है। शाम के समय भी भोजन के 4–5 घंटे बाद इसका अभ्यास किया जा सकता है।
बद्ध पद्मासन शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक संतुलन और आध्यात्मिक उन्नति का एक सशक्त माध्यम है। यह आसन साधक को स्थिरता, अनुशासन और आत्म-साक्षात्कार की ओर ले जाता है। नियमित और सही विधि से किया गया अभ्यास जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाता है। सावधानियों का पालन करते हुए यदि इस आसन को योग दिनचर्या में शामिल किया जाए, तो यह सम्पूर्ण स्वास्थ्य का आधार बन सकता है।

Radha Singh
Radha Singh

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