AI, डेटा और डिजिटल नेटवर्क से लड़ी जाएगी अगली जंग: 2026 के लिए भारतीय सेना ने तैयार किया नया युद्ध रोडमैप
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संवाद 24 नई दिल्ली। ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान के साथ 88 घंटे चली सैन्य कार्रवाई के गहन विश्लेषण के बाद भारतीय सेना ने आने वाले वर्षों के लिए अपनी युद्ध रणनीति का व्यापक रोडमैप तैयार कर लिया है। सेना ने इस रणनीति को अल्पकालिक, मध्यकालिक और दीर्घकालिक तीन चरणों में विभाजित किया है, जिसमें 2026 को निर्णायक वर्ष के रूप में देखा जा रहा है।
सेना सूत्रों के अनुसार, अल्पकालिक रणनीति के अंतर्गत 2026 का स्पष्ट खाका तैयार किया गया है। इस चरण में नए हथियारों की खरीद से अधिक जोर युद्ध क्षेत्र की त्वरित और सटीक जानकारी, मजबूत नेटवर्किंग और तेज निर्णय प्रक्रिया पर रहेगा। ऑपरेशन सिंदूर से मिले अनुभव ने यह स्पष्ट कर दिया कि आधुनिक युद्ध में सही समय पर सही जानकारी सबसे बड़ा हथियार है।
भारतीय सेना ने 2026 को ‘नेटवर्किंग और डेटा सेंट्रिसिटी का वर्ष’ घोषित किया है, जबकि 2027 तक ऑपरेशनों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के पूर्ण एकीकरण का लक्ष्य रखा गया है। वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक यह सेना की दीर्घकालिक परिवर्तन योजना का अहम चरण है।
सेना पहले ही 2023 से 2032 के कालखंड को ‘परिवर्तन का दशक’ घोषित कर चुकी है। इसके तहत 2023 में संगठनात्मक ढांचे और कार्यशैली में बदलाव, 2024 में तकनीक को आत्मसात करने और 2025 में जमीनी स्तर पर सुधारों को लागू करने की दिशा में काम किया गया। इसी क्रम में 6-7 मई 2025 को ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दिया गया, जिसने भविष्य की रणनीति को नई दिशा दी।
रणनीतिक संचार के स्तर पर भी सेना बड़े बदलाव कर रही है। योजना के अनुसार अंतरराष्ट्रीय समुदाय, दुश्मन देशों और घरेलू नागरिकों के लिए अलग-अलग माध्यम और कंटेंट तैयार किया जाएगा। नैरेटिव वॉर के जरिए दुश्मन के दुष्प्रचार तंत्र को निष्क्रिय करने पर विशेष जोर होगा। राजनीतिक नेतृत्व, तीनों सेनाओं और मीडिया के बीच समन्वय को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।
आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑटोमेशन के जरिए निर्णय प्रक्रिया को और तेज किया जाएगा। यह पूरी प्रणाली डेटा, नेटवर्क और सैन्य आंकड़ों के तीन स्तंभों पर आधारित होगी। साइबर ढांचे के माध्यम से यह तय किया जाएगा कि कौन-सी सूचना कहां से आएगी और उसे किस प्रकार सुरक्षित रखा जाएगा।
इसके साथ ही सेना देशभर में फैले अपने डिजिटल नेटवर्क, डेटा सेंटर और सॉफ्टवेयर सिस्टम को एक साझा प्लेटफॉर्म पर लाने की तैयारी कर रही है। इससे जंग के मैदान में तैनात जवान से लेकर शीर्ष कमांडर तक सभी को रियल टाइम जानकारी उपलब्ध हो सकेगी।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद सेना की सैन्य क्षमताओं में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। 29 दिसंबर 2025 को ओडिशा के चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज से पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट (LRGR-120) का सफल परीक्षण किया गया, जिसमें 120 किलोमीटर की अधिकतम रेंज तक सटीक वार किया गया। यह परीक्षण DRDO द्वारा किया गया।
इसके अलावा 17 दिसंबर 2025 को भारतीय सेना को अमेरिका से अंतिम तीन अपाचे AH-64E हेलिकॉप्टर प्राप्त हुए, जिससे सेना का छह अपाचे हेलिकॉप्टरों का बेड़ा पूरा हो गया। इन हेलिकॉप्टरों को पश्चिमी सीमा के पास जोधपुर में तैनात किया गया है।
सेना की इन्फैंट्री विंग को भी मजबूती मिली है। 23 अक्टूबर 2025 को सेना ने जानकारी दी कि अगले छह महीनों में भैरव लाइट कमांडो की 20 बटालियनें और शामिल होंगी। इनमें से चार बटालियनें पहले ही सक्रिय हैं, जबकि शेष चरणबद्ध तरीके से तैनात की जाएंगी।
भारतीय सेना का यह नया रोडमैप स्पष्ट संकेत देता है कि भविष्य की लड़ाई पारंपरिक हथियारों से अधिक तकनीक, डेटा और डिजिटल नेटवर्क के दम पर लड़ी जाएगी।






