जब त्रिशूर रेलवे स्टेशन पर लगी आग ने बदल दिया सुबह का रंग, भारी नुकसान और सवालों की लपटें
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संवाद 24 डेस्क। रविवार सुबह त्रिशूर रेलवे स्टेशन के पास बने दोपहिया पार्किंग क्षेत्र में भयानक आग लगने से करीब 200 से अधिक मोटरसाइकिल और स्कूटर पूरी तरह जलकर राख हो गए, जिससे यात्रियों, स्थानीय लोगों और स्टेशन स्टाफ में हड़कंप मच गया।
अचानक भड़क उठी लपटें, मिनटों में विकराल रूप
सुबह लगभग 6:45 बजे के करीब ट्रिशूर रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 2 के पास स्थित पार्किंग इलाके में आग की लपटें भड़क उठीं। देखते ही देखते यह आग इतनी तीव्र हो गई कि वहां रोजाना खड़े करीब 500 से अधिक दोपहिया वाहनों में से सैकड़ों पूरी तरह से जलकर राख हो गए।
पैनिक में बदली सुबह, पर ट्रेन सेवाएं बचीं सामान्य
आग लगने की सूचना मिलते ही फायर एंड रेस्क्यू दल तुरंत मौके पर पहुँचे और करीब आधे घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया, लेकिन तब तक कई वाहनों को भारी नुकसान हो चुका था। यह घटना इतनी तेज़ी से फैल गई कि आसपास के इलाके में घना धुआँ फैल गया और यात्रियों को समस्याओं का सामना करना पड़ा। हालांकि, रेलवे अधिकारियों ने पुष्टि की कि इस आग से ट्रेन सेवाओं पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा और आवाजाही जारी रही।
घायलों की बजाय सवालों की संख्या बढ़ी
चश्मदीद लोगों ने बताया कि कई वाहनों को राख होते देख वाहन मालिक भावुक हो गए, खासकर वे लोग जो रोज़ाना इसी पार्किंग का इस्तेमाल करते थे। कुछ तो मौके पर पहुँचने पर खुद अपनी बाइक जलती हुई हालत में देखकर स्तब्ध रह गए। अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि आग बिजली के शॉर्ट सर्किट, फ्यूल लीक या किसी और कारण से लगी, अधिकारियों ने विस्तृत जांच की बात कही है।
सीसीटीवी फुटेज जांच में अहम भूमिका
रेलवे प्रशासन अब इस आग लगने के कारण को समझने के लिए स्टेशन के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि शुरुआत कहां से हुई और कैसे इतनी तेजी से फैल गई। अधिकारियों ने प्रभावित वाहन मालिकों को आश्वासन दिया है कि जांच पूरी होने पर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठ रहे हैं सवाल
यह घटना एक बार फिर उन बुनियादी सुरक्षा उपायों पर सवाल खड़े कर देती है जो भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक क्षेत्रों, खासकर रेलवे स्टेशनों में लागू होने चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे पार्किंग क्षेत्रों में अग्नि सुरक्षा के मानकों को सख्ती से लागू नहीं किया गया तो इसी तरह के हादसे भविष्य में दोबारा हो सकते हैं।
अंततः हम कह सकते हैं कि इस तरह के हादसे यात्रियों और आम लोगों की सुरक्षा को लेकर नए चिंताओं को जन्म दे रहे हैं। रेलवे स्टेशन जैसी महत्वपूर्ण यात्रा केंद्रों पर सुरक्षा के हर आयाम को पुनः जांचना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।






