जब दिमाग बहुत सोचता है, तो पेट क्यों बिगड़ता है? सोच, तनाव और पाचन का चौंकाने वाला रिश्ता
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संवाद 24 डेस्क। आज की तेज़-तर्रार जिंदगी में अधिक सोचने की आदत सिर्फ दिमाग को थका नहीं रही यह पाचन तंत्र पर भी सीधा असर डाल रही है। विशेषज्ञों की मानें तो मानसिक स्थिति और पाचन प्रणाली के बीच एक गहरा “ब्रेन-गट कनेक्शन” होता है, जिसकी वजह से हमारी सोच और पेट दोनों एक दूसरे को प्रभावित करते हैं।
जब हम ज़रूरत से ज्यादा सोचते हैं या चिंता में डूबे रहते हैं, तो हमारा शरीर “फाइट या फ्लाइट” स्थिति में चला जाता है। ऐसे समय में स्ट्रेस हार्मोन जैसे कॉर्टिसोल का स्तर बढ़ता है, जिससे पेट में पाचन रस का स्राव कम हो जाता है और पेट की नर्व्स पर दबाव बढ़ता है। परिणामस्वरूप खराब पाचन, गैस, अपच और पेट दर्द जैसी समस्याएं देखने को मिल सकती हैं।
ब्रेन-गट कनेक्शन क्या है?
हमारा पेट सिर्फ खाना पचाने का काम नहीं करता, यह लाखों नर्व्स से भरा होता है और इसे कई बार “दूसरा दिमाग” भी कहा जाता है। मस्तिष्क और पेट दोनों एक ही नेटवर्क से जुड़े होते हैं, जिसे गट-ब्रेन एक्सिस कहा जाता है, और यही कनेक्शन तनाव का असर पेट तक पहुंचाता है।
जब तनाव बढ़ता है, शरीर खून मस्तिष्क और मांसपेशियों की ओर भेजता है और पेट-आंतों को कम खून मिलता है। इससे पाचन प्रक्रिया धीमी होती है और भारीपन या अस्थिर पेट की समस्या पैदा हो सकती है।
ओवरथिंकिंग के कारण पेट की समस्याएँ
डॉक्टर्स और स्वास्थ्य शोध बताते हैं कि मानसिक तनाव के कारण पेट की क्रियाएं बिगड़ सकती हैं जैसे कि:
पाचन रसों का कम स्राव होना
आंतों की गति में असंतुलन
IBS (इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम) जैसी स्थितियाँ
गैस, अपच या दस्त जैसी समस्याएँ
इसके अलावा, नींद की कमी भी पाचन एंजाइम्स को प्रभावित करती है। ओवरथिंकिंग करने वाले अक्सर देर तक जागते हैं, जिससे उनका पाचन और भी ज़्यादा कमजोर हो जाता है।
पाचन को मजबूत करने के उपाय
अगर आप अपने पाचन को बेहतर बनाना चाहते हैं तो कुछ सरल बदलाव कर सकते हैं:
✅ खाना खाते समय मोबाइल और तनाव से दूर रहें
✅ रोज़ 10-15 मिनट गहरी सांस, ध्यान या मेडिटेशन करें
✅ हल्की एक्सरसाइज या वॉक अपनाएं
✅ समय पर सोने की आदत बनाएं
✅ ज़्यादा मसालेदार और तला-भुना खाने से बचें
विशेषज्ञों के अनुसार, जब दिमाग शांत रहता है, तो शरीर “रिस्ट एंड डाइजेस्ट” मोड में सही तरह काम करता है जिससे पाचन भी सुधरता है।






