क्या रजाई के नीचे मोबाइल चलाना आपको अंधेपन की ओर ले जा रहा है? रात में मोबाइल स्क्रॉल करना ग्लूकोमा को दे रहा न्योता!
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संवाद 24 डेस्क। आधुनिक जीवनशैली में स्मार्टफोन हमारी सबसे अधिक उपयोग की जाने वाली तकनीक है। सुबह उठने के तुरंत बाद, रात सोते समय तक, हम अपनी आँखों को स्मार्टफोन स्क्रीन की चमक के सामने घंटों लगे रखते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि रात को कंबल या रजाई के नीचे मोबाइल पर स्क्रॉल करना, वह आरामदायक आदत जिसे हम तनाव कम करने या मनोरंजन के लिए करते हैं, वास्तव में हमारी दृष्टि और आँखों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है? यह मुद्दा अब नेत्र विशेषज्ञों और स्वास्थ्य शोधकर्ताओं के बीच चर्चा का विषय बन चुका है।
डिजिटल स्क्रीन और आँखों पर प्रभाव
स्मार्टफोन, टैबलेट और कंप्यूटर स्क्रीन से निकलने वाली प्रकाश ऊर्जा, विशेषकर नीली रोशनी (blue light), आंखों की उथली सतह पर प्रभाव डाल सकती है। हालांकि नीली रोशनी सीधे गंभीर रोगों का कारण नहीं बनती, लंबे समय तक इसके संपर्क में रहने से आँखों की थकान, ड्राई आई, धुंधलापन और नींद में बाधा जैसी समस्याएँ बढ़ सकती हैं।
ऐसे ही कई अध्ययनों ने दिखाया है कि स्क्रॉलिंग, विशेषकर कम रोशनी में, आँखों के सामने की मांसपेशियों पर दबाव बढ़ाता है और लगातार एक निकट दूरी पर फोकस करने की वजह से आँखों में थकान (digital eye strain) जैसी स्थितियाँ उभर सकती हैं।
कंबल के नीचे मोबाइल: क्यों यह आदत है जोखिम भरी?
जब आप रात को कंबल के नीचे मोबाइल चलाते हैं, तो आपकी आँखों को एक बहुत कमजोर व असामान्य प्रकाश स्रोत पर फोकस करना पड़ता है, जो स्क्रीन की चमक और आसपास की अंधेरी स्थिति के बीच अत्यधिक अंतर पैदा करता है। इस अंतर को पूरा करने के लिए आपकी आंखों को लगातार समायोजन करना पड़ता है, जिससे:
आँखों की मांसपेशियों पर दबाव बढ़ता है
पलकें कम झपकती हैं, जिससे आँखों के लुब्रिकेशन (tear film) में कमी आती है
इससे सूखापन, जलन और लालिमा जैसी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं
इन स्थितियों के कारण आँखों के अंदर आँख के दबाव (intraocular pressure – IOP) में अस्थायी बढ़ोतरी हो सकती है, जो कुछ विशेषज्ञों के अनुसार उन लोगों में जोखिम कारक बन सकता है जो पहले से ही ग्लूकोमा के लिए संवेदनशील हैं।
ग्लूकोमा: “दृष्टि का चोर” क्यों कहलाता है?
ग्लूकोमा एक गंभीर नेत्र रोग है जिसमें ऑप्टिक नर्व (optic nerve) धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त होती है और बगैर समय पर इलाज के यह अंधत्व तक ले जा सकता है। इसे ‘दृष्टि का चोर’ कहा जाता है क्योंकि शुरुआत में यह बिना स्पष्ट लक्षण दिखाए धीरे-धीरे दृष्टि को छीन लेता है।
हालांकि डायरेक्ट शोध यह साबित नहीं करता कि मोबाइल स्क्रीन पर अधिक समय बिताना सीधे ग्लूकोमा का कारण बनता है, कई डॉक्टर और शोधकर्ता मानते हैं कि आँखों पर दबाव बढ़ने और आँखों की थकान जैसी स्थितियाँ उन लोगों में ग्लूकोमा के जोखिम को बढ़ा सकती हैं जिनकी आँखें पहले से संवेदनशील हैं या जिनमें ग्लूकोमा का आनुवंशिक इतिहास है।
कौन हैं संवेदनशील समूह?
कुछ लोग ग्लूकोमा और आँखों संबंधी समस्याओं के लिए अतिरिक्त रूप से जोखिम में होते हैं:
जिनका घरेलू इतिहास (family history) ग्लूकोमा से जुड़ा है
मधुमेह या उच्च रक्तचाप वाले लोग
जिनकी उम्र 40 वर्ष से अधिक है
गंभीर मायोपिया (near-sightedness) वाले लोग
जिनकी आँखों पर पहले किसी चोट या सर्जरी का इतिहास है
ये सभी समूह नियमित आँखों की जांच के बिना ग्लूकोमा जैसे रोगों को पहचानने में देर कर सकते हैं, जिससे बीमारी और बढ़ सकती है।
डिजिटल आँखों की थकान: ग्लूकोमा से अलग लेकिन संबद्ध
जिन्हें “डिजिटल आँखों की थकान” कहा जाता है, उनमें लंबे समय तक स्क्रीन देखने के कारण कई लक्षण दिखाई देते हैं, जैसे:
आंखों में जलन या पीड़ा
धुंधलापन
लगातार सिरदर्द
आंखों के चारों ओर लालिमा या जलन
आँखों का जल्दी थक जाना
ये लक्षण भले ही सीधे ग्लूकोमा न हों, लेकिन यह संकेत हो सकते हैं कि आपकी आँखों पर निरंतर दबाव बन रहा है—जो समय के साथ अन्य समस्या का रूप ले सकता है। ऐसे में स्क्रीन के सामने बिना ब्रेक के समय बिताना जोखिम भरा हो सकता है।
कंबल के नीचे की दृश्य स्थिति क्यों अधिक खतरनाक है?
कंबल के नीचे की स्थितियाँ अक्सर कम रोशनी में होती हैं, और जब आपकी आँखें आंख की पुतलियों को खुला रखने के लिए कोशिश करती हैं, तो स्क्रीन की चमक और परिवेश के अंधेरे के बीच की तीव्रता का अंतर आँखों पर भारी पड़ता है। यह स्थिति:
मुख्य रूप से नीली रोशनी के प्रभाव को बढ़ाती है
पलकें स्वतः कम झपकती हैं
आँखों का फ़ोकस बार-बार बदलता रहता है, जिससे थकान बढ़ती है
नीली रोशनी का प्रभाव केवल आँखों तक सीमित नहीं है, यह नींद चक्र (circadian rhythm) को भी प्रभावित कर सकती है, जिससे नींद की गुणवत्ता घट सकती है।
आँखों को सुरक्षित रखने के उपाय
20-20-20 नियम लागू करें
हर 20 मिनट के स्क्रीन उपयोग के बाद 20 सेकंड के लिए 20 फुट दूर किसी वस्तु को देखें। इससे आपकी आँखों की मांसपेशियों को आराम मिलता है और थकान कम होती है।
पलकें अधिक झपकाएँ
स्क्रीन देखते समय हम पलकें कम झपकाते हैं, इससे आँखों की नमी कम होती है और सूखापन बढ़ता है। कोशिश करें कि नियमित रूप से पलकें झपकाएँ।
प्रकाश और कंबल के नीचे परिस्थिति सुधारें
यदि रात को मोबाइल का उपयोग करना आवश्यक हो, तो हल्का कमरा प्रकाश भी चालू रखें, कंबल के नीचे पूरी तरह अंधेरे में स्क्रीन फीका और तनावपूर्ण होता है।
ब्लू-लाइट फिल्टर या एंटी-रिफ्लेक्टिव ग्लासेज़ का इस्तेमाल
कुछ चश्मे या स्क्रीन फ़िल्टर ऐसे होते हैं जो नीली रोशनी को कम करते हैं और आंखों को आराम देने में मदद करते हैं।
नियमित आई परीक्षण कराएँ
विशेषकर अगर आप 40 वर्ष से ऊपर हैं या आपके परिवार में ग्लूकोमा का इतिहास है, तो नियमित आँखों की जांच कराना बेहद आवश्यक है।
परामर्श: डॉक्टर क्या कहते हैं?
नेत्र विशेषज्ञों के अनुसार, मोबाइल स्क्रीन महत्वपूर्ण तनाव का स्रोत बन सकता है, खासकर जब यह रात में कम रोशनी में उपयोग किया जाता है। कई चिकित्सक मानते हैं कि यह स्थिति सीधे ग्लूकोमा का कारण नहीं हो सकती, लेकिन आँखों में दबाव, सूखापन और तनाव जैसी स्थितियों के लिए अनुकूल वातावरण पैदा कर सकती है, जो जोखिम समूहों में समस्या को बढ़ा सकती हैं।
डॉक्टरों का सुझाव है कि केवल समस्या महसूस होने पर आई डॉक्टर को देखा जाए, बल्कि नियमित जांच और समय-समय पर आँखों की सेहत की समीक्षा कराई जानी चाहिए।
मोबाइल स्क्रीन उपयोग: संतुलन कैसे बनाएं?
डिजिटल युग में स्क्रीन का उपयोग लगभग अनिवार्य हो गया है, काम, शिक्षा, मनोरंजन और सामाजिक संपर्क के लिए। इसलिए आँखों की सुरक्षा की दिशा में संतुलित और स्मार्ट उपयोग अपनाना न केवल सुरक्षित है बल्कि आवश्यक भी है।
✔️ स्क्रीन के सामने समय निर्धारित करें
✔️ ब्रेक लेने की आदत डालें
✔️ कमरे में हल्का प्रकाश रखें
✔️ आँखों की नियमित जांच कराते रहें
ऐसे छोटे-छोटे कदम आपकी आँखों की सेहत को लंबे समय तक बनाए रखने में मदद कर सकते हैं।
कंबल के नीचे मोबाइल स्क्रॉल करना आरामदायक लग सकता है, लेकिन यह आदत आपकी आंखों पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है। भले ही सीधे ग्लूकोमा का कारण साबित नहीं हुआ हो, विशेषज्ञों के अनुसार यह आँखों में तनाव, दबाव और थकान जैसी स्थितियों को जन्म दे सकता है, जो जोखिम समूहों में समस्या को बढ़ा सकते हैं। यही वजह है कि हमें स्क्रीन समय के प्रबंधन, नियमित ब्रेक लेना, और समय-समय पर आंखों की जांच कराना चाहिए। आख़िरकार, आँखों की सुरक्षा हमारी जीवन की गुणवत्ता और सुंदर दुनिया को देखने की क्षमता का मूल आधार है।






