64 मुकदमों वाले गैंगस्टर विनय त्यागी की मौत, बेटी ने ठेकेदार सुभाष त्यागी पर लगाया हमले का आरोप
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संवाद 24 मेरठ। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुख्यात हिस्ट्रीशीटर और 64 मुकदमों में आरोपी विनय त्यागी की शनिवार सुबह एम्स ऋषिकेश में इलाज के दौरान मौत हो गई। हरिद्वार के लक्सर क्षेत्र में 24 दिसंबर को कोर्ट में पेशी के लिए ले जाते समय पुलिस कस्टडी में हुए हमले में वह गंभीर रूप से घायल हो गया था। उसकी मौत के साथ ही उससे जुड़े कई बड़े और रहस्यमय मामलों पर फिलहाल पर्दा पड़ गया है।

मेरठ निवासी विनय त्यागी पर हत्या, हत्या के प्रयास, अपहरण और डकैती जैसे संगीन अपराधों सहित कुल 64 मुकदमे दर्ज थे, जिनमें से 38 मामले अभी अदालतों में विचाराधीन थे। हैरानी की बात यह रही कि 30 सितंबर को देहरादून के नेहरू कॉलोनी थाने की पुलिस ने उसे महज 15 हजार रुपये की चोरी के एक मामले में गिरफ्तार कर जेल भेजा था। उसी दिन से विनय त्यागी के करीबियों के बीच यह चर्चा थी कि वह अपनी जान को लेकर आशंकित था और जेल को ही सबसे सुरक्षित ठिकाना मान रहा था।
सूत्रों के मुताबिक 89 दिन बाद पुलिस कस्टडी में हुए हमले के बाद इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। विनय की बेटी तन्वी भारद्वाज ने अपने पिता पर हुए हमले के लिए ठेकेदार सुभाष त्यागी को जिम्मेदार ठहराया है। बेटी का कहना है कि गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचने पर उन्होंने अपने पिता से पूछा कि हमला किसने कराया, तो उन्होंने स्पष्ट रूप से सुभाष त्यागी का नाम लिया।
चोरी के जिस मामले में विनय को जेल भेजा गया था, वह शुरू से ही संदेह के घेरे में रहा। 15 सितंबर को देहरादून के नेहरू कॉलोनी थाने में अशोक विहार निवासी प्रमोद त्यागी ने शिकायत दी थी कि उसके घर के बाहर खड़ी कार से नकदी और सोने-चांदी के आभूषण चोरी हो गए हैं। पुलिस ने जांच के बाद 30 सितंबर को आशारोड़ी टनल के पास से विनय त्यागी को गिरफ्तार कर लिया। उसके पास से 15 हजार रुपये नकद, लगभग चार लाख रुपये के सोने-चांदी के सिक्के और एक फोर्ड एंडेवर कार बरामद होने का दावा किया गया।
हालांकि यह पूरी कहानी शुरू से ही लोगों के गले नहीं उतरी। स्थानीय स्तर पर इसे लेन-देन से जुड़ा मामला बताया जाता रहा। यह भी सामने आया कि शिकायतकर्ता प्रमोद त्यागी, विनय का करीबी था और जेल जाने से पहले विनय उसी के घर में छिपा हुआ था। प्रमोद त्यागी पेशे से चिकित्सक है और पूर्व में देहरादून के आराघर क्षेत्र में उसका क्लिनिक था, जिसे वर्ष 2018 में भ्रूण लिंग परीक्षण के मामले में छापेमारी के बाद सील किया जा चुका है। वह इस मामले में पहले भी जेल जा चुका है।
सूत्रों का कहना है कि पूरा घटनाक्रम गाजियाबाद के इंदिरापुरम क्षेत्र के एक माफिया से जुड़ा हुआ है, जो अपने पार्टनर के नाम से कंपनी संचालित करता है लेकिन वास्तविक नियंत्रण उसी के हाथ में है। बताया जाता है कि उत्तराखंड के पुलिस-प्रशासन और राजनीतिक गलियारों में उसकी गहरी पकड़ है। आशंका जताई जा रही है कि ईडी की कार्रवाई के डर से करोड़ों रुपये नकद और लाखों के जेवरात से लदी कार कुछ समय के लिए चिकित्सक के पास रखवाई गई थी और बाद में उसे चोरी का रूप दे दिया गया। हालांकि पुलिस जांच में अब तक इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है।
सूत्रों के अनुसार यूपी एसटीएफ लंबे समय से विनय त्यागी की तलाश में थी। एनकाउंटर के डर से वह देहरादून में छिपा हुआ था और खुद को सुरक्षित रखने के लिए जेल जाने की रणनीति बनाई गई। इसी कड़ी में चोरी का मामला सामने आया और उसे जेल भेज दिया गया।
गौरतलब है कि विनय त्यागी 42 हजार करोड़ रुपये के बहुचर्चित बाइक बोट घोटाले का भी मुख्य आरोपी रहा है। गाजियाबाद स्थित गर्वित इनोवेटिव प्रमोटर्स लिमिटेड कंपनी के जरिए निवेशकों से बड़े पैमाने पर ठगी के आरोप उस पर लगे थे। उसकी पत्नी उत्तर प्रदेश में ब्लॉक प्रमुख भी रह चुकी है।
मरने से पहले विनय त्यागी द्वारा ठेकेदार सुभाष त्यागी का नाम लिए जाने के बाद मामला और गंभीर हो गया है। बेटी का आरोप है कि घटना के करीब आठ घंटे बाद वे अस्पताल पहुंच सके और ऑपरेशन भी काफी देर से हुआ। उन्होंने बताया कि इसके बाद उन्हें आईसीयू में मिलने की अनुमति भी नहीं दी गई। अब विनय त्यागी की मौत के बाद जांच एजेंसियों पर पूरे घटनाक्रम की परतें खोलने का दबाव बढ़ गया है।




