शाहजहांपुर हादसा : ‘पापा चॉकलेट लेकर आएंगे…’ एक वादा, जो कभी पूरा न हो सका
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संवाद 24 डेस्क। उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में बुधवार शाम दिल दहला देने वाला हादसा हुआ। लखीमपुर के रहने वाले सेठपाल, उनकी पत्नी पूजा, उनके दो बच्चे और साढ़ू हरिओम, कुल पाँच लोग, ट्रेन की चपेट में आ गए और मौके पर ही उनकी मौत हो गई।
सेठपाल अपनी 8 साल की बेटी परी को घर इसलिए छोड़ गए थे क्योंकि बाइक पर जगह नहीं थी। जाते वक्त उन्होंने बस इतना कहा था—“लौटते समय तुम्हारे लिए चॉकलेट लाऊंगा।” परी आज भी उसी वादे के इंतज़ार में है।
क्या हुआ था?
- हरिओम की पत्नी आठ महीने की गर्भवती है। परिवार में नए सदस्य के स्वागत की तैयारी चल रही थी।
- सभी लोग बुध बाजार से खरीदारी कर लौट रहे थे।
- रोजा स्टेशन के पास प्लेटफॉर्म के करीब रेलवे ट्रैक पार करते समय तेज़ रफ्तार ट्रेन ने बाइक को टक्कर मार दी।
- बाइक ट्रेन में फँसकर करीब 500 मीटर तक घिसटती चली गई। पल भर में पाँच ज़िंदगियाँ खामोश हो गईं।

हादसे के बाद
- ट्रैक पर शवों के क्षत-विक्षत अवशेष बिखर गए।
- सूचना मिलते ही रेलवे और कई थानों की पुलिस मौके पर पहुँची।
- अवशेषों को पॉलिथीन में समेटकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया।
- गुरुवार को सभी का अंतिम संस्कार किया गया।
परिवारों पर टूटा दुख
- सेठपाल मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते थे। उनके माता-पिता और भाई-बहन गहरे सदमे में हैं।
- हरिओम भी मजदूर थे। पत्नी की दूसरी डिलीवरी का इंतज़ार कर रहे थे, जो अब एक अपूरणीय खालीपन में बदल गया।
यह हादसा एक बार फिर याद दिलाता है कि रेलवे ट्रैक पार करना कितना जानलेवा हो सकता है—और यह भी कि कभी-कभी एक छोटा-सा वादा, पूरे जीवन का सबसे भारी इंतज़ार बन जाता है।




