उन्नाव रेप केस में पूर्व विधायक कुलदीप सेंगर को जमानत, फैसले के विरोध में पीड़िता का दिल्ली में प्रदर्शन
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इंडिया गेट पर धरने के दौरान आधी रात पुलिस ने हटाया, पीड़िता ने परिवार की सुरक्षा पर जताई आशंका
संवाद 24 डेस्क: उन्नाव रेप मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे भारतीय जनता पार्टी के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है। हाईकोर्ट ने चार सख्त शर्तों के साथ सेंगर की सजा को अपील की सुनवाई पूरी होने तक निलंबित कर दिया है। इस फैसले के बाद पीड़िता और उसके परिवार की ओर से कड़ी नाराजगी सामने आई है।
हाईकोर्ट के आदेश के विरोध में रेप पीड़िता अपनी मां और सामाजिक कार्यकर्ता योगिता भयाना के साथ मंगलवार शाम दिल्ली के इंडिया गेट पहुंची और धरने पर बैठ गई। देर रात पुलिस मौके पर पहुंची और धरना समाप्त करने को कहा। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच बहस हुई, जिसके बाद आधी रात पीड़िता, उसकी मां और योगिता भयाना को जबरन वहां से हटा दिया गया। महिला पुलिसकर्मियों ने पीड़िता और उसकी मां को उठाकर अपने साथ ले जाया। उन्हें कहां ले जाया गया, इसकी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आ सकी।
इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए योगिता भयाना ने सोशल मीडिया पर लिखा कि क्या न्याय मांगना अपराध है। उन्होंने कहा कि एक गैंगरेप पीड़िता के साथ इस तरह का व्यवहार बेहद चिंताजनक है और यह पूरे न्याय तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
पीड़िता का दर्द: ‘मुझे डर है, वे मुझे और मेरे परिवार को मार देंगे’
पीड़िता ने भावुक बयान में कहा कि अगर ऐसे मामलों में आरोपियों को राहत मिलती रही, तो देश की बेटियां खुद को सुरक्षित कैसे महसूस करेंगी। उन्होंने बताया कि हाईकोर्ट का फैसला सुनकर वह टूट गई थीं और आत्महत्या का विचार तक मन में आया, लेकिन परिवार और बच्चों का ख्याल कर खुद को संभाला।
पीड़िता ने आरोप लगाया कि उसके पिता की हत्या, परिवार के सदस्यों पर हमले और उसका खुद का जानलेवा एक्सीडेंट इसी केस से जुड़ी घटनाएं हैं। उसने कहा कि वह मौत से लड़कर बाहर आई है, लेकिन अब सेंगर को जमानत मिलने के बाद फिर से डर का माहौल बन गया है। पीड़िता के अनुसार, सेंगर भले ही उससे पांच किलोमीटर दूर रहने की शर्त पर रिहा हुआ हो, लेकिन उसके लोग खुलेआम घूम रहे हैं और परिवार की सुरक्षा खतरे में है।
एक्टिविस्ट का आरोप: चुनावी फायदे के लिए दी गई राहत
सामाजिक कार्यकर्ता योगिता भयाना ने इस फैसले को न्याय के साथ अन्याय करार दिया। उन्होंने कहा कि इस केस में पीड़िता के पूरे परिवार को निशाना बनाया गया, कई लोगों की जान गई और पीड़िता खुद गंभीर रूप से घायल हुई। इसके बावजूद आरोपी को राहत मिलना देश की न्याय व्यवस्था पर गहरा धब्बा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि आगामी चुनावों को देखते हुए यह फैसला सुनियोजित साजिश का हिस्सा लग रहा है। योगिता ने कहा कि अगर न्याय मांगने पर पीड़िताओं को लाठियां मिलेंगी, तो यह लोकतंत्र और कानून व्यवस्था के लिए बेहद खतरनाक संकेत है।
हाईकोर्ट ने किन शर्तों पर दी जमानत
दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर की पीठ ने सेंगर की अपील पर सुनवाई लंबित रहने तक उसकी सजा निलंबित की है। कोर्ट ने 15 लाख रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दी है और चार शर्तें लगाई हैं—
सेंगर को पीड़िता से कम से कम पांच किलोमीटर की दूरी बनाकर रखनी होगी।
हर सोमवार को स्थानीय पुलिस के समक्ष हाजिरी देनी होगी।
पासपोर्ट संबंधित प्राधिकरण के पास जमा करना होगा।
किसी भी शर्त के उल्लंघन पर जमानत स्वतः रद्द मानी जाएगी।
क्या है पूरा मामला
साल 2017 में उन्नाव में 17 वर्षीय नाबालिग लड़की के अपहरण और दुष्कर्म का मामला सामने आया था। इस केस की जांच सीबीआई ने की थी। दिसंबर 2019 में दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने कुलदीप सिंह सेंगर को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी और आदेश दिया था कि वह मृत्यु तक जेल में रहेगा। सेंगर पर 25 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था, उसकी विधानसभा सदस्यता रद्द कर दी गई थी और भाजपा ने उसे पार्टी से निष्कासित कर दिया था।
अब हाईकोर्ट से मिली जमानत के बाद यह मामला एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर बहस और विरोध का विषय बन गया है।




