बिजनौर आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश: एटीएस-एसटीएफ की बड़ी कार्रवाई
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उत्तर प्रदेश में आतंकवाद के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच बिजनौर से दो और संदिग्धों की गिरफ्तारी ने सुरक्षा एजेंसियों को बड़ी सफलता दिलाई है। यूपी एटीएस और एसटीएफ की संयुक्त कार्रवाई में उवैद मलिक और जलाल हैदर उर्फ समीर जाफरी को गिरफ्तार किया गया है। यह गिरफ्तारी पहले पकड़े गए आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर की गई, जिससे पूरे नेटवर्क की परतें खुलनी शुरू हुई हैं।
अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन: दुबई से संचालित हो रहा था नेटवर्क
जांच में सामने आया है कि इस आतंकी नेटवर्क के तार विदेशों से जुड़े हुए हैं। दुबई में मौजूद आकिब नामक व्यक्ति इस नेटवर्क का प्रमुख संचालक बताया जा रहा है, जो सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को कट्टरपंथ की ओर आकर्षित कर रहा था। उसके संपर्क दक्षिण अफ्रीका में रह रहे मैजुल और सऊदी अरब में मौजूद आजाद से भी जुड़े पाए गए हैं। एजेंसियों ने इन तीनों के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी किया है।
सोशल मीडिया बना हथियार: डिजिटल माध्यम से फैल रहा था कट्टरपंथ
पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए एक-दूसरे से जुड़े थे और यहीं से नेटवर्क का विस्तार कर रहे थे। आकिब युवाओं को गुमराह कर उन्हें हिंसक विचारधारा अपनाने के लिए प्रेरित करता था। पहले गिरफ्तार आरोपियों ने बताया कि उन्हें ऑनलाइन माध्यम से निर्देश मिलते थे और उसी के आधार पर गतिविधियां संचालित की जाती थीं।
देश में दहशत फैलाने की साजिश: आगजनी और तोड़फोड़ की योजना
एजेंसियों के अनुसार, यह मॉड्यूल केवल विचारधारा तक सीमित नहीं था, बल्कि जमीन पर दहशत फैलाने की योजना भी बना रहा था। आरोपियों पर पहले बिजनौर में आगजनी की घटनाओं में शामिल होने का आरोप है, जिससे इलाके में भय का माहौल बनाया गया। अन्य गिरफ्तार आरोपियों ने भी रेलवे और गैस वाहनों को निशाना बनाने जैसी साजिशों का खुलासा किया था।
पहले भी सामने आई थी बड़ी चूक: “खिलौना” बताकर दी गई थी क्लीन चिट
इस पूरे मामले में एक चौंकाने वाला पहलू यह भी है कि पहले एक वायरल वीडियो में दिखाए गए हथियारों को स्थानीय पुलिस ने “खिलौना” बताकर आरोपियों को क्लीन चिट दे दी थी। बाद में एटीएस की जांच में यह दावा गलत साबित हुआ और मामला आतंकी साजिश से जुड़ा निकला। इस लापरवाही के चलते संबंधित पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई भी की गई।
एजेंसियों का अलर्ट: नेटवर्क अभी पूरी तरह खत्म नहीं
एटीएस और एसटीएफ का मानना है कि यह नेटवर्क अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और इसके अन्य सदस्य देश व विदेश में सक्रिय हो सकते हैं। लगातार छापेमारी, डिजिटल जांच और पूछताछ के जरिए इस पूरे मॉड्यूल को ध्वस्त करने की कोशिश जारी है।बिजनौर से हुई यह गिरफ्तारी केवल एक स्थानीय कार्रवाई नहीं, बल्कि एक बड़े अंतरराष्ट्रीय आतंकी नेटवर्क के खिलाफ निर्णायक कदम मानी जा रही है। सोशल मीडिया के जरिए फैलते कट्टरपंथ और विदेशी कनेक्शन ने सुरक्षा एजेंसियों के लिए नई चुनौती खड़ी की है, जिससे निपटने के लिए अब और सख्त निगरानी की जरूरत है।






