31 साल फरार आतंकी को नहीं मिली राहत: अदालत ने जमानत याचिका ठुकराई

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गाजियाबाद की अदालत ने खालिस्तान कमांडो फोर्स (KCF) से जुड़े आतंकवादी सुखविंदर सिंह ढिल्लों उर्फ छिंदा की जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि आरोपी का गंभीर आपराधिक इतिहास और लंबे समय तक फरार रहना उसे राहत देने के पक्ष में नहीं जाता। न्यायालय ने यह भी माना कि ऐसे मामलों में समाज और सुरक्षा एजेंसियों के हित सर्वोपरि हैं।

31 साल तक फरार रहा आरोपी, 2026 में हुआ गिरफ्तार

सुखविंदर सिंह को वर्ष 1993 में आर्म्स एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया था, लेकिन जमानत मिलने के बाद वह फरार हो गया था। करीब 31 वर्षों तक सुरक्षा एजेंसियां उसकी तलाश करती रहीं। आखिरकार, फरवरी 2026 में उत्तर प्रदेश एटीएस और गौतमबुद्ध नगर पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में उसे गिरफ्तार किया गया।

AK-56 राइफल और कारतूस के साथ हुआ था गिरफ्तार

मामले की शुरुआत 1993 में नोएडा के सेक्टर-20 थाने में दर्ज केस से हुई थी, जब आरोपी के पास से AK-56 राइफल और 121 कारतूस बरामद किए गए थे। यह बरामदगी उसकी आतंकी गतिविधियों में संलिप्तता का अहम सबूत मानी गई।

कई राज्यों में दर्ज हैं गंभीर आपराधिक मुकदमे

जांच में सामने आया कि आरोपी के खिलाफ उत्तर प्रदेश और पंजाब के विभिन्न जिलों में कुल आठ आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें हत्या (धारा 302) और हत्या के प्रयास (धारा 307) जैसे गंभीर आरोप भी शामिल हैं। अदालत ने इस तथ्य को विशेष रूप से उल्लेखित करते हुए जमानत से इनकार किया।

गैर-जमानती वारंट और कुर्की की कार्रवाई भी हुई

अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी के खिलाफ वर्ष 2000 में गैर-जमानती वारंट जारी किया गया था। इसके बाद धारा 82 और 83 के तहत कुर्की की प्रक्रिया भी अपनाई गई थी, जो उसकी फरारी की गंभीरता को दर्शाता है।

अदालत का स्पष्ट संदेश: गंभीर अपराध में नरमी नहीं

न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा कि अपराध की प्रकृति, बरामद हथियार, और आरोपी के पिछले रिकॉर्ड को देखते हुए जमानत देने का कोई ठोस आधार नहीं बनता। यह फैसला आतंकवाद और संगठित अपराध के मामलों में सख्त रुख का संकेत देता है।

Shivpratap Singh
Shivpratap Singh

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