एलपीजी संकट के बाद अब बोतलबंद पानी भी महंगा? वैश्विक तनाव से बढ़ी आम आदमी की चिंता
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मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब आम लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों पर भी दिखाई देने लगा है। एलपीजी गैस की आपूर्ति और कीमतों को लेकर पहले से ही चिंता बनी हुई है, वहीं अब बोतलबंद पानी की कीमतों में भी बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है। उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में तेज उछाल के कारण पैकेजिंग सामग्री महंगी हो गई है, जिससे बोतलबंद पानी के उत्पादन की लागत बढ़ रही है।
क्रूड ऑयल की कीमतों ने बढ़ाई पैकेजिंग इंडस्ट्री की मुश्किल
वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने से कई उद्योगों की लागत बढ़ गई है। बोतलबंद पानी उद्योग भी इससे अछूता नहीं है। प्लास्टिक बोतल बनाने में इस्तेमाल होने वाला प्रमुख कच्चा माल पॉलिमर क्रूड ऑयल से ही बनता है। हाल के दिनों में पॉलिमर की कीमतों में करीब 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे बोतल निर्माण की लागत काफी बढ़ गई है।
बोतल, ढक्कन और पैकेजिंग सामग्री के दाम बढ़े
उद्योग सूत्रों के अनुसार प्लास्टिक बोतल बनाने में इस्तेमाल होने वाले पॉलिमर की कीमत लगभग 170 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। वहीं बोतलों के ढक्कन (कैप) की कीमत भी दोगुनी से अधिक बढ़कर लगभग 0.45 रुपये प्रति पीस हो गई है। इसके अलावा बोतलों पर लगने वाले लेबल, गत्ते के डिब्बे और पैकिंग में इस्तेमाल होने वाली चिपकने वाली टेप की कीमतों में भी वृद्धि देखी जा रही है।
छोटे निर्माताओं पर सबसे ज्यादा असर
भारत में बोतलबंद पानी का बाजार लगभग 5 अरब डॉलर का माना जाता है, जिसमें हजारों छोटे और मध्यम स्तर के निर्माता शामिल हैं। लागत बढ़ने का सबसे ज्यादा असर इन्हीं छोटे निर्माताओं पर पड़ रहा है। उद्योग संगठनों का कहना है कि देशभर में करीब 2000 छोटे निर्माताओं ने लागत बढ़ने के कारण अपने उत्पादों की कीमतों में वृद्धि शुरू कर दी है।
डिस्ट्रीब्यूटर्स को भी पड़ रही महंगाई की मार
बढ़ती लागत का असर डिस्ट्रीब्यूटर्स पर भी दिखाई दे रहा है। बाजार में डिस्ट्रीब्यूटर्स को एक पानी की बोतल पर पहले की तुलना में लगभग एक रुपये अधिक खर्च करना पड़ रहा है। गर्मियों का मौसम शुरू होने के कारण पानी की मांग तेजी से बढ़ रही है, जिससे आने वाले दिनों में कीमतों में और बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है।
बड़े ब्रांड फिलहाल खुद उठा रहे लागत का बोझ
फिलहाल बिस्लेरी, एक्वाफिना, किनले और रिलायंस जैसे बड़े ब्रांड उपभोक्ताओं पर कीमत बढ़ोतरी का बोझ डालने के बजाय अतिरिक्त लागत खुद वहन कर रहे हैं। हालांकि उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बनी रहती है, तो आने वाले कुछ दिनों में रिटेल बाजार में भी पानी की बोतलों की कीमतों में 10 प्रतिशत तक बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
गर्मियों में बढ़ी मांग से बढ़ सकती है महंगाई
गर्मियों के मौसम में बोतलबंद पानी की मांग तेजी से बढ़ जाती है। ऐसे समय में उत्पादन लागत बढ़ने से कंपनियों के सामने कीमत बढ़ाने के अलावा सीमित विकल्प ही बचते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक तेल बाजार में स्थिति सामान्य नहीं हुई, तो आने वाले हफ्तों में बोतलबंद पानी भी आम उपभोक्ताओं के लिए महंगा हो सकता है।






