पश्चिम बंगाल दौरे पर राष्ट्रपति के सम्मान को लेकर सियासी संग्राम, योगी आदित्यनाथ ने उठाए सवाल
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पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हालिया दौरे के बाद देश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। सिलीगुड़ी के फांसीदेवा में आयोजित 9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन में शामिल होने पहुंचीं राष्ट्रपति मुर्मू ने कार्यक्रम की व्यवस्थाओं को लेकर अप्रसन्नता जताई। बताया गया कि उनके स्वागत के लिए राज्य सरकार का कोई वरिष्ठ प्रतिनिधि मौजूद नहीं था और कार्यक्रम स्थल भी अपेक्षाकृत छोटा था। इस घटना के बाद इसे लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
योगी आदित्यनाथ का तीखा बयान
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले पर पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस सरकार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कहा कि राष्ट्रपति के साथ हुआ व्यवहार अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण, निंदनीय और अक्षम्य है। योगी ने इसे केवल एक व्यक्ति का नहीं बल्कि भारतीय लोकतंत्र, मातृशक्ति और जनजातीय समाज की अस्मिता का अपमान बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति का पद देश की सर्वोच्च संवैधानिक गरिमा का प्रतीक है और इसके सम्मान में किसी भी प्रकार की असंवेदनशीलता स्वीकार नहीं की जा सकती।
जनजातीय समाज के सम्मान का मुद्दा
मुख्यमंत्री योगी ने यह भी कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू संथाल जनजाति से आती हैं और उनके प्रति ऐसा व्यवहार जनजातीय समाज के सम्मान के खिलाफ है। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस पर राजनीतिक अहंकार और छोटी मानसिकता का आरोप लगाते हुए पश्चिम बंगाल सरकार से देश से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस और तेज हो गई है।
मायावती ने भी जताई नाराजगी
इस पूरे विवाद पर बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति का पद देश का सर्वोच्च संवैधानिक पद है और उसका राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए। मायावती ने कहा कि राष्ट्रपति एक महिला और आदिवासी समाज से आती हैं, इसलिए उनके प्रोटोकॉल और सम्मान का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण घटना बताते हुए सभी दलों से संवैधानिक पदों की गरिमा बनाए रखने की अपील की।
ममता बनर्जी का पलटवार
वहीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इन आरोपों को राजनीतिक करार दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस सम्मेलन की आयोजक नहीं थी और कार्यक्रम की व्यवस्था आयोजकों द्वारा की गई थी। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देकर राज्य सरकार को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रपति को राजनीतिक विवादों में घसीटना उचित नहीं है।
सियासी माहौल गरम
राष्ट्रपति मुर्मू के दौरे से जुड़ा यह विवाद अब राष्ट्रीय राजनीति का मुद्दा बन गया है। एक ओर भाजपा नेता इसे संवैधानिक पद के सम्मान से जोड़कर देख रहे हैं, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक बयानबाजी बता रहा है। आने वाले दिनों में संसद और राष्ट्रीय राजनीति में इस मुद्दे पर और तीखी बहस होने की संभावना जताई जा रही है।






