यूपी विधानसभा में नौकरशाही के रवैये पर तीखी बहस, अधिकारियों द्वारा फोन न उठाने का मुद्दा उठा
Share your love

संवाद 24 लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा में मंगलवार को नौकरशाही के कामकाज और जनप्रतिनिधियों से समन्वय की कमी का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। नेता प्रतिपक्ष ने नियम-301 के तहत चर्चा करते हुए आरोप लगाया कि प्रदेश में कार्यपालिका का प्रभाव इतना बढ़ गया है कि कई स्थानों पर थानेदार तक विधायकों के फोन नहीं उठा रहे हैं, जिससे लोकतांत्रिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
सदन में विपक्ष के सदस्यों ने कहा कि कई अधिकारी न केवल फोन कॉल का जवाब नहीं देते बल्कि कॉल बैक करना भी जरूरी नहीं समझते। उनका कहना था कि यदि अधिकारी किसी बैठक या अन्य कार्य में व्यस्त हों तो भी उचित माध्यम से संदेश भेजकर संवाद बनाए रखना उनकी जिम्मेदारी है। कुछ सदस्यों ने यह भी आरोप लगाया कि कई बार पीठ के निर्देशों का भी समय पर पालन नहीं किया जाता, जिससे जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच दूरी बढ़ रही है।
सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के कुछ विधायकों ने यह मुद्दा उठाया कि केवल विपक्ष ही नहीं, बल्कि कई बार मंत्रियों और सत्तापक्ष के जनप्रतिनिधियों को भी अधिकारियों से संपर्क करने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है। इस कारण कई जनप्रतिनिधियों को धरना-प्रदर्शन जैसे कदम उठाने पड़ते हैं, जो प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
विधानसभा अध्यक्ष ने मामले को गंभीर मानते हुए इसे विचाराधीन रखते हुए संसदीय कार्य मंत्री के साथ चर्चा कर जल्द आवश्यक व्यवस्था देने की बात कही। संसदीय कार्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार अधिकारियों की मनमानी का समर्थन नहीं करती और जो अधिकारी जनप्रतिनिधियों के फोन नहीं उठाते, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी तथा उन्हें कॉल बैक करने के निर्देश दिए जाएंगे।
इसी दौरान समाज कल्याण मंत्री ने सुझाव दिया कि प्रदेश और जिला स्तर पर ऐसा हेल्पलाइन नंबर बनाया जाए, जहां जनप्रतिनिधि शिकायत दर्ज करा सकें कि संबंधित अधिकारी संपर्क नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के लिए “खतरे की घंटी” साबित हो सकती है।






