मुगलसराय रेलवे यार्ड में मिला था जनसंघ नेता दीनदयाल उपाध्याय का शव, आज पुण्यतिथि पर नेताओं ने दी श्रद्धांजलि
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संवाद 24 वाराणसी। भारतीय जनसंघ के प्रमुख विचारक और नेता दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि पर देशभर में उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह तथा विभिन्न राज्यों के नेताओं ने उनके योगदान को याद करते हुए उन्हें नमन किया। वर्ष 1968 में उनकी मृत्यु रहस्यमय परिस्थितियों में हुई थी, जब उनका शव मुगलसराय रेलवे यार्ड (अब पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन) के पास मिला था।
ऐतिहासिक अभिलेखों के अनुसार, दीनदयाल उपाध्याय फरवरी 1968 में एक संगठनात्मक बैठक में शामिल होने के लिए लखनऊ से पटना जा रहे थे। उन्होंने 10 फरवरी की शाम को ट्रेन में प्रथम श्रेणी का टिकट लेकर यात्रा शुरू की। रास्ते में ट्रेन वाराणसी और मुगलसराय स्टेशन से होकर गुजरी, जहां बोगियों के पुनर्गठन की प्रक्रिया भी हुई।
11 फरवरी 1968 की सुबह रेलवे कर्मचारियों ने मुगलसराय रेलवे यार्ड के पास ट्रैक पर उनका शव देखा, जिससे पूरे देश में सनसनी फैल गई। घटना के समय उनके पास टिकट, कुछ नकद राशि और निजी सामान भी बरामद हुआ। प्रारंभिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण ट्रेन से गिरने से आई चोटों को बताया
घटना की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपी। जांच के दौरान दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया, जिन्होंने चोरी के दौरान धक्का देने की बात स्वीकार की थी, हालांकि बाद में वे हत्या के आरोप से बरी हो गए। इसके बाद गठित आयोग ने भी सीबीआई की जांच से सहमति जताई, लेकिन घटना के रहस्य को लेकर समय-समय पर विभिन्न सवाल उठते रहे।
दीनदयाल उपाध्याय भारतीय राजनीति में “एकात्म मानववाद” के सिद्धांत के प्रणेता माने जाते हैं। उन्होंने संगठनात्मक विस्तार और वैचारिक निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसके कारण उन्हें जनसंघ के प्रमुख वैचारिक स्तंभों में गिना जाता है। उनकी पुण्यतिथि पर विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने उनके विचारों को देश के लिए प्रेरणास्रोत बताया।






