“डिजिटल स्वास्थ्य की दिशा: यूपी में एआई पहल से बदलाव की नई सुबह”
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संवाद 24 लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को लखनऊ में आयोजित “यूपी एआई एंड हेल्थ इनोवेशन कॉन्फ्रेंस 2026” का भव्य उद्घाटन किया। यह आयोजन राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलीकरण और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के उपयोग को नई ऊँचाइयों पर ले जाने के लिए एक निर्णायक कदम है। कार्यक्रम में नीति-निर्माताओं, स्वास्थ्य विशेषज्ञों, प्रौद्योगिकी कंपनियों, शिक्षाविदों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने भाग लिया, ताकि एआई-आधारित स्वास्थ्य नवाचारों को बढ़ावा देने के लिए साझा रणनीतियाँ और विचार विकसित किए जा सकें।
सम्मेलन का महत्व: स्वास्थ्य में एआई की भूमिका
हाल के वर्षों में स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा व्यापक रूप से बदल गया है। महामारी के बाद, वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य प्रणालियों में तकनीकी समावेशन की आवश्यकता और तीव्रता से महसूस की जा रही है। उत्तर प्रदेश सरकार ने इसी समझ को अपनाते हुए एआई-उन्मुख स्वास्थ्य नवाचार को प्राथमिकता दी है ताकि राज्य की सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों को प्रभावी रूप से हल किया जा सके।
“यूपी एआई एंड हेल्थ इनोवेशन कॉन्फ्रेंस 2026”, जो 12–13 जनवरी को The Centrum, लखनऊ में आयोजित किया गया, इसे भारत-एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के एक अग्रणी कार्यक्रम के रूप में भी देखा जा रहा है। यह सम्मेलन स्वास्थ्य के डिजिटलरण, एआई के नैतिक उपयोग, नीति-निर्माण और पार-क्षेत्रीय सहयोग का एक व्यापक मंच प्रदान करता है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भूमिका
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, जो उत्तर प्रदेश के सर्वाधिक प्रभावशाली नेतृत्व में से एक हैं और 2017 से इस पद पर बने हुए हैं, ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया। उन्होंने स्वास्थ्य सेवा के डिजिटलीकरण में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को केवल तकनीकी उपकरण नहीं, बल्कि जीवन-प्रत्यक्ष परिवर्तनकारी शक्ति के रूप में परिभाषित किया।
योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में, उत्तर प्रदेश ने स्वास्थ्य सेवाओं में एआई के उपयोग को नीति और कार्यान्वयन दोनों स्तरों पर एक प्रमुख रणनीति के रूप में अपनाया है। राज्य की टेक-नीतियाँ अब स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और शासन सहित कई क्षेत्रों में एआई-समर्थित समाधानों के विकास को बढ़ावा दे रही हैं।
सम्मेलन के प्रमुख विषय और एजेंडा
सम्मेलन का मूल उद्देश्य राज्य के स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई के प्रभावशाली उपयोग को निर्धारित करना और उसे व्यापक पैमाने पर अपनाना था। इसके मुख्य विषय एवं एजेंडा इस प्रकार रहे:
एआई-आधारित स्वास्थ्य तकनीकों का प्रदर्शन
सम्मेलन में एआई-एक्सपीरियंस ज़ोन स्थापित किया गया, जहाँ स्वास्थ्य तकनीकों और समाधानों का लाइव प्रदर्शन हुआ। इसमें शामिल हैं:
रोग निदान में मशीन-लर्निंग सिस्टम
टेली-मेडिसिन और क्लाउड-आधारित प्रणाली
रोगियों के लिए डेटा-चालित स्वास्थ्य मार्गदर्शन
एआई-आधारित रोग अनुकरण और अनुमान मॉडल
अस्पताल प्रक्रियाओं का स्मार्ट ऑटोमेशन
इन प्रदर्शनों ने स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता, पहुंच और गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए एआई की वास्तविक क्षमताओं को उजागर किया।
नीति-निर्माण और नैतिक एआई प्रथाओं पर चर्चा
सम्मेलन में एक विशेष सत्र एआई नीति और नैतिक AI के उपयोग पर केंद्रित रहा। इस सत्र में डेटा सुरक्षा, रोगी गोपनीयता, नैतिक निर्णय-निर्माण और विविध आबादी के लिए निष्पक्ष एल्गोरिदम को सुनिश्चित करने के लिए दिशा-निर्देश तैयार करने पर जोर दिया गया।
स्वास्थ्य विषयक कौशल विकास और प्रशिक्षण
एआई को लागू करने में प्रमुख चुनौती कौशल की कमी है। सम्मेलन ने इस पक्ष पर गहरा ध्यान दिया, जिसमें:
स्वास्थ्य पेशेवरों के लिए एआई प्रशिक्षण कार्यक्रम
युवा टेक्नोलॉजी शोधकर्ताओं के लिए विशेषज्ञ सत्र
उच्च शिक्षा संस्थानों और प्रशिक्षण केंद्रों के साथ सहयोग योजना
भविष्य-तैयार स्वास्थ्य कार्यबल की रूपरेखा
इन पहलों का लक्ष्य है कि स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में क्षमता निर्माण को दर-असर और स्थायी बनाया जाए।
सरकार-उद्योग-अकादमिक साझेदारी
सम्मेलन ने सरकार, इंडस्ट्री और अकादमिक संस्थाओं के बीच सहयोग को अत्यंत जरूरी बताया। इस भागीदारी के माध्यम से:
एआई-आधारित हेल्थटेक स्टार्ट-अप्स को संभावनाएँ दी जाएँगी
शोध और नवाचार के लिए अनुदान और बुनियादी ढाँचा समर्थन मिलेगा
साझा प्लेटफॉर्म और डेटा-शेयरिंग मॉडल विकसित किए जाएँगे
इस साझेदारी मॉडल का लक्ष्य दीर्घकालिक नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र (ecosystem) बनाना है।
उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवा में एआई का वर्तमान परिदृश्य
उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई के उपयोग का विस्तृत इतिहास और प्रगति है। राज्य ने अनेक क्षेत्रों में डिजिटल स्वास्थ्य पहलों को लागू किया है:
एआई-आधारित सर्वेक्षण और सेवाएँ
ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन प्लेटफॉर्म ने ग्रामीण और दूरदराज़ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सलाह तक पहुंच आसान की है।
डिजिटल डेटा संचयन और जोखिम मूल्यांकन प्रणाली ने रोगी देखभाल और स्वास्थ्य प्रबंधन को सुदृढ़ किया है।
AI Pragya के माध्यम से प्रशिक्षण पहल
उत्तर प्रदेश सरकार ने AI-Pragya कार्यक्रम के तहत 10 लाख नागरिकों को मशीन-लर्निंग, डेटा विश्लेषण और साइबर-सुरक्षा जैसे कौशलों में प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा है, ताकि तकनीकी दक्षता और रोजगार के अवसरों को बढ़ाया जा सके।
भविष्य की स्वास्थ्य संरचना
राज्य स्वास्थ्य विभाग ‘विकसित भारत’ दृष्टिकोण के तहत 19 महत्वपूर्ण स्वास्थ्य पैरामीटरों के कार्यान्वयन पर भी ध्यान दे रहा है, जिसमें एआई और आधुनिक तकनीकों का एकीकृत उपयोग शामिल है, जिससे समग्र स्वास्थ्य सेवा वितरण प्रभावी और उत्तरदायी बनाए जा सके।
अपेक्षित प्रभाव और आगे की दिशा
यह सम्मेलन केवल एक प्रदर्शनी या विचार-विमर्श का मंच नहीं है; यह एक मार्गदर्शक रणनीति का प्रारंभिक बिंदु है जो स्वास्थ्य क्षेत्र को AI-समर्थित, डेटा-चालित और सर्वसमावेशी सेवा मॉडल की ओर ले जाएगा।
संभावित परिणाम
स्वास्थ्य सेवा की गुणवत्ता और पहुँच में वृद्धि
उन्नत रोग-निदान और पूर्वानुमान क्षमताएँ
चिकित्सा प्रक्रियाओं का स्मार्ट ऑटोमेशन
रोजगार और कौशल विकास के नए अवसर
एआई-आधारित समाधान के लिए निवेश आकर्षण और शोध-आधार
भविष्य का स्वास्थ्य परिदृश्य
“यूपी एआई एंड हेल्थ इनोवेशन कॉन्फ्रेंस 2026” ने स्पष्ट रूप से दिखाया है कि एआई और स्वास्थ्य सेवाएँ मिलकर समाज की भलाई और सेवाओं की गुणवत्ता को पुनर्परिभाषित कर सकती हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने एक नया मॉडल तैयार किया है, जो तकनीकी नवाचार को सरकारी प्राथमिकता के रूप में अपनाता है और स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाता है।
इस पहल से न केवल उत्तर प्रदेश में, बल्कि भारत में स्वास्थ्य सेवा क्षेत्रों में एक नया मानक स्थापित होने की दिशा संकेत मिलता है जो भविष्य में सर्वसमावेशी, स्मार्ट और एआई-समर्थित स्वास्थ्य सेवाओं का वैश्विक रोल मॉडल बन सकता है।




