अरावली संरक्षण पर केंद्र का कड़ा फैसला, नई माइनिंग पर पूरी तरह रोक
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पर्यावरण मंत्रालय ने राज्यों को दिए निर्देश, अवैध खनन रोकने और जैव विविधता बचाने पर जोर
संवाद 24 नई दिल्ली। अरावली पहाड़ियों के संरक्षण को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा और सख्त कदम उठाया है। बुधवार को केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने सभी संबंधित राज्यों को निर्देश जारी करते हुए अरावली क्षेत्र में किसी भी तरह के नए खनन पट्टे देने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह अरावली रेंज की पारिस्थितिकी और जैव विविधता की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
मंत्रालय की ओर से जारी निर्देशों में कहा गया है कि यह प्रतिबंध पूरी अरावली रेंज पर समान रूप से लागू होगा, जो दिल्ली से लेकर गुजरात तक फैली हुई है। सरकार का उद्देश्य अरावली को एक सतत और अखंड भूवैज्ञानिक पहाड़ी श्रृंखला के रूप में सुरक्षित रखना और अनियमित व अवैध खनन गतिविधियों पर पूर्ण विराम लगाना है। हाल के दिनों में अरावली को लेकर चल रहे विवाद और सोशल मीडिया पर उठे विरोध के बीच यह फैसला अहम माना जा रहा है।
पर्यावरण मंत्रालय ने इंडियन काउंसिल ऑफ फॉरेस्ट्री रिसर्च एंड एजुकेशन (ICFRE) को भी निर्देश दिए हैं कि वह पूरे अरावली क्षेत्र का अध्ययन कर ऐसे अतिरिक्त इलाकों और जोन की पहचान करे, जहां खनन पर और सख्त प्रतिबंध लगाए जाने की आवश्यकता है। ये क्षेत्र पहले से अधिसूचित प्रतिबंधित इलाकों से अलग होंगे और इनकी पहचान पारिस्थितिक, भूवैज्ञानिक और लैंडस्केप स्तर के मानकों के आधार पर की जाएगी।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जो खदानें पहले से संचालित हो रही हैं, उनके मामले में संबंधित राज्य सरकारों को पर्यावरणीय सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना होगा। इन खदानों का संचालन सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुरूप ही किया जाएगा और टिकाऊ खनन पद्धतियों को अपनाना अनिवार्य होगा। इसके लिए मौजूदा खनन गतिविधियों पर अतिरिक्त निगरानी और नियंत्रण भी लगाया जाएगा।
गौरतलब है कि नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण मंत्रालय के नेतृत्व वाली समिति की सिफारिशों को स्वीकार करते हुए अरावली पहाड़ियों और अरावली रेंज की एक समान कानूनी परिभाषा को मंजूरी दी थी। इस परिभाषा के तहत, आसपास के इलाके से कम से कम 100 मीटर ऊंची भू-आकृति को ‘अरावली पहाड़ी’ और 500 मीटर के भीतर स्थित दो या उससे अधिक ऐसी पहाड़ियों के समूह को ‘अरावली रेंज’ माना गया है। इस परिभाषा के बाद सरकार को सोशल मीडिया पर आलोचना का सामना करना पड़ा था।
केंद्र सरकार के ताजा फैसले को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे अरावली क्षेत्र को अवैध खनन और पर्यावरणीय क्षति से बचाने में मदद मिलेगी।






