दो साल में 1,951 बार विमान के GPS से छेड़छाड़ हुई: सरकार का संसद में खुलासा
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संवाद 24, नई दिल्ली। देश में उड़ानों की सुरक्षा को लेकर एक गंभीर चिंता सामने आई है। बीते दो वर्षों में 1,951 बार विमानों के GPS सिस्टम के साथ छेड़छाड़ (GPS स्पूफिंग) के मामले दर्ज किए गए हैं। यह जानकारी केंद्र सरकार ने गुरुवार को लोकसभा में दी।
GPS किसी भी विमान को उसकी सटीक लोकेशन, दिशा और ऊंचाई बताता है। इसमें छेड़छाड़ से विमान गलत दिशा में जा सकता है, जो बड़े हादसे का कारण बन सकता है।

सरकार का जवाब: कौन फेक सिग्नल भेजता है—पता नहीं
नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने बताया कि इन घटनाओं की जांच वायरलेस मॉनिटरिंग ऑर्गेनाइजेशन कर रहा है। इसके बावजूद यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि फेक सिग्नल भेज कौन रहा है।
मंत्रालय ने स्वीकार किया कि दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, अमृतसर, हैदराबाद, बेंगलुरु और चेन्नई जैसे बड़े एयरपोर्ट प्रभावित हुए हैं।
10 नवंबर 2025 को DGCA ने एयरपोर्ट्स को GPS स्पूफिंग और GNSS छेड़छाड़ की रियल-टाइम रिपोर्टिंग के लिए खास SOP जारी की थी।
12 दिन में दूसरी बार GPS स्पूफिंग स्वीकार हुई
1 दिसंबर को केंद्रीय मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू ने राज्यसभा में बताया था कि 7 नवंबर को IGI दिल्ली एयरपोर्ट के AMSS सिस्टम से छेड़छाड़ की गई थी।
इस गड़बड़ी से—
- 800 से अधिक उड़ानें देरी से उड़ीं
- 20 उड़ानें रद्द हुईं
- फ्लाइट ऑपरेशन 12 घंटे बाधित रहा
सरकार ने कहा कि वैश्विक स्तर पर रैनसमवेयर और साइबर अटैक का खतरा बढ़ा है, इसलिए एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया अधिक मज़बूत साइबर सुरक्षा लागू कर रही है।
7 नवंबर को दिल्ली एयरपोर्ट पर क्या हुआ था?
AMSS (ऑटोमैटिक मैसेज स्विचिंग सिस्टम) फेल हुआ था। यह सिस्टम पायलट, ATC और दूसरे एयरपोर्ट्स के बीच हजारों टेक्स्ट-बेस्ड मैसेज भेजता है।
गड़बड़ी के कारण—
- फ्लाइट-प्लान मंजूरी
- रूट अपडेट
- मौसम चेतावनियां
- टेकऑफ और लैंडिंग क्लियरेंस
सब मैन्युअल रूप से करना पड़ा। इसी वजह से उड़ानें देरी से चलीं।
AMSS क्या है और यह क्यों जरूरी है?
AMSS एयर ट्रैफिक कंट्रोल का मुख्य डिजिटल सिस्टम है, जिसमें—
- फ्लाइट का रूट
- ऊंचाई
- फ्यूल डेटा
- उड़ान और लैंडिंग का समय
- रूट परिवर्तन
- चेतावनियां
जैसी जानकारी रियल-टाइम में जाती है।
सिस्टम फेल होने पर:
- मैन्युअल प्रोसेस बढ़ता है
- ATC पर दबाव बढ़ता है
- उड़ानें देरी होती हैं
- मानव त्रुटि का जोखिम बढ़ जाता है
दुनिया के सबसे बड़े एयरपोर्ट सिस्टम फेलियर
| वर्ष | घटना | प्रभाव |
|---|---|---|
| जुलाई 2024 | क्राउडस्ट्राइक ग्लोबल आउटेज | 7,000 उड़ानें रद्द, 13 लाख यात्री प्रभावित |
| अगस्त 2023 | UK ATC फेलियर | 600+ उड़ानें रुकीं, 7 लाख यात्री प्रभावित |
| अगस्त 2016 | अमेरिका डेल्टा डेटा सेंटर फेल | 2,100 उड़ानें प्रभावित, 90,000 यात्री प्रभावित |






