सैन्य खरीद से रणनीतिक साझेदारी तक मजबूत बने भारत–रूस संबंध; 16 महत्वपूर्ण समझौते
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संवाद 24, नई दिल्ली
भारत और रूस ने बदलते वैश्विक हालात के बीच अपनी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करते हुए 16 अहम समझौतों पर हस्ताक्षर किए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की नई दिल्ली स्थित हैदराबाद हाउस में मंगलवार को द्विपक्षीय बैठक हुई। दोनों नेताओं ने रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, शिक्षा और पर्यटन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की दिशा में नई पहल की।
बैठक में रक्षा सहयोग को केवल खरीद तक सीमित न रखकर इसे को-प्रोडक्शन और को-डेवलपमेंट मॉडल की ओर ले जाने पर सहमति बनी। रूसी उद्योगों में भारत से प्रशिक्षित कर्मियों को भेजा जाएगा, ताकि रक्षा उत्पादन तेज और सुरक्षित तरीके से बढ़ाया जा सके।
आतंकवाद पर शून्य सहनशीलता का आह्वान
दोनों राष्ट्राध्यक्षों ने विश्व को जीरो-टॉलरेंस पॉलिसी अपनाने की अपील की। पुतिन ने भारत को भरोसा दिलाया कि रूस आतंकवाद के खिलाफ साझा रणनीति के तहत सहयोग करने को तैयार है। पीएम मोदी ने इसे “मित्र के रूप में ऐतिहासिक जिम्मेदारी” बताया।
प्रमुख समझौते
- रूसी रक्षा उद्योगों की जरूरतों के लिए भारत से प्रशिक्षित विशेषज्ञ भेजे जाएंगे।
- आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई और सूचना साझा करने पर सहमति।
- रूसी नागरिकों के लिए भारत आगमन पर 30 दिनों का इलेक्ट्रॉनिक वीजा।
- परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष क्षेत्र में संयुक्त अनुसंधान।
महत्वपूर्ण घोषणाएं
- रूस ने भारतीय कंपनियों को निवेश के लिए उच्चस्तरीय औद्योगिक वातावरण देने का आश्वासन दिया।
- वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य।
- रूस से भारत तक खाद्यान्न और ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित करने के लिए लॉन्ग-टर्म प्रोटोकॉल की तैयारी।
पर्यटन, व्यापार और शिक्षा में नए अवसर
दोनों देशों के बीच पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 30 दिनों का e-Visa देने की घोषणा की गई। साथ ही भारत–रूस विश्वविद्यालय कार्यक्रम के तहत संयुक्त शैक्षणिक रिसर्च भी शुरू होगा। इसके अलावा व्यापारिक सहयोग को मजबूत करने के लिए भारतीय कंपनियों को रूस के उभरते औद्योगिक शहरों में निवेश का अवसर मिलेगा।






