प्रधानमंत्री कार्यालय अब ‘सेवा तीर्थ’ के नाम से जाना जाएगा
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संवाद 24 | नई दिल्ली
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के परिसर का नाम बदलकर ‘सेवा तीर्थ’ किए जाने की घोषणा की है। सरकार का कहना है कि यह बदलाव जन-केंद्रित प्रशासन, सुशासन और पारदर्शिता की भावना को दर्शाता है। इस निर्णय के साथ केंद्रीय सचिवालय और राजपथ सहित कई प्रतिष्ठित परिसरों के नामों में हुए पिछले परिवर्तनों की श्रृंखला आगे बढ़ी है।
सरकारी भवनों के नाम बदलने की व्यापक कवायद
केंद्र सरकार ने हाल के वर्षों में कई प्रमुख इमारतों और मार्गों के नाम बदलकर जनता-केन्द्रित संदेश देने की नीति अपनाई है।
पहले राजपथ कहलाने वाले मार्ग को कर्तव्य पथ नाम दिया जा चुका है। प्रधानमंत्री निवास का नाम लोक कल्याण मार्ग, जबकि केंद्रीय सचिवालय परिसर का नाम कृत्य भवन रखा गया है। अब प्रधानमंत्री कार्यालय को ‘सेवा तीर्थ’ कहा जाएगा।
‘अपनी सरकार’ की अवधारणा को मजबूत करने का प्रयास
अधिकारियों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार पिछले 10 वर्षों से प्रशासन को अधिक लोकतांत्रिक और जन-केंद्रित बनाने का प्रयास कर रही है। ‘सेवा’, ‘कर्तव्य’ और ‘लोक कल्याण’ जैसे शब्द सरकारी प्रतिष्ठानों के नामों में शामिल कर इन्हीं मूल्यों को संस्थागत रूप देने की कोशिश की जा रही है।
अधिकारियों का कहना है कि यह नामकरण जनता में ‘अपनी सरकार’ और विश्वासपूर्ण शासन की भावना को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
राज भवन भी कहलाएंगे ‘लोक भवन’
पिछले वर्ष केंद्र सरकार ने राज्यों में मौजूद राज भवन का नाम बदलकर ‘लोक भवन’ रखने की सिफारिश की थी। अब कई राज्यों में यह प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सरकार का कहना है कि राजशाही काल के प्रतीकों को हटाकर लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नामकरण किया जा रहा है।






