अयोध्या में राम मंदिर पर फहराई धर्मध्वजा, PM मोदी हुए भावुक, बोले ‘अब मानसिक गुलामी से मुक्ति का लक्ष्य’
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संवाद 24 अयोध्या।
अयोध्या में आज इतिहास रचते हुए राम मंदिर के शिखर पर धर्मध्वजा फहराई गई। प्राण प्रतिष्ठा के 673 दिन बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और RSS प्रमुख मोहन भागवत ने अभिजीत मुहूर्त पर सुबह 11:50 बजे बटन दबाकर 2 किलो की केसरिया ध्वजा को 161 फीट ऊंचे शिखर पर फहराया। इस क्षण को देख PM मोदी भावुक हो गए और धर्मध्वजा को हाथ जोड़कर प्रणाम किया।
PM ने कहा कि “आज सदियों के घाव भर गए हैं। हम भारत को गुलामी की मानसिकता से मुक्त करके रहेंगे। यह मानसिकता इतनी हावी हो गई थी कि भगवान राम को भी काल्पनिक बता दिया गया।”

ध्वजारोहण से पहले प्रधानमंत्री ने मोहन भागवत संग मंदिर की पहली मंजिल पर बने रामदरबार में पूजा-अर्चना और आरती की। इसके बाद रामलला के दर्शन किए और उनके लिए वस्त्र व चंवर भी चढ़ाए। उन्होंने साकेत कॉलेज से राम जन्मभूमि तक लगभग डेढ़ किलोमीटर का रोड शो भी किया, जहां स्कूली बच्चों ने फूल बरसाए और महिलाओं ने पारंपरिक तरीके से स्वागत किया।
मौके पर शहर को 1000 क्विंटल फूलों से सजाया गया था। सुरक्षा के लिए ATS, NSG, SPG, CRPF और PAC सहित 5-लेयर सिक्योरिटी लागू रही। रामलला ने आज सोने और रेशम के धागों से बने विशेष पीतांबर वस्त्र धारण किए।

▶ PM मोदी के भाषण की मुख्य बातें (32 मिनट का संबोधन)
• “सदियों की वेदना आज विराम पा रही है। धर्मध्वजा सिर्फ ध्वजा नहीं, भारतीय सभ्यता के पुनर्जागरण का प्रतीक है। आने वाली सदियों तक यह ध्वज प्रभु राम के आदर्शों को उद्घोष करेगा।”
• “अयोध्या वह धरती है जहां आदर्श आचरण में बदलते हैं। जब प्रभु यहां से गए तो युवराज थे, लौटे तो मर्यादा पुरुषोत्तम बनकर।”
• “विकसित भारत के लिए ऐसा रथ चाहिए जिसके पहिये शौर्य और धैर्य हों, घोड़े विवेक-संयम और परोपकार।”
• “1835 में मैकाले ने मानसिक गुलामी की नींव रखी थी। हमें 2035 तक देश को उससे मुक्त करना है।”
• “राम भेद से नहीं, भाव से जुड़ते हैं। अगर समाज को सामर्थ्यवान बनाना है तो भीतर राम की स्थापना करनी होगी।”
▶ भागवत बोले – “आज प्राण अर्पण करने वालों की आत्मा तृप्त हुई”
RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि यह दिवस उन सभी लोगों की साधना की परिणति है, जिन्होंने मंदिर आंदोलन के लिए प्राण तक न्यौछावर किए। “आज ध्वजारोहण देखकर उन्हें शांति मिली होगी।”
▶ योगी आदित्यनाथ ने कहा – “आस्था न झुकी, न रुकी… आज प्रतीक्षा साकार हुई”
CM योगी ने इसे “नए युग की शुरुआत” बताते हुए कहा कि अयोध्या अब संघर्ष की नहीं, उत्सवों की वैश्विक राजधानी बन रही है।
????जनसहभागिता
इस समारोह में उन 100 दानदाताओं को आमंत्रित किया गया जिन्होंने मंदिर निर्माण में 2 करोड़ से अधिक दान दिया था। हालांकि शंकराचार्यों को आमंत्रण नहीं भेजा गया। चौंकाने वाली बात रही कि चर्चित सेलिब्रिटी आमंत्रित होने के बावजूद शामिल नहीं हुए।
अयोध्या आज केवल एक धार्मिक नगर नहीं, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक बनकर उभरा है। प्रधानमंत्री के शब्दों में – “धर्मध्वजा ने न सिर्फ मंदिर के शिखर को, बल्कि राष्ट्र के आत्मविश्वास को भी ऊंचाई दी है।”






