अमेरिका के बायकॉट के बावजूद G20 घोषणा पत्र मंजूर, साउथ अफ्रीका मेजबानी ‘खाली कुर्सी’ को सौंपेगा
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संवाद 24
G20 समिट के पहले दिन शनिवार को सदस्य देशों ने दक्षिण अफ्रीका द्वारा तैयार किए गए घोषणा पत्र को सर्वसम्मति से मंजूर कर दिया। यह निर्णय उस समय लिया गया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सम्मेलन को बायकॉट कर दिया और समिट में अमेरिकी प्रतिनिधि मौजूद नहीं थे।
साउथ अफ्रीकी राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा ने बताया कि अंतिम बयान पर सहमति जरूरी थी, भले ही अमेरिका शामिल नहीं हुआ। ट्रम्प ने आखिरी सत्र में मेजबानी स्वीकार करने के लिए एक अधिकारी भेजने का प्रस्ताव दिया था, जिसे दक्षिण अफ्रीका ने अस्वीकार कर दिया।
रामफोसा रविवार को G20 अध्यक्षता 2026 के लिए अमेरिका को प्रतीकात्मक रूप से ‘खाली कुर्सी’ के रूप में सौंपेंगे, क्योंकि अमेरिकी प्रतिनिधि की अनुपस्थिति में यह औपचारिक हस्तांतरण संभव नहीं होगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समिट के पहले दो सत्रों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि पुराने डेवलपमेंट मॉडल ने संसाधनों का दोहन किया और अब इसे बदलना जरूरी है। दूसरे सत्र में मोदी ने श्री अन्न (मोटा अनाज), जलवायु परिवर्तन, G20 सैटेलाइट डेटा साझेदारी और डिजास्टर रिस्क रिडक्शन पर भारत की पहल रखी।

मोदी ने तीन प्रमुख प्रस्ताव पेश किए
वैश्विक पारंपरिक ज्ञान भंडार – लोक ज्ञान, पारंपरिक चिकित्सा और सामुदायिक जीवन से जुड़े अनुभवों को एक मंच पर लाने की पहल।
अफ्रीका स्किल इनिशिएटिव – युवाओं के कौशल विकास और रोजगार के अवसर बढ़ाने की योजना।
ड्रग–टेरर नेक्सस फ्रेमवर्क – ड्रग तस्करी, अवैध वित्तीय नेटवर्क और आतंकवाद फंडिंग के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई का प्रस्ताव।
समिट के दौरान 2023 में दिल्ली में स्वीकृत G20 घोषणा पत्र की सराहना की गई। महिला सशक्तिकरण, जलवायु फंड और डिजिटल लिटरेसी को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी। UN सुरक्षा परिषद के विस्तार और भारत को स्थायी सदस्यता देने के प्रस्ताव को समर्थन मिला।
G20 की स्थापना 1999 में हुई थी जब एशिया में आर्थिक संकट के दौरान G7 देशों ने भारत, चीन और ब्राजील जैसे विकासशील देशों को शामिल करने की आवश्यकता महसूस की। शुरुआत में यह फोरम वित्त मंत्रियों के लिए था, 2008 से इसमें राष्ट्राध्यक्ष और प्रधानमंत्री शामिल होने लगे।

समिट से पहले दक्षिण अफ्रीका में महिलाओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा को लेकर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए। दबाव के चलते सरकार ने इसे राष्ट्रीय आपदा घोषित किया। जोहान्सबर्ग, प्रिटोरिया, केप टाउन और डरबन समेत 15 शहरों में काले कपड़ों में महिलाओं ने मौन प्रदर्शन किया। आंकड़ों के अनुसार, दक्षिण अफ्रीका में प्रतिदिन लगभग 15 महिलाओं की हत्या होती है।
जलवायु परिवर्तन, गरीबी और रोजगार को लेकर भी कई संगठनों द्वारा G20 के समानांतर विरोधी समिट आयोजित की गई।






