काबुल में कयामत: पाकिस्तानी एयर स्ट्राइक ने अस्पताल को बनाया निशाना, 250 से ज्यादा मौतों से थर्राया अफगानिस्तान
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संवाद 24 नई दिल्ली । अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच चल रहा तनाव अब एक भीषण और भयावह युद्ध का रूप ले चुका है। मंगलवार की सुबह अफगान राजधानी काबुल के लिए किसी काली रात से कम नहीं थी, जब पाकिस्तानी वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने शहर के रिहायशी इलाकों और मानवीय केंद्रों को अपना निशाना बनाया। इस हवाई हमले में काबुल के एक प्रमुख अस्पताल और नशा मुक्ति केंद्र पर बमबारी की गई, जिसमें देखते ही देखते 250 से ज्यादा मासूम जिंदगियां मलबे में तब्दील हो गईं। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, घायलों की संख्या 400 के पार पहुंच चुकी है, जिनमें से कई की हालत अत्यंत नाजुक बनी हुई है।
अस्पताल बना श्मशान: हमले की पूरी दास्तां
प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय मीडिया ‘टोलो न्यूज’ की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान की सेना ने काबुल के 9वें पुलिस जिले (PD-9) को निशाना बनाया। यहां स्थित एक नशा मुक्ति केंद्र और अस्पताल पर जब मिसाइलें गिरीं, तो वहां मौजूद मरीजों और डॉक्टरों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। हमले के वक्त अस्पताल में सैकड़ों लोग उपचाराधीन थे। धमाका इतना जोरदार था कि आसपास की इमारतें भी हिल गईं और पूरा इलाका धुएं के गुबार से भर गया। तालिबान सरकार के प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने इस हमले की पुष्टि करते हुए इसे ‘मानवता के खिलाफ अपराध’ करार दिया है। मुजाहिद ने कड़े शब्दों में कहा, “पाकिस्तानी सेना ने एक बार फिर अफगानिस्तान की संप्रभुता और हवाई क्षेत्र का उल्लंघन किया है। एक अस्पताल को निशाना बनाना, जहां बीमारों का इलाज हो रहा था, किसी भी अंतरराष्ट्रीय नियम और सिद्धांत के दायरे में नहीं आता। हम इस कायराना हरकत की कड़े शब्दों में निंदा करते हैं।”
बढ़ता तनाव और खूनी सीमा विवाद
यह हमला अचानक नहीं हुआ है, बल्कि पिछले तीन हफ्तों से दोनों देशों के बीच जारी भीषण सैन्य झड़पों का चरम बिंदु माना जा रहा है। हमले से कुछ घंटे पहले ही अफगान अधिकारियों ने दावा किया था कि साझा सीमा (डूरंड लाइन) पर दोनों सेनाओं के बीच भारी गोलीबारी हुई थी, जिसमें चार अफगान नागरिकों की मौत हो गई थी। पाकिस्तान का आरोप है कि उसकी सीमा में होने वाले आतंकी हमलों के पीछे अफगान धरती का इस्तेमाल हो रहा है, जिसे तालिबान लगातार नकारता रहा है। पाकिस्तान ने हाल ही में दावा किया था कि उसने कंधार और अन्य क्षेत्रों में तालिबान की सुरंगों और सैन्य ठिकानों को नष्ट किया है, लेकिन काबुल के अस्पताल पर हुआ यह हमला अब इस विवाद को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नया और गंभीर मोड़ दे सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों परमाणु संपन्न और सैन्य रूप से सक्रिय पड़ोसियों के बीच यह लड़ाई अब अनियंत्रित होती जा रही है।
मलबे में दबी उम्मीदें: मानवीय संकट गहराया
काबुल के अस्पतालों में इस वक्त अफरा-तफरी का माहौल है। अचानक आए 400 से अधिक घायलों की वजह से स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। दवाइयों और खून की भारी कमी देखी जा रही है। मलबे से शवों को निकालने का काम अभी भी जारी है, जिससे अंदेशा लगाया जा रहा है कि मरने वालों का आंकड़ा 300 के पार जा सकता है। नशा मुक्ति केंद्र में मौजूद वे युवा जो एक नई जिंदगी की शुरुआत करने की कोशिश कर रहे थे, आज पाकिस्तानी बारूद का शिकार बनकर हमेशा के लिए खामोश हो गए हैं।
वैश्विक बिरादरी की चुप्पी और सवाल
इस नरसंहार ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां एक ओर दुनिया की महाशक्तियां अन्य वैश्विक संघर्षों में व्यस्त हैं, वहीं दक्षिण एशिया का यह हिस्सा एक बड़े मानवीय संकट की ओर बढ़ रहा है। पाकिस्तान की इस आक्रामक कार्रवाई ने न केवल राजनयिक संबंधों को खत्म कर दिया है, बल्कि युद्ध की ऐसी आग सुलगा दी है जिसे बुझाना अब मुश्किल लग रहा है।






