एशिया में महायुद्ध के बादल: पाकिस्तान ने पार की ‘रेड लाइन’, अफगानिस्तान के सैन्य ठिकानों पर की बमबारी

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​संवाद 24 नई दिल्ली । दक्षिण एशिया में तनाव अपने चरम पर पहुँच गया है। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच जारी सीमा विवाद ने अब एक खूनी मोड़ ले लिया है। पाकिस्तानी वायुसेना ने शनिवार रात अफगानिस्तान के कंधार प्रांत में स्थित तालिबान के सैन्य ठिकानों और कथित आतंकी ठिकानों पर भीषण एयर स्ट्राइक की। यह हमला पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी की उस चेतावनी के ठीक बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि अफगानिस्तान ने पाकिस्तान के नागरिक क्षेत्रों को निशाना बनाकर ‘रेड लाइन’ पार कर दी है।

​आधी रात को दहला कंधार: आसमान से बरसी आग
​स्थानीय सूत्रों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शनिवार और रविवार की दरम्यानी रात कंधार का आसमान लड़ाकू विमानों की गर्जना से गूंज उठा। पाकिस्तान के सरकारी टेलीविजन (PTV) ने पुष्टि की है कि सेना ने कंधार में तकनीकी सहायता बुनियादी ढांचे और उपकरण भंडारण सुविधाओं को सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया है। पाकिस्तान का दावा है कि इन ठिकानों का उपयोग अफगान तालिबान और ‘फिटना अल-ख्वारिज’ (टीटीपी) द्वारा निर्दोष पाकिस्तानी नागरिकों के खिलाफ हमले करने के लिए किया जा रहा था। ​कंधार के निवासियों ने बताया कि उन्होंने रात के अंधेरे में पहाड़ियों के ऊपर से आग की लपटें उठती देखीं और भीषण धमाकों की आवाजें सुनीं। इसके अलावा, स्पिन बोल्डक और खोस्त प्रांत में भी सीमा पर झड़पों की खबरें सामने आई हैं।

राष्ट्रपति जरदारी की चेतावनी और ‘रेड लाइन’ का उल्लंघन
​इस सैन्य कार्रवाई की पृष्ठभूमि शुक्रवार रात हुई उन घटनाओं में छिपी है, जब पाकिस्तान के तीन अलग-अलग स्थानों पर ड्रोन हमले हुए थे। पाकिस्तान का आरोप है कि ये ड्रोन अफगानिस्तान की धरती से लॉन्च किए गए थे। हालांकि पाकिस्तानी सेना ने इन ड्रोनों को मार गिराने का दावा किया, लेकिन उनके मलबे की चपेट में आने से क्वेटा, कोहाट और रावलपिंडी (जहां पाकिस्तानी सेना का मुख्यालय है) में दो बच्चों सहित कई नागरिक घायल हो गए। ​राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “अफगानिस्तान ने हमारे नागरिकों को निशाना बनाने की कोशिश करके लक्ष्मण रेखा पार कर दी है। अब संयम की सीमा समाप्त हो चुकी है।” पाकिस्तान का मानना है कि कंधार के जिस ठिकाने को तबाह किया गया है, वहीं से ये ड्रोन हमले संचालित किए जा रहे थे।

​तालिबान का पलटवार: दावों को बताया निराधार
​दूसरी ओर, अफगान तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने पाकिस्तानी दावों को खारिज किया है। मुजाहिद ने कहा कि पाकिस्तानी हमलों ने एक नशा मुक्ति केंद्र और कंधार में एक खाली कंटेनर को नुकसान पहुँचाया है। उन्होंने पाकिस्तानी सेना द्वारा बताए गए सैन्य ठिकानों की मौजूदगी से इनकार करते हुए इन हमलों की कड़ी निंदा की है।

​क्षेत्रीय अस्थिरता और अंतरराष्ट्रीय चिंता
​यह संघर्ष ऐसे समय में भड़क रहा है जब पूरा क्षेत्र पहले से ही अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है। फरवरी के अंत से शुरू हुई इस झड़प में अब तक दोनों पक्षों के लगभग 99 लोग मारे जा चुके हैं, जिनमें बड़ी संख्या में नागरिक और सैनिक शामिल हैं। संयुक्त राष्ट्र (UN) के आंकड़ों के अनुसार, इस हिंसा के कारण लगभग 1,15,000 लोग अपने घरों से विस्थापित हो चुके हैं। ​इस बीच, भारत ने भी इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने अफगानिस्तान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने की बात कही, जिस पर पाकिस्तान ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए भारत पर ‘आतंकी समूहों को प्रायोजित करने’ का पुराना आरोप मढ़ दिया।

​क्या यह एक बड़े युद्ध की शुरुआत है?
​विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बढ़ता यह तनाव न केवल इन दो देशों के लिए, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया की शांति के लिए बड़ा खतरा है। एक तरफ जहां पाकिस्तान अपनी सुरक्षा चिंताओं को लेकर आक्रामक है, वहीं दूसरी तरफ तालिबान सरकार अपनी जमीन पर किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को स्वीकार करने को तैयार नहीं है। यदि कूटनीतिक स्तर पर बातचीत शुरू नहीं हुई, तो यह सीमावर्ती झड़प एक पूर्ण विकसित युद्ध का रूप ले सकती है।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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