ईरान के नए सुप्रीम लीडर, पर अमेरिका का बड़ा प्रहार: 92 करोड़ का महाइनाम और अमेरिकी नागरिकता का ऑफर
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संवाद 24 नई दिल्ली । पश्चिम एशिया के सुलगते युद्ध के मैदान के बीच संयुक्त राज्य अमेरिका ने ईरान की सत्ता के सबसे शक्तिशाली गलियारों में हड़कंप मचाने वाली घोषणा की है। अमेरिकी विदेश विभाग ने ईरान के नए संभावित सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) के शीर्ष कमांडरों के सिर पर करोड़ों रुपये के इनाम का ऐलान किया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब दोनों देशों के बीच तनाव अपने चरम पर है और युद्ध की आशंकाएं हकीकत में बदलती दिख रही हैं।
इनाम की राशि जिसने दुनिया को चौंकाया
अमेरिकी विदेश विभाग के ‘रिवॉर्ड्स फॉर जस्टिस’ कार्यक्रम के तहत मोजतबा खामेनेई और उनके सहयोगियों के बारे में जानकारी देने वाले को 10 मिलियन डॉलर (लगभग 92.47 करोड़ रुपये) देने का वादा किया गया है। यह राशि इतनी बड़ी है कि इसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा विशेषज्ञों का ध्यान खींचा है। अमेरिका का स्पष्ट उद्देश्य ईरान के शीर्ष नेतृत्व के इर्द-गिर्द मौजूद सुरक्षा घेरे में सेंध लगाना और उनके गुप्त ठिकानों या वित्तीय नेटवर्क की जानकारी हासिल करना है।
मोजतबा खामेनेई: क्यों बने अमेरिका के निशाने पर?
मोजतबा खामेनेई, ईरान के वर्तमान सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के बेटे हैं और उन्हें ईरान की सत्ता का अगला वारिस माना जा रहा है। अमेरिका का मानना है कि मोजतबा न केवल राजनीतिक वारिस हैं, बल्कि वे IRGC की उन खुफिया गतिविधियों का भी निर्देशन करते हैं जो वैश्विक स्तर पर अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाती हैं। उन्हें सीधे तौर पर ‘ब्लैकलिस्ट’ करना और उन पर इनाम रखना यह दर्शाता है कि अमेरिका अब ईरान के भावी नेतृत्व को भी मान्यता देने के मूड में नहीं है।
मुखबिरों के लिए ‘गोल्डन टिकट’: अमेरिकी नागरिकता का वादा
इस घोषणा की सबसे चौंकाने वाली बात केवल पैसा नहीं, बल्कि सुरक्षा का वादा है। अमेरिकी सरकार ने स्पष्ट किया है कि जो कोई भी मोजतबा खामेनेई या IRGC अधिकारियों के बारे में ठोस जानकारी देगा, उसकी पहचान पूरी तरह गुप्त रखी जाएगी। इतना ही नहीं, जानकारी देने वाले व्यक्ति और उसके परिवार को अमेरिका में बसने का मौका और स्थायी नागरिकता (Green Card) भी दी जा सकती है। इसे ईरान के भीतर मौजूद असंतुष्ट अधिकारियों को लुभाने के लिए अमेरिका का अब तक का सबसे बड़ा ‘हनी ट्रैप’ या कूटनीतिक दांव माना जा रहा है।
IRGC के नेटवर्क को ध्वस्त करने की रणनीति
अमेरिकी जांच एजेंसियों का दावा है कि रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के ये अधिकारी वैश्विक स्तर पर आतंकी नेटवर्क का संचालन कर रहे हैं। इस इनाम के जरिए अमेरिका उन वित्तीय स्रोतों और गुप्त ठिकानों का पता लगाना चाहता है जहाँ से ईरान अपनी सैन्य शक्ति को खाद-पानी दे रहा है। ट्रंप प्रशासन का लक्ष्य ईरान के सैन्य ढांचे को अंदर से खोखला करना है, ताकि युद्ध की स्थिति में उनकी निर्णय लेने की क्षमता को कमजोर किया जा सके।
तेहरान की प्रतिक्रिया और बढ़ता तनाव
अमेरिका की इस घोषणा के बाद तेहरान में सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं। ईरान ने इसे “कायराना हरकत” और “खुला उकसावा” करार दिया है। ईरान के सरकारी मीडिया का कहना है कि अमेरिका ऐसे पुरस्कारों के जरिए ईरानी जनता को गुमराह नहीं कर सकता। हालांकि, जानकारों का कहना है कि इतनी बड़ी इनामी राशि और अमेरिका में बसने का लालच ईरान के सत्ताधारी गुट के भीतर अविश्वास की भावना पैदा कर सकता है, जिससे आंतरिक विद्रोह का खतरा बढ़ जाता है।
डोनाल्ड ट्रंप का ‘कड़ा प्रहार’ संदेश
यह पूरी कार्रवाई राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस नई नीति का हिस्सा है जिसे ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के साथ जोड़कर देखा जा रहा है। ट्रंप ने हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा था कि ईरानी शासन के दिन अब गिनती के बचे हैं। बी-2 बमवर्षकों के हमलों के बाद अब यह वित्तीय प्रहार ईरान के आर्थिक और सामरिक मनोबल को तोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम है। अब देखना यह होगा कि ईरान इस ‘इनामी युद्ध’ का जवाब किस तरह देता है।






