रसोई में मची त्राहि-त्राहि: क्या आपके घर का सिलेंडर भी हो गया ‘ब्लैक’?
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संवाद 24 नई दिल्ली। देश के कई हिस्सों में इन दिनों रसोई गैस (LPG) को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। आम आदमी की रसोई से खुशबू गायब होती जा रही है और उसकी जगह ले ली है ‘सिलेंडर की चिंता’ ने। एक तरफ जहां उपभोक्ता अपनी बुकिंग के हफ्तों बाद भी सिलेंडर के लिए इंतजार कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बाजार में कालाबाजारी (Black Marketing) का धंधा जोरों पर है। हालिया रिपोर्ट्स और जांच में यह खुलासा हुआ है कि घरेलू सिलेंडरों की किल्लत प्राकृतिक नहीं, बल्कि कृत्रिम रूप से पैदा की गई है, जिसके पीछे बड़े रैकेट और बिचौलियों का हाथ है।
बुकिंग के बावजूद खाली पड़े हैं चूल्हे
देशभर से ऐसी खबरें आ रही हैं कि गैस एजेंसियों पर सिलेंडरों का स्टॉक तो पहुंच रहा है, लेकिन वह आम उपभोक्ताओं तक पहुंचने से पहले ही ‘गायब’ हो जा रहा है। दिल्ली, उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में स्थिति और भी गंभीर है। कई उपभोक्ताओं ने शिकायत की है कि ऐप या फोन के जरिए बुकिंग करने के 15-20 दिन बाद भी उन्हें रिफिल नहीं मिल पा रही है। जब वे एजेंसी जाते हैं, तो उन्हें ‘स्टॉक की कमी’ का हवाला देकर वापस भेज दिया जाता है।
कैसे काम कर रहा है कालाबाजारी का ‘खतरनाक’ खेल?
जांच में सामने आया है कि डिलीवरी बॉय और कुछ छोटे डिस्ट्रीब्यूटर्स मिलकर घरेलू सिलेंडरों को कमर्शियल (व्यावसायिक) उपयोग के लिए अवैध रूप से बेच रहे हैं। चूंकि कमर्शियल सिलेंडर के दाम घरेलू सिलेंडर से काफी अधिक होते हैं, इसलिए बिचौलिए घरेलू सिलेंडर से गैस निकालकर उसे छोटे सिलेंडरों में भरते हैं या सीधे होटलों और ढाबों को ऊंचे दामों पर सप्लाई कर देते हैं। इस प्रक्रिया में ‘रिफिलिंग’ का काम बेहद असुरक्षित तरीके से किया जा रहा है, जिससे घनी बस्तियों में बड़े हादसों का खतरा भी बढ़ गया है। एक घरेलू सिलेंडर जिसे 800-1000 रुपये में मिलना चाहिए, उसे कालाबाजारी करने वाले 1500 से 2000 रुपये तक में बेच रहे हैं।
आम आदमी की जेब पर दोहरी मार
महंगाई के इस दौर में गैस की किल्लत ने मध्यम और निम्न वर्ग की कमर तोड़ दी है। गृहिणियों का कहना है कि अगर समय पर सिलेंडर नहीं मिलता, तो उन्हें मजबूरन बिजली के इंडक्शन या कोयले के चूल्हे का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे खर्च और बढ़ जाता है। वहीं, जो लोग अफोर्ड कर सकते हैं, वे ‘ब्लैक’ में सिलेंडर खरीदने को मजबूर हैं, जिससे कालाबाजारी करने वालों के हौसले और बुलंद हो रहे हैं।
प्रशासन की चुप्पी और मिलीभगत का आरोप
हैरानी की बात यह है कि गैस की इस किल्लत और सरेआम हो रही कालाबाजारी के बावजूद स्थानीय प्रशासन और रसद विभाग (Supply Department) सुस्त नजर आ रहा है। कई जगहों पर छापेमारी की रस्म अदायगी तो की जाती है, लेकिन गिरोह के मुख्य सरगना अब भी पकड़ से बाहर हैं। उपभोक्ताओं का आरोप है कि कुछ भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत के बिना इतना बड़ा रैकेट चलना मुमकिन नहीं है।
कैसे बचें इस धोखाधड़ी से?
विशेषज्ञों का कहना है कि उपभोक्ताओं को सतर्क रहने की जरूरत है। अगर आपका डिलीवरी बॉय सिलेंडर देने में देरी करे या आपसे अतिरिक्त पैसों की मांग करे, तो तुरंत संबंधित गैस कंपनी के टोल-फ्री नंबर या ‘कंज्यूमर फोरम’ में शिकायत दर्ज कराएं। साथ ही, सिलेंडर लेते समय उसकी सील और वजन की जांच करना न भूलें, क्योंकि कालाबाजारी के चक्कर में गैस चोरी (Gas Pilferage) के मामले भी तेजी से बढ़े हैं।






