हॉर्मुज संकट के बीच भारत सुरक्षित: 40 देशों से तेल खरीद रहा देश, पीयूष गोयल बोले, ईंधन की कोई कमी नहीं
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संवाद 24 नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर पैदा हुई अनिश्चितता के बीच भारत सरकार ने देशवासियों को भरोसा दिलाया है कि ईंधन की आपूर्ति को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए अब करीब 40 देशों से कच्चा तेल खरीद रहा है, जिससे किसी भी संभावित आपूर्ति संकट से निपटने की क्षमता मजबूत हुई है।
हॉर्मुज संकट के बावजूद भारत की तैयारी
हाल के दिनों में पश्चिम एशिया में बढ़े सैन्य तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा बाजार का केंद्र बन गया है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन रास्तों में से एक माना जाता है और वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का लगभग 20% हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। इसी बीच सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारत ने तेल आयात के स्रोतों में विविधता लाकर अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत किया है। भारत का एक बड़ा हिस्सा अब ऐसे मार्गों और देशों से तेल आयात करता है जो हॉर्मुज मार्ग पर निर्भर नहीं हैं।
40 देशों से तेल खरीद रहा भारत
पीयूष गोयल ने कहा कि भारत ने पिछले वर्षों में तेल आयात के स्रोतों का विस्तार किया है और अब लगभग 40 देशों से कच्चा तेल खरीदा जा रहा है। इससे किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम हो गई है और आपूर्ति में व्यवधान आने की स्थिति में भी विकल्प उपलब्ध रहते हैं। सरकार का मानना है कि वैश्विक तनाव के बावजूद इस रणनीति से देश में पेट्रोल, डीजल और अन्य ईंधनों की उपलब्धता सुनिश्चित बनी रहेगी।
पर्याप्त तेल भंडार भी मौजूद
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार भारत के पास पर्याप्त रणनीतिक और वाणिज्यिक भंडार मौजूद हैं। सरकारी अधिकारियों के मुताबिक देश के पास लगभग 6 से 8 सप्ताह तक के लिए कच्चे तेल और ईंधन का स्टॉक उपलब्ध है, जिससे अचानक आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में भी देश की जरूरतें पूरी की जा सकती हैं। इसके अलावा भारत की रिफाइनरियां भी पर्याप्त मात्रा में ईंधन का उत्पादन कर रही हैं और आयात के वैकल्पिक मार्गों पर लगातार काम किया जा रहा है।
वैश्विक ऊर्जा बाजार पर संकट का असर
हॉर्मुज क्षेत्र में तनाव बढ़ने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। कई विश्लेषकों का मानना है कि यदि क्षेत्र में स्थिति लंबे समय तक अस्थिर रहती है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है। हालांकि भारत सरकार का कहना है कि देश की ऊर्जा नीति और विविध आयात स्रोतों के कारण फिलहाल घरेलू बाजार में किसी बड़े संकट की आशंका नहीं है।
जनता से घबराने की जरूरत नहीं
सरकार ने स्पष्ट किया है कि ईंधन की उपलब्धता सामान्य है और लोगों को अफवाहों पर ध्यान देने की जरूरत नहीं है। ऊर्जा मंत्रालय लगातार स्थिति की निगरानी कर रहा है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त कदम उठाने की तैयारी भी की जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की ऊर्जा रणनीति—जिसमें आयात के स्रोतों का विस्तार, रणनीतिक भंडार और वैकल्पिक आपूर्ति मार्ग शामिल हैं—ऐसे वैश्विक संकटों के समय देश को स्थिर बनाए रखने में मदद करती है।






