दुनिया पर मंडराया बड़े युद्ध का साया! ईरान के ‘सीक्रेट’ हमले की तैयारी और ट्रंप का कड़ा प्रहार, क्या फिर लगेगी तेल की कीमतों में आग?

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संवाद 24 नई दिल्ली। वैश्विक राजनीति के पटल पर एक बार फिर युद्ध के नगाड़े बजते सुनाई दे रहे हैं। अमेरिका की खुफिया एजेंसियों ने एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा किया है, जिसने पूरी दुनिया की नींद उड़ा दी है। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान आने वाले एक हफ्ते के भीतर इजरायल या अमेरिकी ठिकानों पर एक बड़े हमले की योजना बना रहा है। इस इनपुट के मिलते ही अमेरिकी प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है और नवनिर्वाचित राष्ट्रपति ने ईरान को सीधी चेतावनी दे दी है। लेकिन बात सिर्फ युद्ध की धमकियों तक सीमित नहीं है। अमेरिका ने आर्थिक मोर्चे पर भी ईरान की घेराबंदी शुरू कर दी है। ईरान पर लगे तेल प्रतिबंधों को और कड़ा करने के संकेतों ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में खलबली मचा दी है।

खुफिया रिपोर्ट में क्या है?
अमेरिकी खुफिया विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान पिछले कुछ समय से अपने मिसाइल ठिकानों और ड्रोन यूनिट्स को सक्रिय कर रहा है। यह माना जा रहा है कि सीरिया में ईरानी दूतावास पर हुए पिछले हमलों का बदला लेने के लिए तेहरान किसी बड़ी सैन्य कार्रवाई की फिराक में है। सूत्रों का कहना है कि यह हमला ‘सीमित’ नहीं होगा, बल्कि इसमें बड़े पैमाने पर बैलिस्टिक मिसाइलों और सुसाइड ड्रोन्स का इस्तेमाल किया जा सकता है।

ट्रंप की ‘मैक्सिमम प्रेशर’ नीति की वापसी
डोनाल्ड ट्रंप ने सत्ता संभालते ही ईरान के प्रति अपनी पुरानी और सख्त ‘मैक्सिमम प्रेशर’ नीति को फिर से लागू कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि यदि ईरान ने किसी भी तरह की हिमाकत की, तो उसे “ऐतिहासिक अंजाम” भुगतने होंगे। ट्रंप का मानना है कि ईरान को आर्थिक रूप से कमजोर किए बिना उसे परमाणु हथियार बनाने से नहीं रोका जा सकता। इसी कड़ी में ईरान के तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंधों को और अधिक सख्त बनाने की तैयारी की जा रही है, ताकि ईरान की आय के मुख्य स्रोत को ही बंद कर दिया जाए।

तेल की कीमतों में ‘आग’ लगने का डर
ईरान दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादकों में से एक है। जैसे ही तेल प्रतिबंधों को कड़ा करने की खबरें आईं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में उछाल देखा जाने लगा है। जानकारों का कहना है कि यदि यह तनाव युद्ध में बदलता है या होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) बंद होता है, तो कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकती हैं।

भारत पर क्या होगा असर?
भारत अपनी जरूरत का 80 प्रतिशत से ज्यादा तेल आयात करता है। मिडिल ईस्ट में किसी भी तरह की अस्थिरता का सीधा असर भारतीय मिडिल क्लास की जेब पर पड़ता है। तेल महंगा होने से माल ढुलाई महंगी होगी, जिसका असर सब्जियों से लेकर रोजमर्रा की हर चीज की कीमतों पर पड़ेगा। हालांकि, भारतीय विदेश मंत्रालय स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए है।

क्या कूटनीति का रास्ता अभी खुला है?
भले ही अमेरिका और ईरान के बीच जुबानी जंग तेज हो, लेकिन पर्दे के पीछे कतर और ओमान जैसे देश मध्यस्थता की कोशिशों में जुटे हैं। दुनिया के बाकी देश नहीं चाहते कि यूक्रेन और गाजा के बाद अब मिडिल ईस्ट में एक और बड़ा युद्ध मोर्चा खुल जाए। संयुक्त राष्ट्र ने भी सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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