रोबोट छीनेंगे आपकी नौकरी या संवारेंगे भविष्य? पीएम मोदी ने AI के डर पर लगाया विराम, युवाओं को दिया जीत का मंत्र!
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संवाद 24 नई दिल्ली। दुनिया भर में इस समय एक ही चर्चा सबसे तेज है—क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंसान की जगह ले लेगा? क्या भविष्य में मशीनें हमारे रोजगार छीन लेंगी? इन तमाम आशंकाओं और डर के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बड़ा और सकारात्मक बयान देकर देश के युवाओं और कामकाजी वर्ग को नई दिशा दिखाई है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि AI नौकरियों को खत्म नहीं करेगा, बल्कि यह प्रगति के नए द्वार खोलेगा और अनगिनत नए अवसर पैदा करेगा।
नौकरी जाने का डर नहीं, नए युग की शुरुआत
प्रधानमंत्री मोदी ने एक राष्ट्रीय कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि हर नई तकनीक अपने साथ कुछ चुनौतियां जरूर लाती है, लेकिन वह समाधान भी लेकर आती है। उन्होंने इतिहास का उदाहरण देते हुए समझाया कि जब कंप्यूटर आए थे, तब भी दुनिया में यही डर था कि करोड़ों लोग बेरोजगार हो जाएंगे। लेकिन समय ने साबित किया कि कंप्यूटर ने न केवल काम को आसान बनाया, बल्कि सॉफ्टवेयर और आईटी सेक्टर में लाखों नई नौकरियों का सृजन किया। प्रधानमंत्री के अनुसार, AI भी बिल्कुल वैसा ही बदलाव लेकर आ रहा है। यह हमारे काम करने के तरीके को बदलेगा, न कि काम करने वाले इंसान को।
AI: ‘ऑल इनक्लूसिव’ विकास का जरिया
प्रधानमंत्री ने AI की व्याख्या करते हुए इसे केवल ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे ‘एस्पिरेशनल इंडिया’ (Aspirational India) से जोड़ते हुए ‘ऑल इनक्लूसिव’ यानी समावेशी विकास का माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में AI स्वास्थ्य सेवा, कृषि और शिक्षा के क्षेत्र में क्रांति ला सकता है। अगर एक किसान को AI के जरिए मौसम और मिट्टी की सही जानकारी समय पर मिले, या दूरदराज के गांव में रहने वाले मरीज को एआई-आधारित डायग्नोस्टिक्स की सुविधा मिले, तो यह देश की जीडीपी और रोजगार दोनों में इजाफा करेगा।
युवाओं के लिए ‘अपस्किलिंग’ है सफलता की कुंजी
संवाद 24 के माध्यम से प्रधानमंत्री ने देश के युवाओं को एक खास संदेश दिया। उन्होंने कहा कि डरने के बजाय हमें तकनीक के साथ तालमेल बिठाना सीखना होगा। उन्होंने ‘अपस्किलिंग’ (Upskilling) और ‘री-स्किलिंग’ (Re-skilling) पर जोर देते हुए कहा कि जो लोग नई तकनीक को अपनाएंगे और खुद को अपडेट रखेंगे, उनके लिए नौकरियों की कोई कमी नहीं होगी। सरकार इसके लिए कई ‘कौशल विकास योजनाएं’ चला रही है ताकि भारतीय युवा वैश्विक स्तर पर एआई वर्कफोर्स का नेतृत्व
कर सकें।
भारत बनेगा ‘एआई फॉर ऑल’ का ग्लोबल हब
पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि भारत का लक्ष्य ‘AI फॉर ऑल’ (AI for All) है। हम ऐसी एआई तकनीक पर काम कर रहे हैं जो मानवीय मूल्यों और नैतिकता से जुड़ी हो। भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप ईकोसिस्टम है, और एआई के क्षेत्र में हमारे स्टार्टअप्स कमाल कर रहे हैं। प्रधानमंत्री का मानना है कि आने वाले समय में डेटा साइंटिस्ट, एआई एथिक्स विशेषज्ञ और मशीन लर्निंग इंजीनियर्स की मांग तेजी से बढ़ेगी, जो वर्तमान पारंपरिक नौकरियों से कहीं अधिक होगी।
तकनीक नहीं, मानसिकता का है खेल
प्रधानमंत्री के इस संबोधन ने यह साफ कर दिया है कि भविष्य उन लोगों का है जो तकनीक के साथ कदम से कदम मिलाकर चलेंगे। संवाद 24 से खास बातचीत में विशेषज्ञों ने भी माना कि एआई उन कामों को आसान बना देगा जो बोझिल और दोहराव वाले हैं, जिससे इंसान अपनी रचनात्मकता (Creativity) और निर्णय लेने की क्षमता (Decision Making) का बेहतर इस्तेमाल कर पाएंगे। अंत में, पीएम मोदी ने भरोसा दिलाया कि भारत एआई के इस दौर में पीछे नहीं रहेगा, बल्कि दुनिया को रास्ता दिखाएगा।






