भारत-फ्रांस दोस्ती का नया अध्याय: ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ के महाकुंभ में जुटेंगे दुनिया के दिग्गज, मैक्रों और मोदी बनाएंगे भविष्य का रोडमैप
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संवाद 24 मुंबई। भारत और फ्रांस की अटूट रणनीतिक साझेदारी अब रक्षा और अंतरिक्ष के दायरे से निकलकर भविष्य की सबसे बड़ी तकनीक ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (AI) के मैदान में अपनी धाक जमाने को तैयार है। फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों 17 से 19 फरवरी तक भारत की अपनी आधिकारिक यात्रा पर पहुंच रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर आ रहे मैक्रों की यह यात्रा न केवल द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई देगी, बल्कि दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित होने वाले दुनिया के पहले ‘AI इम्पैक्ट समिट’ में मील का पत्थर साबित होगी।
सपनों का शहर मुंबई बनेगा गवाह
अपनी यात्रा की शुरुआत राष्ट्रपति मैक्रों महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई से करेंगे। 17 फरवरी को मुंबई के प्रतिष्ठित होटल ताजमहल पैलेस में ‘भारत-फ्रांस इनोवेशन फोरम’ का आयोजन होगा। यहाँ प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों साझा प्रेस वक्तव्य जारी करेंगे और कई महत्वपूर्ण समझौतों (MoUs) पर हस्ताक्षर करेंगे। इसके बाद गेटवे ऑफ इंडिया पर एक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ ‘भारत-फ्रांस इनोवेशन वर्ष 2026’ की औपचारिक शुरुआत की जाएगी। यह पूरा वर्ष दोनों देशों के बीच तकनीक, अनुसंधान और नवाचार को समर्पित होगा।
दिल्ली में एआई का ‘महासंग्राम’
मुंबई के बाद दोनों नेता राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली का रुख करेंगे। यहाँ प्रगति मैदान के भारत मंडपम में ‘इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ का आयोजन हो रहा है। यह ग्लोबल साउथ में आयोजित होने वाला अपनी तरह का पहला वैश्विक एआई शिखर सम्मेलन है। 19 फरवरी को मैक्रों इस सम्मेलन के मुख्य सत्र में शिरकत करेंगे। इस शिखर सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य एआई को ‘जन कल्याण’ (Sarvajan Hitaya, Sarvajan Sukhaya) के लिए इस्तेमाल करना है। इस महाकुंभ में सिर्फ राजनेता ही नहीं, बल्कि दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों के दिग्गज भी जुट रहे हैं। गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई, ओपनएआई के सैम ऑल्टमैन, एनवीडिया के जेन्सेन हुआंग और माइक्रोसॉफ्ट के ब्रैड स्मिथ जैसे नाम इस चर्चा का हिस्सा बनेंगे कि कैसे एआई स्वास्थ्य, शिक्षा और कृषि में बदलाव ला सकता है।
होरिजोन 2047: भविष्य की रणनीति
दोनों देशों के बीच बातचीत का मुख्य आधार ‘होरिजोन 2047’ रोडमैप होगा। इसमें रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता, राफेल लड़ाकू विमानों के नए सौदे और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा सहयोग पर गहन चर्चा होगी। खबर है कि रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के प्रस्ताव पर भी विचार कर सकती है, जो भारत की सामरिक शक्ति को अभूतपूर्व मजबूती देगा। भारत और फ्रांस की यह जोड़ी आज वैश्विक मंच पर एक ऐसी धुरी बन चुकी है, जो न केवल तकनीकी रूप से सक्षम है बल्कि शांति और नवाचार के प्रति भी संकल्पित है। राष्ट्रपति मैक्रों की यह चौथी भारत यात्रा वैश्विक राजनीति और तकनीक के भविष्य को तय करने वाली साबित होगी।






