बांग्लादेश चुनाव की आहट के बीच अल्पसंख्यक समुदाय पर खतरे के साये – हिंदू युवक की निर्मम हत्या ने बढ़ाए सवाल
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संवाद 24 नई दिल्ली । बांग्लादेश में 12 फरवरी 2026 को होने वाले आम चुनावों से ठीक एक दिन पहले अल्पसंख्यक समुदाय पर बढ़ते तनाव का बीच मौलवीबाजार जिले के कमलगंज उपजिला में एक 28-साल के हिंदू युवक की निर्मम हत्या ने देशभर में सुरक्षा, धार्मिक सहिष्णुता और चुनावी माहौल के प्रति गंभीर चिंता उत्पन्न कर दी है। स्थानीय पुलिस के अनुसार, युवक रतन साहूकार को चाय बागान में युवक के हाथ-पैर बाँधे हुए और शरीर पर गंभीर चोटों के निशान के साथ मृत पाया गया। घटनास्थल पर मिले निशानों से स्पष्ट होता है कि हत्या से पहले उसकी बेरहमी से पिटाई की गई थी, जिससे व्यापक भय फैल गया है।
चुनावी हिंसा और अल्पसंख्यकों का भय
यह घटना ऐसे समय पर सामने आई है जब बांग्लादेश सालों की राजनीतिक उथल-पुथल के बाद पहली बार लोकतांत्रिक चुनाव कराने जा रहा है, जिसमें 127 मिलियन से अधिक मतदाता भाग लेंगे। देश भर में पहले से ही हिंसक घटनाओं, हमलों और तनाव से जुड़ी खबरें लगातार बढ़ रही हैं, खासकर अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा को लेकर। करीब एक महीने पहले मयमनसिंह में एक हिंदू युवा, दीपु चंद्र दास, को भी भीड़ ने पीट-पीट कर मार डाला था — घटना के बारे में सरकार ने जांच और मुआवजे की घोषणा की थी। इसके अलावा मिमेंसिंघ में एक 62-साल के हिंदू व्यापारी का भी हत्या का मामला सामने आया, जिसने और भी चिंता बढ़ा दी।
राजनीतिक माहौल और चुनाव की पृष्ठभूमि
बांग्लादेश में पिछले दो सालों में बड़े राजनीतिक बदलाव हुए हैं। जुलाई 2024 में एक व्यापक नागरिक विद्रोह के बाद, लगभग 15 साल तक देश पर शासन कर चुकी शीख़ हसनाबाट की सरकार को सत्ता से हटाया गया। इसके बाद नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनूस के नेतृत्व में अस्थायी सरकार गठित की गई, जो देश में चुनाव प्रक्रिया की देखरेख कर रही है। अब चुनावों में प्रमुख रूप से बांग्लादेश राष्ट्रीय पार्टी (BNP) और **इस्लामवादी समूह जमात-ए-इस्लामी जैसे गठबंधनों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है। चुनाव को लोकतांत्रिक मूल्यों की कसौटी माना जा रहा है, जहां पिछले शासन की तुलना में लोकतंत्र की स्थिति का परीक्षण होगा।
अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर अंतरराष्ट्रीय चिंता
निवर्तमान माहौल के बीच, अंतरराष्ट्रीय समुदाय और मानवाधिकार संस्थाएँ भी चिंता व्यक्त कर रही हैं कि चुनाव से पहले राजनीतिक हिंसा और धार्मिक भेदभाव बढ़ रहा है। जैसे-जैसे मतदान की तारीख नज़दीक आ रही है, अल्पसंख्यक समुदायों में डर की लहर फैल रही है कि वे अपने वोट स्वतंत्र रूप से डाल पाएंगे या नहीं। कुछ अंतरराष्ट्रीय समूहों ने चेतावनी दी है कि यदि हिंसा को काबू में नहीं रखा गया, तो यह न केवल एक सुरक्षित चुनाव की राह में बाधा बनेगा, बल्कि बांग्लादेश के सामाजिक ताने-बाने को भी कमजोर करेगा।
सरकार की प्रतिक्रिया और कार्रवाई
पुलिस और शासकीय एजेंसियों ने हत्या की घटना की जांच शुरू कर दी है। हालांकि अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है, स्थानीय अधिकारियों ने कहा है कि आरोपियों को जल्द गिरफ्तार करने की कोशिश जारी है। पिछले मामलों में, राजस्व और सुरक्षा बलों ने अन्य हत्याओं सहित भीड़ हिंसा की जांच में भी कदम उठाए हैं और कुछ मामलों में गिरफ्तारियां भी की गई हैं, जिससे यह स्पष्ट है कि सरकार स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास कर रही है।






