क्या पूर्व सेना प्रमुख की किताब पर लग गई है रोक? प्रकाशक पेंगुइन ने तोड़ी चुप्पी
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संवाद 24 नई दिल्ली। भारतीय सेना के पूर्व प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की बहुचर्चित संस्मरण (Memoir) ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ (Four Stars of Destiny) को लेकर पिछले कुछ दिनों से जारी अटकलों के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। विश्व प्रसिद्ध पब्लिकेशन हाउस ‘पेंगुइन रैंडम हाउस’ ने आखिरकार इस पूरे मामले पर अपनी आधिकारिक स्थिति स्पष्ट कर दी है। प्रकाशक ने उन खबरों का खंडन किया है जिनमें दावा किया जा रहा था कि किताब की प्रतियां पहले ही बाजार में आ चुकी हैं या प्रकाशित हो चुकी हैं।
प्रकाशक का आधिकारिक स्पष्टीकरण
पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि जनरल नरवणे की पुस्तक अभी तक प्रकाशन की प्रक्रिया में नहीं गई है। प्रकाशक के अनुसार, “अभी तक किताब की कोई भी कॉपी न तो प्रिंट हुई है और न ही बाजार में वितरण के लिए भेजी गई है।” यह बयान उन रिपोर्टों के बाद आया है जिनमें दावा किया जा रहा था कि किताब के कुछ अंश मीडिया में लीक हो गए हैं और सरकार की आपत्तियों के कारण इसकी छपाई रुकवा दी गई है।
विवाद की जड़: क्या है इस संस्मरण में?
जनरल नरवणे की यह किताब तब चर्चा में आई जब इसके कुछ लीक हुए अंशों में जून 2020 की पूर्वी लद्दाख की गलवन घाटी झड़प का जिक्र होने की बात सामने आई। कथित तौर पर किताब में इस बात का विवरण है कि कैसे चीनी सैनिकों की घुसपैठ के बाद भारतीय सेना ने जवाबी कार्रवाई की योजना बनाई थी और उस दौरान सरकार व सेना के बीच किस तरह का संवाद हुआ था।
रक्षा मंत्रालय और सुरक्षा एजेंसियों के लिए सैन्य अधिकारियों द्वारा लिखी गई ऐसी किताबें हमेशा से संवेदनशील रही हैं। नियमानुसार, किसी भी पूर्व सैन्य अधिकारी को अपनी सेवा के दौरान की गोपनीय जानकारी सार्वजनिक करने से पहले संबंधित विभागों से ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ (NOC) लेना अनिवार्य होता है। सूत्रों की मानें तो रक्षा मंत्रालय वर्तमान में इस पुस्तक की पांडुलिपि (Manuscript) की समीक्षा कर रहा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इसमें कोई ऐसी जानकारी न हो जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन सके।
सरकार और सेना की सतर्कता
पूर्व सेना प्रमुख की किताब को लेकर सरकार का रुख बेहद सतर्क है। सेना के उच्च पदों पर रहे अधिकारियों के पास रणनीतिक और सुरक्षा से जुड़ी गोपनीय जानकारियां होती हैं। जनरल नरवणे ने अपने कार्यकाल के दौरान चीन के साथ गतिरोध और अग्निपथ योजना जैसे महत्वपूर्ण बदलावों को देखा है। ऐसे में उनकी किताब से लीक हुए अंशों ने रक्षा गलियारों में बेचैनी पैदा कर दी थी। पेंगुइन द्वारा अब यह स्पष्ट करना कि “किताब प्रकाशित नहीं हुई है”, यह संकेत देता है कि अभी भी समीक्षा प्रक्रिया जारी है और इसमें बदलाव की गुंजाइश हो सकती है।
अभिव्यक्ति बनाम राष्ट्रीय सुरक्षा
यह मामला एक बार फिर उस पुरानी बहस को जन्म दे चुका है कि एक पूर्व सैन्य अधिकारी की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और देश की सुरक्षा के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। इससे पहले भी कई जनरलों की किताबों को लेकर विवाद हुए हैं, लेकिन जनरल नरवणे जैसे शीर्ष पद पर रहे व्यक्ति की किताब का इस तरह रुकना बड़े सवाल खड़े करता है। विपक्षी दलों और कुछ सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि यदि किताब में सच लिखा गया है तो उसे सामने आने देना चाहिए, जबकि सरकार समर्थक विशेषज्ञों का तर्क है कि सीमा पर जारी तनाव के बीच किसी भी संवेदनशील जानकारी का सार्वजनिक होना देश के हित में नहीं है।






