आसाराम आश्रम पर संकट के बादल: क्या ढह जाएगा 500 करोड़ का साम्राज्य? गुजरात हाईकोर्ट के एक फैसले ने मचाई खलबली!
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संवाद 24 गुजरात। आध्यात्मिक गुरु से दुष्कर्म के दोषी तक का सफर तय करने वाले आसाराम बापू के साम्राज्य पर अब कानून का ‘बुलडोजर’ गरजने को तैयार है। गुजरात उच्च न्यायालय ने एक ऐतिहासिक फैसले में अहमदाबाद के मोटेरा स्थित आसाराम आश्रम की करीब 45,000 वर्ग मीटर सरकारी जमीन को वापस लेने का रास्ता साफ कर दिया है। यह वही जमीन है जिस पर सालों से ‘अवैध’ निर्माणों का जाल फैला हुआ था। हाईकोर्ट के इस सख्त रुख के बाद अब आश्रम के भीतर बने 32 से अधिक अवैध ढांचों को गिराने की उलटी गिनती शुरू हो गई है।
अवैध निर्माण और 500 करोड़ की जमीन का विवाद
सालों से चल रही इस कानूनी जंग का अंत अब आश्रम के ध्वस्तीकरण की ओर बढ़ता दिख रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मोटेरा स्थित इस आश्रम की जमीन की कीमत लगभग 500 करोड़ रुपये आंकी गई है। राज्य सरकार ने दशकों पहले यह जमीन केवल धार्मिक और धर्मार्थ कार्यों के लिए आवंटित की थी। हालांकि, समय के साथ यहाँ नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए व्यापक अवैध निर्माण किए गए। अहमदाबाद नगर निगम (AMC) की जांच में पाया गया कि आश्रम के भीतर 32 ऐसी संरचनाएं खड़ी की गई हैं जिनका न तो कोई नक्शा पास है और न ही प्रशासन से अनुमति ली गई है।
ओलंपिक और राष्ट्रमंडल खेलों का बड़ा लक्ष्य
इस पूरी कार्रवाई के पीछे केवल अतिक्रमण हटाना ही एकमात्र मकसद नहीं है, बल्कि भारत का एक बड़ा सपना भी जुड़ा है। अहमदाबाद 2030 के राष्ट्रमंडल खेलों और 2036 के ओलंपिक खेलों की मेजबानी की तैयारी कर रहा है। मोटेरा का यह इलाका नरेंद्र मोदी स्टेडियम के पास स्थित है और इसे ‘सरदार पटेल स्पोर्ट्स एन्क्लेव’ के रूप में विकसित किया जाना है। 650 एकड़ में फैले इस मेगा प्रोजेक्ट के लिए आसाराम आश्रम सहित आसपास की जमीनों का अधिग्रहण अनिवार्य हो गया था। सरकार का तर्क है कि जहां विश्व स्तरीय खेल सुविधाएं और ‘ओलंपिक विलेज’ बनना है, वहां किसी भी तरह का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
कोर्ट की कड़ी टिप्पणी: “किस्त-किस्त में कब्जा मंजूर नहीं”
सुनवाई के दौरान जब आश्रम की ओर से इन निर्माणों को ‘इम्पैक्ट फीस’ (जुर्माना) भरकर नियमित करने की गुहार लगाई गई, तो अदालत और सरकार दोनों ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। सरकारी वकील ने कोर्ट में स्पष्ट कहा कि “सार्वजनिक भूमि पर इंच-दर-इंच कब्जा करना और फिर उसे नियमित करने की मांग करना कानून का मजाक उड़ाना है।” जस्टिस वी.डी. नानावती ने आश्रम को अपनी दलीलें पेश करने का पर्याप्त मौका दिया, लेकिन अंततः सरकारी जमीन को खाली करने का आदेश दे दिया। कोर्ट ने आश्रम को खाली करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है, जिसके बाद नगर निगम की पीली मशीनें (बुलडोजर) अपनी कार्रवाई शुरू कर सकती हैं।
भक्तों में हड़कंप, प्रशासन अलर्ट
जैसे ही यह खबर फैली, आसाराम के अनुयायियों के बीच चिंता की लहर दौड़ गई। हालांकि, प्रशासन इस बार कोई ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है। मोटेरा क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। यह केवल एक आश्रम का मामला नहीं है, बल्कि पास ही स्थित भारतीय सेवा समाज और सदाशिव प्रज्ञा मंडल आश्रम के अवैध अतिक्रमणों को भी नोटिस जारी किए गए हैं।






