बलूचिस्तान में ‘ऑपरेशन हेरोफ’ का खूनी मंजर: BLA का भीषण हमला, महिला आत्मघाती दस्तों के इस्तेमाल से दहला पाकिस्तान!

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संवाद 24 नई दिल्ली। पाकिस्तान का अशांत प्रांत बलूचिस्तान इस वक्त बारूद के ढेर पर बैठा नजर आ रहा है। प्रतिबंधित अलगाववादी संगठन ‘बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी’ (BLA) ने रविवार और सोमवार की दरम्यानी रात पूरे सूबे में एक साथ कई बड़े हमलों को अंजाम दिया है, जिसे उन्होंने ‘ऑपरेशन हेरोफ’ (Operation Herof) का नाम दिया है। इन हमलों में सबसे डरावना पहलू महिला आत्मघाती हमलावरों (Female Suicide Bombers) का सक्रिय रूप से मोर्चे पर उतरना है। बीएलए ने दावा किया है कि इस बड़े ऑपरेशन में उन्होंने पाकिस्तानी सेना के लगभग 200 जवानों को निशाना बनाया है, हालांकि आधिकारिक तौर पर आंकड़ों की पुष्टि होना अभी बाकी है।

एक साथ कई जिलों में कोहराम
ताजा जानकारी के अनुसार, बलूचिस्तान के मुसाखेल, कलात, मस्तुंग और तटीय शहर ग्वादर सहित कई इलाकों में विद्रोहियों ने मोर्चा खोल दिया। मुसाखेल जिले में सशस्त्र हमलावरों ने अंतर-प्रांतीय राजमार्ग को अवरुद्ध कर दिया और पंजाब प्रांत से आने वाले ट्रकों और बसों से यात्रियों को उतारकर उनकी पहचान पूछी। इसके बाद हुई हिंसा ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। यह हमला केवल सेना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि रेल पटरियों और संचार टावरों को भी निशाना बनाकर बलूचिस्तान का संपर्क बाकी दुनिया से काटने की कोशिश की गई है।

महिला फिदायीन दस्तों का बढ़ता खतरा
इस पूरे घटनाक्रम में जो बात अंतरराष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में है, वह है ‘मजीद ब्रिगेड’ की महिला लड़ाकों की भूमिका। बीएलए ने कुछ तस्वीरें और वीडियो जारी कर दावा किया है कि उनकी महिला आत्मघाती हमलावरों ने पाकिस्तानी सेना के कैंपों में घुसकर खुद को उड़ा लिया। यह रणनीति पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है, क्योंकि पारंपरिक सुरक्षा घेरे अक्सर महिलाओं की जांच में उतनी सख्ती नहीं बरतते, जिसका फायदा ये संगठन उठा रहे हैं।

दावों और हकीकत की जंग
जहाँ एक तरफ बीएलए के प्रवक्ता जीयंद बलूच ने 200 सैनिकों को मारने का भारी-भरकम दावा किया है, वहीं पाकिस्तानी सेना की जनसंपर्क शाखा (ISPR) ने इसे सिरे से नकार दिया है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, हताहतों की संख्या दर्जनों में है, जिसमें नागरिक और सुरक्षाकर्मी दोनों शामिल हैं। पाकिस्तानी हुकूमत ने इस हमले को “विदेशी साजिश” करार दिया है, जबकि स्थानीय विश्लेषकों का मानना है कि बलूचिस्तान में लंबे समय से चल रही संसाधनों की लूट और मानवाधिकारों के हनन ने स्थानीय युवाओं में भारी आक्रोश भर दिया है।

CPEC पर मंडराते संकट के बादल
ये हमले उस समय हुए हैं जब चीन बलूचिस्तान में अपने महत्वाकांक्षी ‘चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे’ (CPEC) के तहत अरबों डॉलर का निवेश कर रहा है। बीएलए का मुख्य लक्ष्य चीनी परियोजनाओं को रोकना और विदेशी निवेशकों को यह संदेश देना है कि यह क्षेत्र निवेश के लिए सुरक्षित नहीं है। यदि पाकिस्तान जल्द ही सुरक्षा व्यवस्था पर काबू नहीं पाता, तो उसे न केवल भारी जनहानि, बल्कि बड़े आर्थिक नुकसान का भी सामना करना पड़ सकता है।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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