दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे पर भयंकर हादसा: कार ट्रक से लटकी, नोएडा के चार यात्रियों की दर्दनाक मौत

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संवाद 24 नई दिल्ली । राजस्थान के दौसा जिले में मंगलवार सुबह दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे पर एक भीषण सड़क हादसा हुआ, जिसमें नोएडा के एक परिवार की गाड़ी एक भारी-भरकम ट्रक से टकरा कर लगभग कुछ मीटर तक घसीटती चली गई। इस दर्दनाक दुर्घटना में चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई और एक गंभीर रूप से घायल हुआ है। यह हादसा उस राजमार्ग पर हुआ, जो दिल्ली से मुंबई तक के महत्वपूर्ण व्यापारिक और परिवहन मार्ग के रूप में जाना जाता है। घायलों और मृतकों की जानकारी मिलते ही स्थानीय प्रशासन, पुलिस और स्वास्थ्य कर्मी तुरंत घटनास्थल पर पहुंच गए और राहत तथा बचाव कार्य शुरू कर दिया गया। वहीं, रफ्तार और बड़े वाहनों की भीड़ के कारण एक्सप्रेसवे पर तमाम लंबा जाम भी लग गया।

क्या हुआ हादसा? शुरुआती पोस्टमार्टम
पुलिस और प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, सुबह के करीब उस समय स्थिति भयावह हो गई जब एक भारी ट्रक ने अचानक तेज रफ्तार से आ रही सवारियों से भरी मारुति अर्थिगा कार में जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी ज़ोरदार थी कि कार का संतुलन बिगड़ गया और गाड़ी सीधे ट्रक के आगे फंस कर लगभग कुछ मीटर तक एक्सप्रेसवे पर लटकी चली गई। टक्कर के तुरंत बाद मौके पर उपस्थित राहगीरों और पुलिसकर्मियों ने बताया कि दुर्घटना इतनी भयंकर थी कि कार के परखच्चे उड़ गए और पीछे सवार लोगों को गंभीर चोटें आईं। कई घायलों को तत्काल नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टर्स ने चार लोगों को मृत घोषित कर दिया। एक व्यक्ति की हालत बेहद गंभीर बताई जा रही है, और उसे बेहतर इलाज के लिए रेफर कर दिया गया है।

हादसे के चश्मदीद बयान और माहौल
कुछ राहगीरों ने बताया कि सुबह का समय था और तेज हवा तथा हल्की धुंध ने दृश्यता को और भी चुनौतीपूर्ण बना दिया था। इसी बीच, ट्रक और कार के बीच अचानक भिड़ंत ने पूरे मार्ग को क्षणों में एक जटिल और खतरनाक स्थिति में बदल दिया। स्थानीय किसानों और यात्रियों ने पुलिस को तुंरत सूचना दी और बचाव कार्य में मदद की। दौसा पुलिस की प्रथम दृष्टया जांच में यह संकेत मिला है कि एक्सप्रेसवे पर वाहन गति सीमा से अधिक चल रहे थे और बड़े वाहन तथा छोटे वाहन के बीच दूरी बनाए रखना मुश्किल था। पुलिस ने कहा कि घटना को लेकर आगे विस्तृत जांच जारी है और सीसीटीवी, मोबाइल लोकेशन तथा अन्य तकनीकी साक्ष्यों को एकत्र किया जा रहा है।

पीड़ितों की पहचान और स्थानीय प्रतिक्रिया
घटना में मृत चारों व्यक्तियों की पहचान उत्तर प्रदेश के नोएडा निवासी के तौर पर हुई है। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, ये सभी एक साथ किसी कार्यक्रम या पारिवारिक काम से वापस लौट रहे थे, तभी यह दुर्भाग्यपूर्ण हादसा हो गया। पुलिस ने मृतकों के नाम तथा पहचान का अभी आधिकारिक तौर पर विस्तार से विवरण जारी नहीं किया है, लेकिन परिवार वालों द्वारा घटना को लेकर प्रशासन से न्याय की मांग की जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि एक्सप्रेसवे पर दुर्घटनाएं बढ़ती जा रही हैं और सुरक्षा उपाय पर्याप्त नहीं हैं, खासकर अधिक दूरी पर होमिस्टैड और वॉचटॉवर की कमी से नज़रिया कमज़ोर हो जाता है। कई लोग नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) से बेहतर बैरिकेड, चेतावनी प्रकाश और स्पीड चेक पॉइंट की मांग भी कर रहे हैं।

ट्रैफिक और प्रशासन की कार्रवाई
घटना के बाद पुलिस ने तुरंत उस हिस्से को अवरुद्ध कर दिया ताकि राहत और बचाव कार्य तेजी से किया जा सके। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और स्थानीय प्रशासन ने कहा कि स्पेशल टीम घटनास्थल पर भेजी गई है, जो ट्रैफिक को दूसरे मार्गों पर डायवर्ट कर रही है और भारी वाहनों तथा यात्रियों को सुरक्षित मार्ग प्रदान करने की कोशिश कर रही है। स्थानीय प्रशासन ने मृतकों के परिजनों से मिलकर सहायता और राहत राशि का आश्वासन दिया है और कहा है कि जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भी यह देखने पहुंच रहे हैं कि क्या एक्सप्रेसवे पर नियमों का उल्लंघन या वाहन गति से संबंधित लापरवाही किसी तरह से इस दुर्घटना का कारण बनी।

दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे: एक अहम मार्ग, लेकिन जोखिम भी
दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे भारत के सबसे बड़े ग्रीनफील्ड हाईवे प्रोजेक्ट में से एक है, जो नई दिल्ली से मुंबई तक 1,350 किलोमीटर लंबा है और देश के प्रमुख शहरों को जोड़ता है। यह राजमार्ग तेज़ और सुगम यात्रा का वादा करता है, लेकिन एक्सप्रेसवे पर लगातार बढ़ रहे हादसे इस बात को भी उजागर करते हैं कि गति और सुरक्षा के बीच संतुलन कितना ज़रूरी है। हाल ही में दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे पर कोहरे और धुंध के कारण भी कई बड़े हादसे देखे गए हैं, जिसमें कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए या जान गंवाई। ऐसे में विशेषज्ञ कहते हैं कि बेहतर रोड साइन, रडार आधारित स्पीड मॉनिटर, और डेड एंगल चेतावनी सिस्टम लगाए जाने की जरूरत है ताकि इस तरह की त्रासदियों को रोका जा सके।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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