शेख नाहयान की भारत यात्रा: क्या है चर्चा की असली वजह? वैश्विक रणनीति से ऊर्जा तक होगा फोकस!

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संवाद 24 नई दिल्ली। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान आज (19 जनवरी 2026) भारत की राजधानी नई दिल्ली पहुंच रहे हैं, जहाँ वे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाक़ात करेंगे और द्विपक्षीय सहयोग को और भी सुदृढ़ बनाने पर चर्चा करेंगे। इस दौरे को दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी (Comprehensive Strategic Partnership) को नई दिशा देने का अवसर माना जा रहा है। इस यात्रा को शेख नाहयान का भारत में तीसरा आधिकारिक दौरा बताया गया है, जबकि वे पिछले दशक में पांचवीं बार भारत आ रहे हैं। भारत-UAE के बीच राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक रिश्ते काफी मजबूत हैं और यह दौरा इन रिश्तों को और गहरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

राज्यों के बीच जारी सहयोग को देखते हुए, दोनों नेताओं के बीच व्यापार, निवेश और रक्षा सहयोग से जुड़े मुद्दों पर गंभीर बातचीत होने की उम्मीद है। व्यापार साझेदारी पहले से ही मजबूत है और दोनों देशों के बीच Comprehensive Economic Partnership Agreement (CEPA) के माध्यम से व्यापारिक लेन-देन में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली है। ऊर्जा साझेदारी भी इस दौरे की मुख्य बातों में शामिल होगी। भारत और UAE दोनों के पास ऊर्जा संसाधनों के विकास और आपूर्ति में महत्वपूर्ण साझेदारी है। ऊर्जा सुरक्षा और दीर्घकालिक ऊर्जा आपूर्ति समझौतों को और सुदृढ़ करने के लिए भी इस दौर की बातचीत में स्थान हो सकता है।

क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर सहमति:
इस दौरे का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह भी है कि दोनों देशों के नेता क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक राजनीतिक चुनौतियों पर विचार करेंगे। खाड़ी क्षेत्र में तनाव, ईरान-अमरीका संबंधों के हालात, यमन और गाजा जैसे क्षेत्रों में राजनीतिक उथल-पुथल से उत्पन्न स्थिति इस चर्चा का हिस्सा हो सकती है। इन सभी मुद्दों पर भारत और UAE के दृष्टिकोण में कई समानताएँ हैं और उनका विश्लेषण भी वार्ता का मुख्य लक्ष्य रहेगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह दौरा दक्षिण एशिया तथा मध्य-पूर्व में स्थिरता और सहयोग की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत देगा, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था और सुरक्षा ढांचे को नई दिशा मिलेगी।

व्यापार और निवेश की संभावनाएँ:
भारत और UAE के बीच में व्यापार का स्तर पहले से ही कई अरब डॉलर के पार हो चुका है। भारत के निर्यात में गहने, परिष्कृत पेट्रोलियम, इलेक्ट्रॉनिक सामान और कृषि उत्पाद जैसे प्रमुख मदें शामिल हैं, जबकि UAE से ऊर्जा संसाधन और कच्चा तेल भारत को आयात होता है। दोनों देशों के बीच व्यापार को और विस्तारित करने की योजनाएँ भी इस दौरे के एजेंडे पर हो सकती हैं। इस दौरे के जरिए रक्षा सहयोग और टेक्नोलॉजी साझेदारी पर भी विस्तार से चर्चा होने की उम्मीद जताई जा रही है। नई तकनीकों, इनोवेशन और डिजिटल क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएँ दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती हैं।

भारत और UAE के बीच ऊर्जा, व्यापार, संस्कृति, शिक्षा तथा निवेश जैसे क्षेत्रों में पहले भी कई समझौते हो चुके हैं, और इस दौरे से इन समझौतों को और मजबूती मिलने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा दोनों देशों के बीच साझेदारी को नई ऊँचाइयों पर ले जाने वाला अवसर साबित हो सकता है — खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों से गुजर रही है। कुल मिलाकर, शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की भारत यात्रा सिर्फ एक औपचारिक मुलाक़ात नहीं बल्कि दो राष्ट्रों के बीच रणनीतिक, आर्थिक, ऊर्जा तथा वैश्विक सुरक्षा एजेन्डों पर गहन संवाद का अवसर है, जो आने वाले समय में दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण परिणाम ला सकता है।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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