जंग से जनहित तक: गाजा में तुर्की की भूमिका पर इजरायल-अमेरिका विवाद

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संवाद 24 नई दिल्ली । गाजा को लेकर अमेरिका के शांतिस्थापना और पुनर्निर्माण के नए अंतरराष्ट्रीय प्लान में तुर्की की भागीदारी को लेकर इजरायल ने कड़ा विरोध जताया है। इस विवाद ने मध्य पूर्व के सबसे लंबे संघर्ष के समाधान को लेकर चल रही कूटनीतिक कोशिशों में एक नई टक्कर पैदा कर दी है। अमेरिका की तरफ से घोषणा की गई है कि गाजा के लिए बनाई जा रही “Board of Peace” (शांति बोर्ड) में कई देशों के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाएगा, जिनका लक्ष्य गाजा में स्थिरता, शांति और पुनर्निर्माण को आगे बढ़ाना है। इस बोर्ड के गठन के हिस्से के तौर पर तुर्की के विदेश मंत्री हाकन फिटन सहित अन्य अंतरराष्ट्रीय नेताओं को नियुक्त किया गया है, जिसे इजरायल ने अपनी नीति के विपरीत बताया है।

इजरायल का तनाव:
इजरायल के प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस कदम पर असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि यह उनकी नीति के खिलाफ है और तुर्की का गाजा में कोई सशस्त्र या प्रशासनिक रोल उनके सुरक्षा हितों के लिए गंभीर चिंता का विषय है। इजरायली नेताओं का कहना है कि इस तरह का बोर्ड बिना उचित समन्वय के बनाया गया, जिससे उनकी तरफ़ से प्रतिकूल प्रतिक्रिया सामने आई है। कुछ इजरायली राजनीतिक समूहों ने हवा में यह सुझाव भी दिया कि अगर तुर्की और क़तर जैसे देशों को पुनर्निर्माण और प्रशासन में अधिक भाग दिया गया, तो वे फिर से सैन्य विकल्पों पर विचार कर सकते हैं — जो कि शांति प्रयासों के लिए चिंताजनक है।

अंतरराष्ट्रीय “Board of Peace” क्या है?
अमेरिका की पहल का मकसद है गाजा के लिए एक ट्रांज़िशनल गवर्निंग स्ट्रक्चर बनाना, जहाँ बलूटी ढांचे से हटकर पेशेवर और तकनीकी विशेषज्ञों के नेतृत्व में काम चलाया जाए। इस बोर्ड के शुरुआती सदस्यों में ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री, अमेरिका के वरिष्ठ राजनयिक तथा मध्य पूर्व विशेषज्ञ शामिल हैं।
यह बोर्ड दो स्तरों पर काम करेगा:
Founding Executive Board – जो शांति प्रक्रिया का समग्र रणनीतिक नेतृत्व करेगा।
Gaza Executive Board – जो गाजा में प्रशासन, सुरक्षा और पुनर्निर्माण के रोज़मर्रा के कामों का पर्यवेक्षण करेगा।
तुर्की का प्रतिनिधित्व इसी दूसरे बोर्ड में रखा गया है, जिसके कारण इजरायल के गुस्से और विरोध ने मीडिया में प्रमुख जगह बना ली है।

क्यों विवाद इतना तेज़?
तुर्की लंबे समय से इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष में फिलिस्तीन के समर्थन में रहा है और अक्सर इजरायल की कठोर सैन्य कार्रवाइयों की आलोचना भी की है। इसलिए जब आधुनिक शांति और प्रशासन की योजना में उसे प्रमुख भूमिका दी गई, तो इजरायल ने इसे अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरनाक बताया।
शांति बोर्ड का हिस्सा बनने की तुर्की की भूमिका से यह स्पष्ट होता है कि केवल सैन्य संघर्ष नहीं बल्कि राजनीतिक और प्रशासनिक शासन भी इस जंग के अगले चरण का बड़ा मुद्दा बन चुका है। मध्यपूर्व में कई देशों और संस्थाओं की भागीदारी से यह योजना सफल हो सकती है, लेकिन इजरायल-तुर्की के बीच गहरा मतभेद इसे एक जटिल राजनीतिक पहेली भी बना देता है। अंतरराष्ट्रीय शांति प्रयास, मानवीय सहायता, और भविष्य के नेतृत्व को लेकर यह विवाद आगामी हफ्तों में और गर्म होता दिखाई दे रहा है — जो गाजा में शांति प्रक्रिया को सीधे प्रभावित कर सकता है।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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