अमेरिका पर ईरान का तीखा प्रहार: “अशांति, हिंसा और आतंकवाद फैलाने की साजिश” — मध्य पूर्व में तनाव चरम पर
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संवाद 24 दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर तेज हो गया है। ईरान ने अमेरिका पर आरोप लगाया है कि वह लंबे समय से उसके देश में असुरक्षा, हिंसा और सामाजिक अशांति फैलाने की कोशिश कर रहा है। ईरानी नेतृत्व का कहना है कि अमेरिका की नीतियां केवल राजनीतिक दबाव तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे ईरान को अंदर से कमजोर करने की रणनीति का हिस्सा हैं।
ईरान का दावा: आंतरिक मामलों में सीधा हस्तक्षेप
ईरान के विदेश मंत्रालय ने साफ शब्दों में कहा है कि अमेरिका प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से उसके आंतरिक मामलों में दखल दे रहा है। ईरान के अनुसार, यह हस्तक्षेप अंतरराष्ट्रीय कानून और देशों की संप्रभुता के मूल सिद्धांतों का खुला उल्लंघन है।
विरोध प्रदर्शन और विदेशी उकसावे का आरोप
ईरानी अधिकारियों का कहना है कि देश में होने वाले विरोध प्रदर्शन स्वाभाविक सामाजिक-आर्थिक कारणों से हो सकते हैं, लेकिन उन्हें भड़काने और दिशा देने का काम विदेशी ताकतें कर रही हैं। ईरान का आरोप है कि अमेरिका ऐसे हालात का इस्तेमाल राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने के लिए कर रहा है।
प्रतिबंधों को बताया ‘आर्थिक युद्ध’
ईरान ने अमेरिका द्वारा लगाए गए कड़े प्रतिबंधों को आर्थिक युद्ध करार दिया है। सरकार का कहना है कि इन प्रतिबंधों का सबसे ज्यादा असर आम जनता पर पड़ रहा है, जिससे महंगाई, बेरोजगारी और जीवन यापन की लागत लगातार बढ़ रही है।
मानवाधिकारों पर दोहरे मापदंड का आरोप
ईरानी नेतृत्व का कहना है कि अमेरिका मानवाधिकारों का मुद्दा उठाकर राजनीतिक हस्तक्षेप को सही ठहराने की कोशिश करता है। ईरान का दावा है कि जिन देशों में अमेरिका ने सैन्य हस्तक्षेप किया, वहां की स्थिति आज भी अस्थिर है, ऐसे में उसके दावे खोखले प्रतीत होते हैं।
‘अधिकतम दबाव’ नीति पर ईरान की नाराजगी
ईरान ने अमेरिका की “अधिकतम दबाव” नीति की कड़ी आलोचना की है। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, इस नीति का उद्देश्य किसी समाधान तक पहुंचना नहीं, बल्कि ईरान की राजनीतिक और आर्थिक स्थिरता को कमजोर करना है।
अमेरिकी धमकियों से बढ़ा तनाव
ईरान का कहना है कि अमेरिका की ओर से दिए जा रहे बयान और सैन्य चेतावनियां स्थिति को शांत करने के बजाय और अधिक तनावपूर्ण बना रही हैं। ईरानी नेतृत्व ने चेतावनी दी है कि किसी भी तरह के हस्तक्षेप का कड़ा जवाब दिया जाएगा।
मध्य पूर्व की अस्थिरता पर ईरान की चिंता
ईरान ने कहा कि अमेरिका की नीतियों ने पूरे मध्य पूर्व को अस्थिरता की ओर धकेला है। क्षेत्र पहले से ही संघर्षों से जूझ रहा है और ऐसे में किसी भी तरह का नया टकराव हालात को और गंभीर बना सकता है।
सरकार का रुख: शांति के साथ सख्ती
ईरानी सरकार का कहना है कि शांतिपूर्ण विरोध और संवाद लोकतांत्रिक अधिकार हैं, लेकिन हिंसा और अराजकता को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। सरकार देश की सुरक्षा और एकता को सर्वोपरि मानती है।
विश्लेषकों की चेतावनी: बढ़ सकता है वैश्विक संकट
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान-अमेरिका तनाव केवल दो देशों तक सीमित नहीं रहेगा। यदि हालात बिगड़ते हैं तो इसका असर वैश्विक राजनीति, तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।
संवाद की जरूरत पर जोर
ईरान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वह दबाव और धमकी के बजाय संवाद और कूटनीति को प्राथमिकता दे। ईरान का कहना है कि स्थायी शांति का रास्ता सम्मानजनक बातचीत से ही निकल सकता है। मौजूदा हालात में पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि ईरान और अमेरिका आगे कौन सा रास्ता अपनाते हैं। यह टकराव केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि वैश्विक स्थिरता से जुड़ा हुआ मुद्दा बन चुका है।






